1500 मीटर दौड़ में 78 वर्षीय बख्शीश ने जीता गोल्ड, रिलैक्स होते ही हार्टअटैक, मैदान में मौत

Hoshiarpur News - 78 साल के एथलीट की 1500 मीटर दौड़ जीतने के बाद मौत हो गई। पंजाब मास्टर एथलेटिक एसोसिएशन द्वारा बुजुर्गों के लिए करवाई गई...

Nov 21, 2019, 07:56 AM IST
Hoshiarpur News - 78 year old bakshish won gold in 1500 m race heart attack as soon as relax death in the field
78 साल के एथलीट की 1500 मीटर दौड़ जीतने के बाद मौत हो गई। पंजाब मास्टर एथलेटिक एसोसिएशन द्वारा बुजुर्गों के लिए करवाई गई एथलेटिक मीट के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। होशियारपुर के जलोवाल के रहने वाले बुजुर्ग एथलीट बख्शीश सिंह ने 1500 मीटर में पहला व 800 मीटर में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। 1500 मीटर की रेस पूरी करने के बाद रिलैक्स होते हुए उन्हें अटैक आ गया। साथियों द्वारा तुरंत सिविल अस्पताल संगरूर ले जाया गया। जहां पर मृत घोषित कर दिया गया। पिछले शनिवार को एथलीट मीट करवाई गई थी। रिश्तेदार महिंदर सिंह विर्क ने बताया कि 1500 मीटर दौड़ में बख्शीशने गोल्ड मेडल जीता था। दौड़ पूरी होने के बाद वह बहुत खुश थे। उन्होंने बख्शीश सिंह को बधाई भी दी और रिलैक्स होने को कहा। रिलैक्स होने के लिए जब वह अपने कपड़े पहनने गए तो वह पहन नहीं सके और वहीं पर गिर पड़े। उन्होंने बताया कि दौड़ना इतना पसंद था कि दोस्तों से कहते थे कि जब भी मौत आए तो मैदान में ही खिलाड़ी की तरह मरूं।

अबतक जीत चुके 200 से ज्यादा मेडल

आखिरी दौड़

पुनीत गर्ग | संगरूर

78 साल के एथलीट की 1500 मीटर दौड़ जीतने के बाद मौत हो गई। पंजाब मास्टर एथलेटिक एसोसिएशन द्वारा बुजुर्गों के लिए करवाई गई एथलेटिक मीट के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। होशियारपुर के जलोवाल के रहने वाले बुजुर्ग एथलीट बख्शीश सिंह ने 1500 मीटर में पहला व 800 मीटर में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। 1500 मीटर की रेस पूरी करने के बाद रिलैक्स होते हुए उन्हें अटैक आ गया। साथियों द्वारा तुरंत सिविल अस्पताल संगरूर ले जाया गया। जहां पर मृत घोषित कर दिया गया। पिछले शनिवार को एथलीट मीट करवाई गई थी। रिश्तेदार महिंदर सिंह विर्क ने बताया कि 1500 मीटर दौड़ में बख्शीशने गोल्ड मेडल जीता था। दौड़ पूरी होने के बाद वह बहुत खुश थे। उन्होंने बख्शीश सिंह को बधाई भी दी और रिलैक्स होने को कहा। रिलैक्स होने के लिए जब वह अपने कपड़े पहनने गए तो वह पहन नहीं सके और वहीं पर गिर पड़े। उन्होंने बताया कि दौड़ना इतना पसंद था कि दोस्तों से कहते थे कि जब भी मौत आए तो मैदान में ही खिलाड़ी की तरह मरूं।

दोस्त एसपी शर्मा ने बताया कि बख्शीश होशियारपुर टीम की अगुवाई करते थे। फौज से रिटायर होने के बाद वह टीचर भी रहे। दौड़ने के शौकीन थे। 1982 में उन्होंने खेलों में भाग लेना शुरू किया। कई स्टेट में खेले। वह 200 से भी ज्यादा मेडल पा चुके थे। बख्शीश 800 मीटर, 1500 मीटर और 5 हजार मीटर दौड़ में भाग लेते थे। हमेशा कहते थे कि अस्पतालों में इंजेक्शन लगवाकर मरने से अच्छा है कि मेहनत करते हुए मैदान में मौत हो तो खुशनसीबी होगी।

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