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वैज्ञानिकों ने आविष्कारों को नहीं दिया लिखित रूप: डॉ. ऋषिराज

एक वर्ष पहले
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शांति देवी आर्य महिला कालेज दीनानगर में ‘बौद्धिक संपत्ति के अधिकार’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। कॉमर्स यूजीसी की सीपीई योजना के तहत इस सेमिनार को कॉमर्स विभागाध्यक्ष नीनू शर्मा की देखरेख में करवाया गया। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के गुरदासपुर रीजनल सेंटर के बिजनेस मैनेजमेंट एंड कामर्स के एसोसिएट डीन डॉ. ऋषिराज शर्मा सेमिनार के मुख्यातिथि थे। जबकि कानून विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. परमिंदर कौर ने कुंजीगत भाषण दिया। दिल्ली की प्रोफेसर डॉ. रजनी ढींगरा सेमिनार की मुख्यवक्ता थी। सेमिनार के टेक्निकल सेशन की अध्यक्ष सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश के डॉ. संजीव गुप्ता ने की। मुख्य मेहमान डॉ. ऋषि राज ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में अविष्कार किए। लेकिन उन्हें लिखित रूप नहीं दिया। जिन आविष्कारों को लिखित रूप दिया भी गया उन्हें मुगलों ने तहस नहस कर दिया। उन्होंने भूगौलिक संकेतों को पेटेंट करवाने की वकालत की। डॉ. परमिंदर कौर ने अपने कुंजीगत भाषण में बौद्धिक संपत्ति अधिकार के कानूनी पहलुओं के बारे में विस्तृत चर्चा की। प्रो. रजनी ने कहा कि इस संबंधी ट्रेड मार्क, स्लोगन और गतिशील वस्तुओं को भी पेटेंट करवाना चाहिए। डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि स्माल स्केल इंडस्ट्री का अपना बौद्धिक संपत्ति अधिकार होना चाहिए। प्रिंसिपल रतना शर्मा ने कहा कि बौद्धिक संपत्ति अधिकार के कानूनी पहलुओं के बारे में जानकारी होना बेहद लाजमी है। इस मौके पर स्टाफ और छात्राएं मौजूद थीं।

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