चिन्मय मिशन ने करवाया चतुर्दिवसीय कार्यक्रम

Gurdaspur News - ब्रह्मचारी तारक चैतन्य ने अध्यात्म यात्रा के संबंध में दी जानकारी भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर चिन्मय मिशन...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:57 AM IST
Gurdaspur News - chinmaya mission got the quadrennial program done
ब्रह्मचारी तारक चैतन्य ने अध्यात्म यात्रा के संबंध में दी जानकारी

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर

चिन्मय मिशन गुरदासपुर के तत्वावधान में गीता-ज्ञान-यज्ञ के चतुर्दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रांगण में किया गया, जिसमें ब्रह्मचारी तारक चैतन्य (आचार्य अमृतसर मिशन) ने पहले दिन अध्यात्म यात्रा के संबंध में बताया कि जब शरीर और मन एक साथ हों, वहीं से अध्यात्म यात्रा का आरंभ है। संसार की समस्त समस्याओं का समाधान ईश्वर रचित शास्त्रों में उपलब्ध है और गीता साक्षात भगवान के मुखारविंद से निरसृत हुई है। भगवान ने पार्थ से स्पष्ट कहा है कि गीता में सुखद जीवन जीना गीता सिखलाती है। संसार में प्राय मानव की प्रवृत्ति के अनुसार असंतुष्ट रहकर सुखद जीवन नहीं जीता। सुखद जीवन उसका होता है जिसे लोग प्यार करें। जिसमें विश्वास करें। गीता के प्रथम श्लोक कुरुक्षेत्र शब्द को मनुष्य का ह्रदय बताकर उसमें आसुरी वृतियों (कौरव) तथा देवी वृत्तियों (पांडव) के संघर्ष को बताकर श्री आचार्य ने स्पष्ट किया कि विजय उसी पक्ष की होती है जिस पक्ष में भगवान स्वयं विद्यमान हों। आचार्य प्रवर ने यह भी स्पष्ट किया कि मानव का केवल कर्म में अधिकार है। फल तो ईश्वर अधीन है। फल इच्छा से किया गया कर्म बंधन का कारण होता है। जबकि ईश्वरीय भावना से किया गया कर्म (कर्म योग) कहलाता है और सुखद जीवन का आधार है।

प्रवचन श्रृंखला के दूसरे दिन श्री तारक चैतन्य ने गीता के प्रमुख चार विषयों जीव, जगत, ईश्वर और ब्रह्म की क्रमश: क्रिकेट के चार घटकों बैटसमैन, बॉलर, अंपायर तथा ग्राउंड के साथ समता बताते हुए ब्रहम की समता भगवान के साथ बताई, क्योंकि वह निर्विकार है। उन्होंने मनुष्य और पशु में ज्ञान पर अंतर बताया। प्रवचन श्रृंखला के तीसरे दिन आचार्य चैतन्य ने व्यक्ति की पहचान उसकी प्रकृति (स्वभाव) से होती है। संसार में चार प्रकार की प्रकृति के प्राणी है राक्षसी, आसुरी, दैवी और मोहिनी। जहां उन्हों ने स्पष्ट किया कि मान्यता के अनुसार संस्कार बनते है। संस्कार अनुसार स्वभाव तथा स्वभाव अनुसार कर्म होता है। स्वामी जी की सरस, सरल, विश्लेषणात्मक वाणी से गीता ज्ञान को समझ कर श्रोतावर्ग आनन्दित और लाभान्वित हो रहे है।

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