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युवा, गृहिणी, कारोबारी, किसान वर्ग को रास नहीं आया बजट

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के आखिरी इस बजट को लोग चुनावी व लुभावने अंदाज में...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर

2019 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के आखिरी इस बजट को लोग चुनावी व लुभावने अंदाज में देखते हुए काफी राहत की उम्मीद कर रहे थे। लोगों में खासा उत्साह था और हर कोई अपने हिसाब से राहत मिलने का इंतजार कर रहे थे।

वीरवार को बजट पेश होने उपरांत जब युवा, गृहणी, कारोबारी, किसान, मध्यमवर्गीय वर्ग के लोगों से भास्कर ने उनके विचार जानने का प्रयास किया तो अधिकतर को यह बजट रास नहीं आया। जो घोषणाएं शिक्षा, स्वास्थ्य व कृषि क्षेत्र में की गईं उसे भी लोग चुनावी नजर से देख रहे हैं।

Ãरोजगार की बात कही गई, शिक्षा के लिए भी कई बातें कहीं गईं लेकिन यह सब हवा हवाई है। इनकी जमीनी हकीकत कुछ नहीं है। 2014 में रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन पूरा नहीं हुआ। -साहिल शर्मा, लॉ स्टूडेंट

Ãआवास, शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए उनके लिए कई घोषणाएं की गई हैं। कारोबार जगत को मजबूत करने की दिशा में शायद सरकार भूल गई है या वह जानबूझकर हमें नजरअंदाज कर रही है। -अशोक महाजन, व्यापारी

Ãदेश में इस समय मंदी का माहौल है और मोदी सरकार ने नोटबंदी व जीएसटी से मार्केट नीचे ला दिया। बजट से काफी उम्मीदें थी लेकिन हम नाखुश हैं। रोजगार की दिशा में सरकार सोचना ही भूल गई। -कौशल सिंह, स्टूडेंट

Ãकिसान कर्ज में दबे हैं लेकिन उसका जिक्र तक नहीं किया। यह बजट पूरी तरह किसान विरोधी है। यदि किसान हित में कुछ करना है, तो ग्राउंड पर आकर काम करना होगा। - गुरदयाल सिंह, किसान

Ãबजट से उम्मीद थी कि महंगाई का बोझ कम होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हालांकि देश के भविष्य को देखें तो यह आगामी समय में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने वाला नजर आ रहा है। -चीना महाजन, गृहिणी

Ãबजट में फसल का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ाने की बात कही लेकिन यह हमारी लागत ही इतनी कम निकालते हैं कि समर्थन मूल्य हमारी लागत भी नहीं निकाल पाता। यह पूरी तरह चुनावी स्टंट हैं। - हरिंदर सिंह, किसान

Ãकिचन का बजट 15 दिन में खत्म हो रहा है। महंगाई रोकने के लिए इस बजट में कुछ नहीं किया गया। सरकार को लोगों का पेट भरने के लिए तो अवश्य ही महंगाई को लेकर कुछ राहत देनी चाहिए थी। -रेणुका, गृहिणी

Ãटैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद थी। लेकिन इस बजट में कुछ कदम नहीं उठाए गए। मध्यमवर्गीय को इस बजट से कुछ नहीं मिला है और वह खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। -डॉ. चरनजीव सिंह

Ãनोटबंदी-जीएसटी के बाद उम्मीद थी कि इस बजट में कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ राहत दी जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमें तो यह बजट रास नहीं आया। -अश्वनी शर्मा, दूध प्रोडक्ट कंपनी

Ãबुजुर्गों को आरडी-एफडी के ब्याज में छूट देकर ठीक काम किया है। बजट मध्यमवर्गीय के लिए कुछ लेकर नहीं आया। उम्मीद थी कि देश की तरक्की में बजट अपना योगदान अदा करे। -विनोद कुमार, नौकरीपेशा

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