- Hindi News
- National
- Firozpur News Worshiping Shitala Mata On Basiora Brings Happiness And Peace To The House
बास्योड़ा के दिन शीतला माता की पूजा करने से घर में आती है सुख-शांति
16 मार्च रात 12 बजे के बाद विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर बास्योड़ा का त्याेहार शुरू होगा और 17 मार्च बाद दोपहर तक चलेगा। छावनी की कुम्हार मंडी स्थित सिद्धपीठ श्रीशीतला देवी मन्दिर कमेटी के प्रधान नंद किशोर गुगन ने देते हुए बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मां शीतला देवी की कृपा के साथ तीन दिनों तक चलने वाले बास्योड़ा का मेला का आयोजन की सारी तैयारियां पूरी कर ली है। उन्होंने बताया कि मन्दिर में माथा टेकने के लिए आने वाले भक्तों की किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए कमेटी के पदाधिकारियों और सेवादारों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। जोकि 16 मार्च को रात 12 बजे से ही अपनी ड्यूटी संभाल लेंगे।
मन्दिर के मुख्य पुजारी संजीव कुमार पांडेय ने बताया कि एक समय की बात ही किसी गांव में एक बुढ़िया माई रहती थी जोकि बास्योड़ा को ठंडी रोटी खाती व माता शीतला की पूजा करती थी, गांव में उसके अलावा काेई भी माता शीतला की पूजा नहीं करता था। एक दिन वास्योड़े के दिन पूरा गांव जलकर राख हो गया। लेकिन बुढ़िया माई की झोपड़ी बच गई। पूरे गांव वालों ने बुढ़िया माई से पूछा कि गांव में आग लगने से सारे घर जल गए लेकिन तेरी झोपड़ी नहीं जली, तब बुढ़िया माई बोली कि मैने बास्योड़े के दिन शीतला माता की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की थी और ठंडी रोटी खाई थी, लेकिन गांव के किसी और व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया। इसलिए मेरी झोपड़ी बच गई और बारी सारा गांव जल कर राख हो गया। बस उसी दिन से सारे गांव में ढिंढोरा पिटवा दिया गया कि बास्योड़े वाले दिन ठंडी रोटी खाए व शीतला माता की पूजा करें। उन्होंने बताया कि उसी दिन से बास्योड़े का त्यौहार मनाने की रीत चली, और होली के दो दिनों के बाद माता शीतला की पूजा एक दिन पहले बने खाने से होने लगी ताकि माता शीतला को ठंडक पहुंच सकें।
पंडित संजीव कुमार ने बताया कि माता शीता की पूजा-अर्चना करने से चेचक, कोहड़ के अलावा चमड़ी के हर रोग नष्ट हो जाते है। एसी मान्यता सदियों से चली आ रही है इसलिए किसी भी बच्चे या बुजुर्ग को किसी भी प्रकार के चमड़ी रोड हो तो वह माता शीतला को झाड़ू और कच्ची लस्सी चढ़ाएं ताकि माता शीतला उन्हें रोग से मुक्ति दें। कमेटी के अध्यक्ष नंद किशोर गुगन ने बताया कि माता शीतला के बास्योड़ा के मेले से पहले रविवार को माता शीतला की चांदी के सवा तीन किलों की मूर्ति पूरे विधि-विधान के साथ रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को सांय से ही माता शीतला देवी की पूजा शुरु हो जाएगी और रविवार को हवन के बाद प्राण प्रतिष्ठा के बाद माता चिंतपूर्णी से विशेष रुप से पुजारी आकर माता रानी को स्थापित किया जाएगा।
माता शीतला देवी के बारे में जानकारी देते पंडित संजीव कुमार।