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13 साल बाद 5वीं की बोर्ड परीक्षा, जिले में 16225 बच्चों ने दिया हिंदी का पेपर

एक वर्ष पहले
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कोरोना...स्कूलों में स्टाफ को ही आने के निर्देश

शनिवार को 5वीं की बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हुईं। पहले दिन जिले में 148 सेंटरों में 16225 बच्चों फर्स्ट लेंग्वेज िहंदी की परीक्षा दी। वहीं, 8वीं का सामाजिक शिक्षा का पेपर था। 13 साल बाद हो रही 5वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर कई बच्चे तनाव में दिखे। अध्यापक उन्हें दिलासा देते रहे कि बोर्ड परीक्षाएं स्कूल परीक्षाओं जैसी होती हैं। अध्यापकों को बच्चों के रोल नंबर लिखवाने में भी काफी मेहनत करनी पड़ी। पर परीक्षा के बाद बाहर आए बच्चे सहज दिखाई दिए और बोले-पेपर आसान था। परीक्षा केंद्र में आए बच्चों के अभिभावक कोरोना वायरस को लेकर परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि एक तरफ कोरोना वायरस से बचाव के लिए स्कूलों में 31 मार्च तक छुट्टियां कर दी गई हैं वहीं छोटे बच्चों को पेपर देने के िलए बुलाया जा रहा है। परीक्षा दो तीन सप्ताह देरी से भी हो सकती थीँ। परीक्षा में एक भी बच्चा संक्रमित पाया जाता तो बाकी बच्चों के भी प्रभावित होने की आशंका होगी और बीमारी लोगों के घरों और गांवों मंे प्रवेश हो सकती है। पांचवीं की पढ़ाई कोई बहुत बड़ी कक्षा की पढ़ाई नहीं, जिसे स्थगित नहीं किया जा सकता है।

जिले में 198 बच्चे रहे गैरहाजिर : डीईओ संजीव

डीईओ एलिमेंटरी संजीव गौतम ने बताया कि वर्षों बाद हो रही 5वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए शिक्षा विभाग ने पुख्ता कदम उठाए हैं। जिले में 1229 सरकारी और 394 प्राइवेट स्कूलों के 5वीं के बच्चों ने परीक्षा दी। जिले में बनाए 148 सेंटरों में 16424 बच्चों ने परीक्षा देनी थी पर 198 बच्चे गैरहाजिर पाए गए। इसके चलते 16225 बच्चे परीक्षा देने पहुंचे। जिले में 422 एेसे सरकारी स्कूल हैं, जिनमें 5 बच्चों से कम की संख्या थी तो उनके स्कूल में ही सेंटर बना दिए गए। अन्य स्कूल के अध्यापक ड्यूटी लगा दी गई।

पीडी आर्य स्कूल की छात्रा चाहत, हरजोत, अमृता, कुमारी शिवानी, एसएवी जैन डे बोर्डिंग स्कूल की मुदित्ता चौबे, प्राची, कृपाक्षी कौशल ने बताया कि पेपर देने आए तो पहले डर लग रहा था, लेकिन टीचर्स ने बताया कि डरने की बात नहीं। आप जैसे स्कूल के पेपर देते हो वैसे ही पेपर हैं। पेपर मिला तो अच्छी तरह पढ़ा और फिर सॉल्व किया। पेपर बड़ा सौखा सी।

परीक्षाओं के चलते शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि परीक्षा वाले दिन ही विद्यार्थियों को स्कूल आने की आज्ञा दी जाए। बाकी बच्चों को स्कूल न आने दिया जाए। पर टीचिंग/नॉन टीचिंग स्टाफ और अन्य कर्मी पहले की तरफ नियमित तौर पर स्कूल आएंगे।

हिंदी का पेपर देकर परीक्षा सेंटर से बाहर आते पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी। भास्कर
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