मुक्तसर में जलघर के टैंकों की हाे रही सफाई सप्ताह में एक दिन मिल रहा पानी, लाेगाें में राेष

Ferozepur News - गमिर्याें के दिनाें में वैसे ही लाेगाें काे अधिक पानी का अावश्यकता पड़ती है इसी बीच मुक्तसर में अधिकारियों ने...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:10 AM IST
KHAI News - water is available one day in the cleaning of water tank tanks in muksar range in lageen
गमिर्याें के दिनाें में वैसे ही लाेगाें काे अधिक पानी का अावश्यकता पड़ती है इसी बीच मुक्तसर में अधिकारियों ने जलघर के टैंकों की सफाई शुरू करवा दी जिसके चलते पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। जिस कारण लोगों काे परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा है लोगों को पीने, नहाने व अन्य कामों के लिए पानी खरीद कर इस्तेमाल करना पड़ रहा है। लाेगाें का कहना है कि टैंकाें की सफाई ताे सर्दी में भी हो सकती थी क्योंकि सर्दी में पानी की लागत गर्मी के मुकाबले कम होती है। अब मुख्य जलघर के पानी वाले चार बड़े टैंक सूखे पड़े हैं। गत समय में लगे सबमर्सिबल पंप भी कहीं चलते दिखाई नहीं देते। जलघर द्वारा सप्ताह में मुश्किल से एक दिन पानी दिया जा रहा है वह भी कभी आधी रात को व कभी आधा घंटा। जबकि भू-जल खराब होने के कारण मजबूरी में लोगों को पानी खरीद कर कपड़े धोने व नहाना पड़ रहा है। नामदेव नगर के जसबीर सिंह ने बताया कि वह प्रतिदिन तीस रुपए का पीने वाला पानी लेते हैं व तीसरे दिन दो सौ रुपए में नहाने-धोने के लिए पानी की टंकी भरवाते हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्य जलघर में पानी की एक बूंद भी नहीं है व ऊपर से पानी की बंदी होने कारण सप्ताह भर पानी की ओर कमी रहेगी। थांदेवाला रोड के बख्शीश सिंह ने बताया कि उनके घर सप्ताह में एक दिन पानी आता है तो उसमें भी सीवरेज का गंदा पानी मिला होता है जिस कारण पीने के काबिल तो क्या होना, नहाने के काबिल भी नहीं। यही हाल बठिंडा रोड का है। डॉ. सुरेंद्र ग्रोवर ने बताया कि वह हर माह मोटा बिल देने के बावजूद भी उनके घर पानी नही पहुंचता व हफता-दस दिन थोड़ा बहुत पानी आता है वह गंदा होने कारण उपयोग में नहीं आ सकता। लोगों की मांग है कि जलघर के अधिकारी पानी की गंभीर समस्या को ध्यान में रखते तुरंत पुख्ता प्रबंध करें। जल सप्लाई विभाग के कार्यकारी इंजीनियर प्रभलीन सिंह धंजू ने बताया कि सर्दी में सिलट सूखती नहीं इस कारण इस बार गर्मी में सफाई का काम किया गया है परंतु इस दौरान अचानक बंदी आ गई जिस कारण पानी की कमी पैदा हो गई। उन्होंने बताया कि जितना सा पानी है , वह बारी बारी करके शहर में दिया जाता है।

मुक्तसर के जलघर के सूखे पड़े टैंक।

जलघर के टैंक में लगे सरकंडे के पेड़।

अमृत प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में

बंदी के दौरान जलघर में पानी नहीं जाता व पानी की कमी पैदा हो जाती है। शहरवासियों की मांग पर मुक्तसर को केंद्र सरकार की ‘अमृत प्रोजेक्ट में लाया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत मुक्तसर के जलघर को 10 किलोमीटर दूर सरहंद फीडर से जोड़ा जाना है ताकि बंदी का संकट खत्म हो सके। पंजाब में 167 के करीब वाटर वर्क्स हैं व 16 शहर अमृत योजना के अधीन हैं। इनके लिए 5 हजार करोड़ रुपए की ग्रांट केंद्र सरकार ने सीवरेज बोर्ड को देनी है व करीब इतने पैसे ही बोर्ड ने डालने थे। बोर्ड ने कर्जे के लिए अप्लाई किया है। परंतु इस दौरान पंजाब के संबंधित विभाग के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का विभाग बदलने कारण यह प्रोजेक्ट हाल की घडी ठंडे बस्ते में पड़ गया है।

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