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हरपिंदर राणा को शिक्षा व समाज में बेहतर काम करने पर मिल चुके हैं आठ अवार्ड

एक वर्ष पहले
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महिला दिवस के मौके पर मलोट शहर सब्जी विक्रेता राज रानी का जिक्र करना जरूरी बनता है। राजरानी के संघर्षमई जीवन से प्रेरणा लेकर अाैर महिलाएं भी अपने आप को हालातों से लड़ने की मिसाल मिलती है। भले ही समाज में महिला व पुरुष दोनों का महत्व एक समान है, जिस तरह एक पहिए से गाड़ी नहीं चल सकती, उसी तरह समाज रूपी गाड़ी को चलाने के लिए पुरुष व महिला की स्थिति एक सामान होनी जरूरी है। मलोट शहर की मंडी हरजी राम निवासी 47 वर्षीय राजरानी शहर के कोर्ट रोड पर एडवर्डगंज कॉर्नर के किराए पर दुकान लेकर सब्जी की दुकान चलाती है, जिसकी विवाहिता जीवन की गाड़ी बहुत ही अच्छी चल रही थी। राज रानी अपने पति व दो बच्चों व सास के लिए घरेलू महिला की जिम्मेदारी निभाती थी। जबकि पति श्याम लाल सब्जी विक्रेता था, गुजारा अच्छा चल रहा था। रेलवे पुल का निर्माण होने के बाद उनका कारोबार कम हो गया तो उसके पति ने कोर्ट रोड पर रेहड़ी के साथ सब्जी लगाना शुरू कर दिया। करीब 32 साल की उम्र में राज रानी ने अपने घरेलू कार्यों के साथ-साथ पति से सब्जी के काम में हाथ बटाना शुरू कर दिया। जिसके करीब 3 माह के बाद अचानक पति श्याम लाल की दिल का दौरा पड़ने के कारण मौत हो गई व परिवार की पूरी जिम्मेदारी राज रानी के सिर आ गई। बेटा छोटा होने के कारण सुबह 4 बजे सब्जी मंडी से सब्जी खरीद कर लाने की जिम्मेदारी पर पूरा दिन सब्जी बेचने का काम राज रानी ने संभाल लिया व दिन रात एक करते हुए बच्चों का पालन पोषण करने के साथ बेटे को बीए की पढ़ाई करवाई व बेटी को एमए तक पढ़ाया व एक एक पैसा जोड़कर प्लाट खरीदकर अपना मकान बनाया, किसी के आगे अपनी मजबूरी का वास्ता देकर हाथ नहीं फैलाया।

महिलाएं शिक्षित होंगी तो अपराध कम होंगे

हरपिंदर राणा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध तब तक कम नहीं होंगे जब तक महिलाएं शिक्षित नहीं होंगी। शिक्षित होने पर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार कुछ हद तक कम हो सकेंगे।


परिवार ने लक्ष्य पूरा करने के लिए दिया सहयोग

हरपिंदर राणा ने बताया कि उनके जीवन के इस लक्ष्य को पूरा करने में उनके परिवार ने पूर्ण सहयोग दिया है और उनकी दोस्त मीनाक्षी मनहर हमेशा उनके साथ होती है। हरपिंदर राणा अपाहिज होने के कारण साधारण ब्लैक बोर्ड पर विद्यार्थियों को नहीं पढ़ा सकती, इसलिए वह फॉर्ट ब्लैक बोर्ड का उपयोग करती है और विद्यार्थी भी उनका पूर्ण सहयोग करते हैं। हरपिंदर राणा अध्यापक के साथ-साथ लेखिका भी हैं और वह कई पुस्तकें भी लिख चुकीं हैं जिनमें विन परो परवाज, निर्भउ निरवैर, क्या वह जल परी थी व रंग दे रिश्ते शामिल हैं।


सब्जी बेचकर राजरानी ने बेटी को एमए तक पढ़ाया

भागसर प्राइमरी स्कूल में 2002 में की ज्वाइनिंग

हरपिंदर राणा ने 1999 में बीएड की पढ़ाई खालसा कॉलेज मुक्तसर से पूरी की और 1 जनवरी 2002 में भागसर के सरकारी स्कूल लड़कियों में इन्होंने सरकारी अध्यापिका के तौर पर अपनी ज्वाइनिंग की।

मिल चुके हैं यह सम्मान

दिव्यांग होने के बावजूद नहीं हारी हिम्मत, लक्ष्य किया हासिल

हर महिला को अपने अंदर की शक्ति को जगाना होगा, तभी समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा मिलेगी

राजरानी

हरपिंदर राणा

अमित अरोड़ा| मुक्तसर

कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस तरह की कहावत तो अक्सर ही आप ने सुनी होगी लेकिन मुक्तसर की एक दिव्यांग महिला हरपिंदर राणा ने अपनी मेहनत व हिम्मत से इस कहावत को सच साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब यह पेशे से एक सरकारी अध्यापिका हैं। इनका जन्म 29 अक्टूबर 1974 को हुआ है। जब यह 8 माह की थी तो एक डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगा दिया जिस कारण यह अपाहिज हो गई। करीब 4 वर्ष की उम्र में इन्होंने स्कूल में शिक्षा ग्रहण करनी शुरु कर दी। 1990 में इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा व 1992 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1997 में स्नातक की डिग्री पूरी करने के पश्चात एक प्राइवेट स्कूल में बतौर टीचर की सेवाएं निभानी शुरू की। लेकिन यहां एक अन्य टीचर की ओर से इन्हें ताना दिया गया कि वह अपाहिज होने के कारण एक कुशल अध्यापिका नहीं बन सकती। तभी इन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य अपना लिया कि वह एक कुशल सरकारी अध्यापिका बनेगी और उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल भी किया।

संघर्षों से प्रेरणा लेकर हालात से लड़ने की शक्ति मिलती है**

भास्कर वुमेन ऑफ द ईयर 2011, मदर टेरेसा 2012, होनी तो बलवान 2013, कामरेड संधूरा सिंह यादगारी सम्मान 2013, माता नछत्तर कौर यादगारी सम्मान 2015, बेस्ट टीचर सम्मान 2016, युवा अवार्ड 2017, नारी एक शान 2018
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