‘धीयां, रुख ते किताबां हर घर होन जी’

Gurdaspur News - लोक लिखारी सभा गुरदासपुर की मासिक एकत्रता सभा के संयोजक मक्खन कुहाड़ के आवास पर संपन्न हुई। एकत्रता की अध्यक्षता...

Mar 20, 2020, 07:41 AM IST

लोक लिखारी सभा गुरदासपुर की मासिक एकत्रता सभा के संयोजक मक्खन कुहाड़ के आवास पर संपन्न हुई। एकत्रता की अध्यक्षता कवियत्री हरप्रीत कौर सिम्मी ने की। सभा का संचालन करते हुए राजेश बब्बी ने कोरोना वायरस संबंधी खोज भरपूर जानकारी दी। इसके लक्षण बताने के साथ-साथ इसके बचाव के टिप्स भी बताए। उधर, मक्खन कुहाड़ ने देश के तनाव भरे हालात और दिल्ली में हुए दंगों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने 5 अप्रैल को पंजाबी साहित्य अकादमी के हो रहे चुनावों में सदस्यों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने निराशा जताते कहा कि कोरोना वायरस के चलते केंद्रीय लेखक सभा के कार्यक्रमों को आगे बढ़ा देने की आशंका है।

उसके बाद कवि दरबार की महफिल सजी, जिसका आगाज लक्खन मेघियां की कविता ‘धीयां, रुख ते किताबां हर घर होन जी’ के साथ हुआ। उधर, शीतल गुन्नोपुरी ने गजल ‘दिन नू तू दिन ही लिख, रात नू तू रात लिख-दिस रहे जेहो जेहे हालात उहो जेहे हालात लिख’ सुनाई। इसी प्रकार विजय तालिब ने ‘टप्पे’, महेश चंद्रभानी ने ‘अज मैनू किते मां नईं लभनी’ कविता पेश की। रमनीक हुंदल ने ‘रख पत्थर दिल उते मापियां पुत्त परपदेसी तोरे’, हरपाल सिंह बैंस ने ‘सत्त असमानी उडना सी जिस पिंजरे दे विच वाड़ क्यों दिता’, सुखविंदर रंधावा ने गजल ‘मंजिल जो ना पहुंचे-परते वी ना घरां नू’ सुनाई। तरसेम भंगू ने लेख ‘आओ खुशियां मानिए’ सुनाया।

उधर, राजेश बब्बी ने ‘अज फेर हनेरा छा गया’ और मक्खन कुहाड़ ने गजल ‘जद-जद ही खेह उडाई दिल्ली ने’, हरप्रीत सिम्मी ने ‘होए जिथे सुख चूरोचूर ओए दिवानियां’ सुनाकर कर वाहवाही लूटी। इस मौके सविंदर कौर, सोहन सिंह, कपूर सिंह घुम्मन, सेमुअल मसीह आदि साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में सभा प्रधान शीतल गुन्नोपुरी ने आए साहित्यकारों/श्रोताओं का धन्यवाद कर समापन किया।

कवि दरबार में उपस्थित साहित्यकार।-भास्कर

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