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होली पर 499 साल बाद मकर रािश में शनि और गुरु धनु राशि में रहेंगे
वैसे तो हर त्याेहार का अपना एक रंग होता है, जिसे आनंद या उल्लास कहते हैं लेकिन होली के त्याेहार पर रंगों के माध्यम से संस्कृति के रंग में रंगकर सारी भिन्नताएं मिटा दी जाती हैं। धार्मिक रूप से भी होली बहुत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इस दिन स्वयं को ही भगवान मान बैठे हरिण्यकश्यप ने भगवान की भक्ति में लीन अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका के जरिए जिंदा जला देना चाहा था, लेकिन भगवान ने भक्त पर अपनी कृपा की और प्रह्लाद के लिए बनाई चिता में खुद होलिका जल मरी। इसलिए इस दिन होलिका दहन की परंपरा भी है। होलिका दहन से अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है, इसलिए इसे रंगवाली होली और दुलहंडी कहा जाता है। घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति आदि के लिए महिलाएं इस दिन होली की पूजा करती हैं।
}1521 के बाद यह होली सभी राशियों के लिए रहेगी शुभ
आचार्य इंद्रदास ने बताया कि साल 1521 के बाद इस बार होली पर 9 मार्च को मकर राशि में शनि ग्रह और गुरु अपनी धनु राशि में रहेंगे। इसके चलते होली पर शुभ संयोग रहेगा। इससे पहले करीब 499 साल पहले होली के दिन दोनों ग्रहों के अपनी-अपनी राशियों में होने के कारण ऐसा संयोग बना था। होलिका दहन के समय इस वर्ष भद्राकाल की बाधा नहीं रहेगी। फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर करीब डेढ़ बजे ही खत्म हो जाएगा। होली पर 9 मार्च को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने के चलते ध्वज योग रहेगा, जो सभी राशियों के जातकों को यश-कीर्ति व विजय प्रदान करने वाला होगा। उन्होंने बताया कि होली पर शुक्र मेष राशि, मंगल और केतु धनु, राहु मिथुन, सूर्य और बुध कुंभ और चंद्र सिंह राशि में रहेगा। ग्रहों के इन योगों में होली आने से यह शुभ फल देने वाली रहेगी।
यह रहेगा शुभमुहूर्त :
आचार्य इंद्रदास ने बताया कि होलिका दहन की कुल अवधि शाम 6.22 से रात 11.18 बजे तक रहेगी। वहीं, इसके लिए शुभ मुहूर्त शाम 6.22 बजे से रात 8.52 बजे तक होगा। इसके अलावा प्रदोष काल विशेष मंगल मुहूर्त शाम 6.22 से शाम 7.10 बजे तक रहेगा।