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डी-फार्मेसी भूपिंदर को शौक ने बनाया किसान शहद को दे डाला नया रूप, 6 फ्लेवर तैयार किए

प्रदेश का किसान कृषि टेक्नोलॉजी आैर एडवांस कृषि विज्ञान के युग में भी परंपरागत खेती मे जूझ रहा है। वहीं कई किसान...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 06, 2018, 02:05 AM IST

डी-फार्मेसी भूपिंदर को शौक ने बनाया किसान शहद को दे डाला नया रूप, 6 फ्लेवर तैयार किए
प्रदेश का किसान कृषि टेक्नोलॉजी आैर एडवांस कृषि विज्ञान के युग में भी परंपरागत खेती मे जूझ रहा है। वहीं कई किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने वक्त रहते परंपरागत कृषि के नुकसान को भांप लिया है आैर इससे बाहर आकर नाम कमा रहे हैं। इन्हीं में से एक है किसान भूपिंदर सिंह। 1986 में डी-फार्मेसी करने के बाद अपने दोस्त के फार्म हाउस पर मधुमक्खी का काम देख प्रभावित हुए और शौक के लिए मधुमक्खी के पांच बॉक्स से काम शुरू किया। 6 साल पांच बॉक्स के साथ काम करने के बाद इन्होंने इस धंधे को आजमा लिया। अब वह पांच प्रदेशों में अपनी कालोनियां बना चुके हैं यानी मधुमक्खी पालन के लिए बॉक्स स्थापित कर चुके हैं आैर 6 फ्लेवर का शहर बना रहे हैं।

इन प्रदेशों से इक्ट‌्ठा कर रहे शहद

भूपिंदर सिंह के पास इस समय शहद की 1200 से ज्यादा कालोनियां (बॉक्स) हंै। यह बॉक्स शहद में वैरायटी लाने के लिए पंजाब, हरियाना, हिमाचल प्रदेश, यूपी, जम्मू में भेजते हंै। इस तरह से वह पांच तरह का शहद तैयार कर रहे हंै।जो 25 तरह की बीमारियों में दवा के रूप में काम करता है।

शहद जमने की धारणा को किया दूर

डॉक्टरों आैर गूगल से ट्रेनिंग लेकर बनायाफ्लेवर्ड शहद

अाम धारना है की शहद जम जाता है आैर इसमें चीनी और तरल अलग नजरा अाता है। भूपिंदर सिंह का मानना है कि जिस शहद में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा होगी है वह जम जाएगा। इसे धूप और गरम पानी में रख पिघलाया जा सकता है। इसमें गर्मी में ग्लूकोज 32 प्रतिशत और सर्दी में 45 प्रतिशत होता है। अगर मौसम 14 डिग्री टेंपरेचर से कम हो तो भी शहद जमने लगता है। यूरोपिन देशों में जमे हुए शहद को ज्यादा पंसद किया जाता है।

6 तरह के शहद को दवा का रूप देने के लिए इन्होंने डॉक्टरों आैर गूगल का सहारा लिया। इनके पास सफेद शहद भी है जो काश्मीर से लाते है। यह पढ़ाई कर रहे बच्चों अौर बुजुर्गों के लिए रामबाण है। दावा है कि यह मेंटली स्ट्रेस कम करने में मदद करता है। हिमालयन शहद आर्गेनिग प्रोडक्ट के रूप मे उतारा है। यह जंगली एरिया में रखी पेटियाें से आता है। इसके लिए मधुमक्खियां नेचुरल फूलों का रस चूसती हैं। इसके बाद लीची का शहद है जो देहरादून के लीची गार्डन में तैयार किया जाता है। इसका प्रयोग अाम दिनों में बुजुर्ग और बच्चे जैम की जगह कर सकते हैं। इसके अलावा बसंत शहद,जामुन शहद शुगर के मरीजों के तैयार किया गया है। अाजवायन और तुलसी का शहद खास सर्दी के मौसम के लिए तैयार किया गया है। इस के अलावा इन्होंने बीपोल्न अलग से तैयार किया है। मधुमक्खी फूल के सेंटर पार्ट से जो रस लेती है,उसे ट्रेप लगा इक्कठा किया जाता है। दावा है कि यह केंसर रोधी, स्ट्रेस कम करने, दीमागी कमजोरी दूर करने, नर्वस सिस्टम और दीमागी बीमारियां ठीक करने में कारगर है।

25 तरह की बीमािरयों में फायदेमंद है ये शहद

भूपिंदर सिंह के अनुसार उनकी तरफ से तैयार करवाया जा रहा शहद 25 तरह की बीमारियों में काम करता है। इसमे विटामन बी-1 से लेकर बी-5 और सीईके, तेजाब, अंजाइम, प्रोटीन पाया जाता है। यह जिगर, पित्त, नर्वस सिस्टम, दिल के रोग, हाई ब्ल्ड प्रेशर, अांखों के लिए, काली खांसी, दांत का दर्द, जुकाम, नींद, कमजोरी, थकावट आैर मोटापा कम करने के लिए काम अाता है। इसके अलावा शहद के नियमित सेवन के कई फायदे हैं।

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