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हदबंदी साफ नहीं, माइनिंग माफिया पठानकोट की खड्‌डों में कहर बरपाकर भाग आता है गुरदासपुर

रेत के अवैध खनन से खतरे में पड़ा धुस्सी बांध, सरकार को गुमराह कर रहे हैं माइनिंग अफसर जिला स्तर की मोबाइल टीम के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:30 AM IST

हदबंदी साफ नहीं, माइनिंग माफिया पठानकोट की खड्‌डों में कहर बरपाकर भाग आता है गुरदासपुर
रेत के अवैध खनन से खतरे में पड़ा धुस्सी बांध, सरकार को गुमराह कर रहे हैं माइनिंग अफसर

जिला स्तर की मोबाइल टीम के गठन की सिफारिश

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर

राज्य में माइनिंग माफिया किस तरह बेखौफ होकर सारी हदें पार कर चुका है और जिन माइनिंग अधिकारियों पर अवैध माइनिंग रोकने के लिए तैनात किया गया है, वे ही माफिया के वश में होकर कैसे सरकार की आंख में धूल झोंककर असली हालात की गलत रिपोर्ट दे रहे हैं, इसका उदाहरण गुरदासपुर के एडीसी जनरल की 6 मार्च को पठानकोट की दो खड्डों पर कार्रवाई में सामने आया है।

गुरदासपुर के एडीसी जनरल विजय स्याल ने 6 मार्च देर रात पठानकोट के गांव मराड़ा और गांव अदालतगढ़ की खड्डों में माइनिंग का जायजा लेकर वहां अवैध माइनिंग करते हुए एक पोकलेन मशीन और 6 टिप्पर जब्त किए थे और मौके पर ही मराड़ा खड्ड में माइनिंग बैन कर दी थी। छापे के बाद एडीसी ने डीसी पठानकोट को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें जानकारी दी है कि अदालतगढ़ खड्ड में भी 10 फीट से ज्यादा गहरी माइनिंग हो चुकी है, जिससे धुस्सी बांध को खतरा है। पोकलेन मशीनों से सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक गैरकानूनी माइनिंग की जा रही थी।

अदालतगढ़ खड्ड में न तो भार तोलने वाला कोई कंडा है और न ही कम्प्यूटराइज्ड बिल काटने की व्यवस्था है। खड्डों की बाउंड्री नहीं है और पूर्व से पश्चिम तक पिलरों के दोनों ओर माइनिंग हो रही है। छापे के दौरान पकड़े गए ड्राइवर से जो बिल कब्जे में लिया गया था, वह जीएम माइनिंग से स्वीकृत नहीं था। खड्ड के अलावा आसपास भी माइनिंग की जाती है। ठेकेदार निश्चित की गई रेट लिस्ट के नोटिस बोर्ड नहीं लगाते। जमीन के मालिक को रॉयल्टी नहीं दी जा रही।

पठानकोट की अदालतगढ़ व मराड़ा खड्‌डों पर 6 मार्च को गुरदासपुर के एडीसी जनरल के छापे की रिपोर्ट का सच

निर्धारित समय के बाद भी देर तक करते हैं माइनिंग, रात 9 बजे रेत से भरे टिप्पर पकड़े

एडीसी ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें लिखा गया है कि रात साढ़े 9 बजे रेत से भरे टिप्पर मिलने से यह बात साफ हो जाती है कि खड्डों में माइनिंग निर्धारित समय के बाद भी की जा रही है। इसके अलावा माइनिंग में इस्तेमाल पोकलेन, जेसीबी और टिप्परों की रजिस्ट्रेशन नहीं होती, ये सभी बिना कागजों के इस्तेमाल की जाती हैं।

खड्‌ड पर कार्रवाई के समय दोनों सरहदी जिलों के नोडल अफसर एडीएम के साथ तैनात हों

एडीसी ने लिखा है कि माइनिंग विभाग के अधिकारी झूठी जानकारी देकर प्रशासन को गुमराह करते हैं। रिपोर्ट की कॉपी माइनिंग के मुख्य सचिव को भेजकर सिफारिश की गई है कि जिला स्तर पर विभाग प्रमुखों, जिनमें ब्लॉक और सब डिवीजन स्तर के अधिकारी शामिल हों, पर आधारित मोबाइल टीम बनाई जानी चाहिए। चेकिंग के दौरान माल विभाग, पुलिस, ट्रांसपोर्ट, एक्साइज और माइनिंग विभाग का 1-1 मैंबर होना चाहिए। दोनों जिलों के नोडल अफसर एडीएम को दिए जाएं, ताकि कानूनी कार्रवाई के समय माइनिंग करने वाले दूसरे जिले में न भाग सकें।

सरहद की खड्ड में अवैध माइनिंग करने वाले कार्रवाई पर पड़ोसी जिले में भाग जाते हैं

रिपोर्ट में बताया गया है कि जो खड्डें दो जिलों की सरहद पर हैं, वहां अवैध माइनिंग करने वाले कानूनी कार्रवाई के समय पड़ोसी जिले में भाग जाते हैं। मिसाल के तौर पर अदालतगढ़ और मराड़ा में गैरकानूनी माइनिंग होती है। जब पठानकोट के अधिकारी छापा मारते हैं, तो माइनिंग करने वाले गुरदासपुर में भाग जाते हैं और जब गुरदासपुर से कार्रवाई होती है तो पठानकोट में शेल्टर ले लेते हैं।

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