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धान की रोपाई शुरू, लेबर मांग रही मनमानी मजदूरी, रहने-खाने का ले रही अलग चार्ज

Ferozepur News - गिरते भूजल स्तर से चिंतित सरकार ने धान की रोपाई पर लगाई पाबंदी वीरवार से हटा दी है। इसके साथ ही किसानों ने धान की...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:45 AM IST
Firozpur News - start of transplanting of paddy labor demand arbitrary wages separate charge for living and eating
गिरते भूजल स्तर से चिंतित सरकार ने धान की रोपाई पर लगाई पाबंदी वीरवार से हटा दी है। इसके साथ ही किसानों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है। इस बार भी जिले में 1.87 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई होगी। किसानों ने धान की रोपाई के लिए जमीन पहले से ही तैयार कर रखी थी और जैसे ही सरकार की पाबंदी हटी किसानों ने तुरंत धान की रोपाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही लोकल व प्रवासी मजदूरों को काम मिलने लगा है। दरअसल गिरते भूजल स्तर से चिंतित सरकार ने 15 जून तक धान की रोपाई पर पाबंदी लगाई हुई थी। अब यह पाबंदी 13 जून को हटा दी गई है। इसीलिए मानसून के नजदीकी अवधि को ध्यान में रखते हुए जून मिड तक पाबंदी कई वर्षों से लगाई जा रही है। जिले में करीब 1.87 लाख हेक्टेयर धान की फसल की सिंचाई के लिए करीब 93 हजार ट्यूबवेल हैं।

धान की फसल की सिंचाई के लिए जिले में लगे हैं 93 हजार ट्यूबवेल

बिजली की रहेगी निरंतर सप्लाई

कृषि विभाग के तकनीकी सहायक डॉ. मुख्तयार सिंह ने बताया 30 जून तक जिले में धान की रोपाई का 85 प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा। बिजली विभाग ने भी अब धान की रोपाई को ध्यान में रखते हुए हर रोज निरंतर बिजली की सप्लाई का शेड्यूल बना लिया है। जिले में शत-प्रतिशत रकबे में बासमती धान की ही रोपाई होगी।

धान का मूल्य

वित्तीय वर्ष एमएसपी

2013-14 1345

2014-15 1400

2015-16 1450

2016-17 1510

2017-18 1590

2018-19 1770

लेबर के इंतजाम में जुटे किसान

धान की रोपाई में मुख्य समस्या लेबर की किसानों के समक्ष आती है। प्रदेश में यूपी और बिहार से धान की रोपाई करने के लिए लेबर पहुंच चुकी है जिनसे किसान संपर्क करने में लगे हुए हैं। कुछ किसानों ने पहले ही लेबर बुक कर ली थी और अपने खेतों में उनको रहने के लिए जगह व अन्य सुविधाएं दे दी। धान की रोपाई करने पर एक मजदूर का लगभग 650 रुपये प्रतिदिन मजदूरी बन जाती है।

प्रति एकड़ पांच हजार से अधिक आ रहा खर्च|कृषि खर्च के जानकार हरचरण सिंह सामा ने बताया कि धान की रोपाई पर ही प्रति एकड़ पर 5 हजार रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। 2500 रुपये तो लेबर को रोपाई के ही देने पड़ रहे हैं। इसके अलावा लेबर का चाय-खाने का खर्च, दो से तीन बार जमीन की जोताई, कदू आदि को मिला लिया जाए तो 5 से 6 हजार रुपये प्रति एकड़ पर खर्च हो रहा है।

मुक्तसर-192 लाख एकड़ में होगी धान की रोपाई, 150 एकड़ में लगेगा बासमती

मुक्तसर|पंजाब सरकार द्वारा धान की रोपाई का निर्धारित समय 13 जून से किसानों ने रोपाई का काम शुरु कर दिया है। रोपाई के लिए बिहार व उत्तर प्रदेश से मजदूर ट्रेनों द्वारा पंजाब पहुंच रहे हैं। कई किसान तो मजदूरों को लाने के लिए बठिंडा के रेलवे स्टेशन पर डेरे लगाए बैठे हैं व अपने साथ ले जाने के लिए मजदूरों को कई तरह के लालच भी दे रहे हैं। सरकार ने गत वर्ष 20 जून की बजाए इस वर्ष 13 जून से धान लगाने की इजाजत दी है इसलिए किसानों को 8-8 घंटे बिजली की सप्लाई करनी शुरू कर दी है। कृषि अधिकारी डॉ. बलजिंदर सिंह बराड़ ने बताया कि मुक्तसर जिले में 2018 में 305 लाख एकड़ क्षेत्रफल में धान लगा था जोकि इस वर्ष कम होकर करीब 192 लाख एकड़ रहने की संभावना है। इसी तरह जिले में गत वर्ष 140 लाख एकड़ क्षेत्रफल में बासमती की बिजाई हुई थी जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 150 लाख एकड़ होने की संभावना है। उन्होंने खुशी जाहिर करते बताया कि इस वर्ष जिले में गत वर्ष के मुकाबले क्षेत्रफल दो गुणे से भी अधिक होने की संभावना है। गत वर्ष नरमे नीचे करीब 77 लाख एकड़ क्षेत्रफल था जबकि इस वर्ष यह क्षेत्रफल बढ़कर 180 लाख एकड़ होने की संभावना है।

47 गांवों में लागू नहीं होती धान बीजने की पाबंदी :मुक्तसर जिले के 47 ऐसे गांव हैं जिन पर पंजाब सरकार की यह पाबंदी लागू नहीं होती क्योंकि यह गांव सेम की मार के नीचे हैं जिस कारण इन गांवों को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा धान बीजने की छूट दी गई है।

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