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- Abohar News Even After Spending Millions Of Rupees Not A Single Moment Of Life Can Be Available Pt Joshi
लाखों रुपए खर्च करने पर भी बीते जीवन का एक क्षण भी उपलब्ध नहीं हो सकता : पं. जोशी
समय बहुत अमूल्य है। लाखों रुपए खर्च करने पर भी बीते जीवन का एक क्षण भी नहीं मिल सकता। इसलिए मनुष्य काे अपने जीवन का एक क्षण भी प्रमोद, आलस्य एवं पाप भोगों में नहीं खोना चाहिए। जो मनुष्य अपने इस अमूल्य समय को बिना सोचे विचारे व्यर्थ में व्यतीत करेगा उसे आगे चल कर पछताना पड़ेगा। यह विचार अबोहर रोड स्थित श्री मोहन जगदीश्वर दिव्य आश्रम में आयोजित सत्संग समारोह में पंडित पूरन चंद जोशी ने व्यक्त किए। इस दौरान हरपाल सिंह बेदी प्रधान नगर कौंसिल ने ज्योति प्रचंड करके मंदिर में माथा टेका। विशाल जनसमूह के समक्ष बोलते हुए जोशी जी ने बताया कि प्रत्येक कर्म करने से पूर्व सावधानी पूर्वक सोच लेना चाहिए कि मैं जो कुछ कर रहा हूं। वह मेरे लिए लाभदायक है या नहीं। अगर उसमें कहीं त्रुटि नजर आए तो तुरंत सुधार करना चाहिए। संसार की किसी भी वस्तु को अपना न समझो, सब कुछ परमात्मा का समझ कर उनको ही अर्पण कर दो। पं. जोशी ने कहा कि दयावान मनुष्य तो दूसरों के दु:ख देखकर कांप उठता है तथा उसका दु:ख दूर करने में लग जाता है। पं.जोशी ने प्रवचनों में बताया कि अज्ञान से अहंकार बढ़ता है। जितना अहंकार अधिक होगा उतना ही सांसारिक बोझ अधिक होगा। रजोगुण, तमोगुण व सत्व गुण इन तीन गुणों में तमोगुण सबसे भारी है। तमोगुणी मनुष्य नीचे जाता है, रजोगुण समाज है, सत्व गुण हल्का है। हल्की चीज ऊपर तैरती है, भारी डूबेगी, आसुरी सम्पदा तमोगुणों को नीचे ले जाती है। दैवी संपदा ही सत्व गुण है। यही ईश्वरीय सम्पत्ति है। यह सम्पत्ति ज्यों-ज्यों बढ़ती है त्यों-त्यों साधक ऊपर की ओर उठता है । पं.जोशी ने बताया कि -अगर देखा जाए तो संसार में सबसे अधिक संख्या तो सांसारिक भोगों में आसक्त मनुष्यों की है। जब तक प्राणी में किसी प्रकार का सीमित अहंभाव रहता है तब तक किसी न किसी प्रकार के दोष का उत्पन्न होने अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मुनियों में मुनि होने का भाव, ज्ञानियों में ज्ञानी होने का भाव, भक्तों को भक्त होने का भाव जब तक जीवित रहता है तब तक निर्दोषता से एकता नहीं होती बल्कि संबंध होता है। अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
सत्संग में माथा टेकते हुए हरपाल सिंह बेदी।