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घर की तंगी दूर करने 22 माह पहले मनीला गया था सुखजीत, परिजनों को जीवनभर का दुख दे गया

Ferozepur News - बिलखते सुखजीत के पिता। विदेश में जाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लिए 22 माह पूर्व मुदकी से...

Feb 15, 2020, 07:41 AM IST
Firozpur News - sukhjeet who went to manila 22 months ago to overcome the financial problems of the house gave a lifetime of sorrow to the family
बिलखते सुखजीत के पिता।

विदेश में जाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लिए 22 माह पूर्व मुदकी से मनीला गए युवक की पांच फरवरी को अज्ञात लोगाें ने गोलियां मारकर हत्या कर दी थी, घर में पैसे की कमी के कारण परिजन अपने बेटे का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए। मनीला में रह रहे उसके दोस्तों द्वारा उसके इलाज पर किए गए खर्च के बाद परिजनों ने उनके ऊपर ओर बोझ न डालने को लेकर मृतक का वहीं संस्कार करना उचित समझा व शुक्रवार को संस्कार के समय वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने बेटे के अंतिम दर्शन किए व संस्कार की प्रकिया देखी। इस मौके पर परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

शुक्रवार को मनीला में बेटे के संस्कार को वीडियो कॉल के जरिए देखते समय सुखजीत की मां मनजीत कौर अपने बेटे के पास में न होने के चलते बिलखती रही। वहीं वीडियो कॉल के दौरान कहती रही कि उसके बेटे को देखने दे वह उसे दुलार देना चाहती है। इस दौरान मृतक का पूरा परिवार व रिश्तेदार बुरी तरह बिलखते दिखाई दिए व अफसोस कर रहे थे कि सुखजीत उनके बीच नहीं रहा। वहीं वह उसके अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए।

35 वर्षीय मृतक सुखजीत सिंह दोधी मुदकी के वार्ड नंबर 7 पत्ती करमू के का रहने वाला था। सुखजीत दसवीं पास था व काफी समय तक वह यहां रोजगार की तलाश में लगा रहा मगर कोई रोजगार नहीं मिला। सुखजीत के 60 वर्षीय पिता नछतर सिंह पूर्व फौजी हैं वह वर्ष 1992 मेंं फौज से रिटायर हुए। मृतक का भाई सर्बजीत लाडी शादी शुदा है व मुदकी में ही हेयर सैलून चलाता है। परिवार के पास कुल पौने 2 एकड़ जमीन है जिसपर खेती कर उनके घर का गुजारा चल रहा है।

पिता ने कहा...सुखजीत के दोस्तों ने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन नहीं बच पाया

पिता नछतर सिंह ने कहा कि सुखजीत के दोस्तों ने किसी भी तरह से उसके इलाज में कमी नहीं छोड़ी मगर वह बच नहीं पाया। उन्होंने कहा कि उसके दोस्त सुखजीत का शव भेजना चाहते थे मगर वह नहीं चाहते थे कि उनका इतना पैसा खर्च हो क्योंकि उसके दोस्त सुखजीत के इलाज पर पहले ही काफी पैसा खर्च कर चुके थे। नछतर सिंह ने कहा कि जब सुखजीत मनीला गया था तब भी पूरा खर्च दोस्तों ने ही किया था। आंखों में आंसू लिए मृतक के पिता ने कहा कि घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने के चलते वह इतना पैसा कहां से एकत्रित करते कि वह खुद अपने बेटे का शव वहां से ला पाते। उन्होंने बिलखते हुए कहा कि नौजवान बेटे के जाने के बाद वह अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।


एनजीओ सर्व सेवा समिति के सदस्यों ने सुखजीत के इलाज को पैसा एकत्रित करना शुरू कर दिया था

मनीला में अज्ञात लोगों ने सुखजीत को गोलियां मार कर दी थी हत्या

मां बोली...लाडले को देखने दे, दुलार देना चाहती हूं...और फफक कर रो पड़ी

सुखजीत (मृत) की फोटो हाथ में लिए बैठे उसके पिता, भाई, भाभी व मां।

नौजवान सुखजीत के साथ मनीला में हुई घटना के बाद एनजीओ सर्व सेवा समिति सदस्यों ने उसके इलाज के लिए पैसा एकत्रित करना शुरू कर दिया था। एनजीओ के अध्यक्ष मनमीत सिंह संधु व उपाध्यक्ष अवतार सिंह सेखों ने कहा कि सुखजीत उनके गांव का ही रहने वाला है व जैसे ही उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने परिवार के साथ व उसके दोस्तों के साथ बातचीत की। मनीला में रह रहे उनके दोस्तों से भी बात हुई कि जैसे ही उसकी स्थिति में थोड़ा सुधार होता है वह उसे भारत भेजें यहां आने पर वह परिवार के कंधे के साथ कंधा जोड़कर सुखजीत के इलाज में पूरी मदद करेंगें मगर बुधवार को सुखजीत ने प्राण त्याग दिए । मनीला में हुई नौजवान सुखजीत की मौत के बाद मुदकी के वार्ड नंबर 7 के पार्षद गुरलाभ सिंह ने कहा कि इस प्रकार की विदेशों में हो रही घटनाओं की ओर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए । इसके लिए कड़ा कानून बनना चाहिए व वहां की सरकारों को भी चाहिए कि इस प्रकार की उनके देश में हुई घटना के बाद कम से कम परिजनों तक शव पहुंचाने की व्यवस्था जरूर की जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में परिजन अपने नौजवान के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाते जोकि बहुत दुख की बात है।


परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने के चलते ही सुखजीत ने गांव से फिलीपाइन की राजधानी मनीला में गए दोस्तों के साथ बातचीत कर मनीला जाने का मन बनाया। गांव से ही गए 8-10 दोस्तों में दीपा, हरजीत, जस्सा व हरप्रीत ने सुखजीत को मनीला के लिए ऑफर किया। 29 अप्रैल 2018 को सुखजीत अपने गांव के ही दोस्त इंद्रजीत के साथ मनीला गया। वहां जाकर उसने अपने दोस्तों के साथ फाइनेंस का काम शुरू किया। घटनाक्रम के दिन 5 फरवरी को भी वह काम पर ही था जिस दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने सुखजीत पर गोलियां बरसा दी। इस घटना के बाद दोस्तों ने उसे वहां आकर संभाला व उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया। कई दिनों तक चले उपचार के बाद 12 फरवरी को सुखजीत ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

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