डेरो और रावलपिंडी ड्रग फ्री मॉडल गांव बनने हैं पर यहां तो शिक्षा व्यवस्था है ही नहीं

Hoshiarpur News - शिक्षकों की मेहनत देखिए... गुरप्रीत बैंस | होशियारपुर चंद रोज पहले जिला प्रशासन ने गढ़शंकर के जिन 8 गांवों को...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:55 AM IST
Garhshankar News - dero and rawalpindi are to become drug free model villages but there is no education system here
शिक्षकों की मेहनत देखिए...

गुरप्रीत बैंस | होशियारपुर

चंद रोज पहले जिला प्रशासन ने गढ़शंकर के जिन 8 गांवों को ड्रग फ्री घोषित कर रोल माॉडल बनाए जाने की घोषणा की थी उनमें से गांव डेरो और रावलपिंडी की जमीनी हकीकत रोल मॉडल वाले बिल्कुल भी नहीं है। बात अगर इन गांवों की शिक्षा व्यवस्था की की करें तो डेरो के सरकारी प्राइमरी स्कूल में 2017 में ही ताला लग चुका है। स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला न होने के कारण शिक्षा विभाग को स्कूल बंद करना पड़ा। इस समय स्कूल में प्रवासी मजदूरों का परिवार स्कूल में ही डेरा जमा चुके हैं। सुबह यह प्रवासी मजदूर स्कूल में तैयार होकर काम के लिए निकल जाते हैं और फिर शाम को फिर लौट आते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी गांव रावलपिंडी के सरकारी प्राइमरी स्कूल की भी है। यहां के स्कूल में कुल 10 छात्र पढ़ तो जरूर रहे हैं लेकिन गांव का केवल एक ही छात्र यहां पर दाखिल है बाकी बचे 9 छात्र प्रवासी मजदूरों के बच्चे हैं। अगर हालात यही रहे तो यहां भी ताला लग जाएगा। डेरो के डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी (प्राइमरी) धीरज वशिष्ट ने बताया कि 2017 में डेरो के प्राइमरी स्कूल में सिर्फ 2 ही छात्र बचे थे इसलिए विभाग को मजबूरन स्कूल बंद करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि सरकारी प्राइमरी स्कूल में कम से कम 10 छात्र होना अनिवार्य होता है। जहां बच्चों की गिनती बेहद कम हो जाती है वहां पर विभाग और पंचायत की आपसी रजामंदी के बाद स्कूल को बंद कर दिया जाता है।

गांव डेरो के सरकारी प्राइमरी स्कूल के क्लास रूम और ऑफिस (दाएं) में आराम करता प्रवासी मजदूरों का परिवार।

गांव डेरो के प्राइमरी स्कूल में बच्चों की संख्या इतनी घटी कि बंद हो गया, रावलपिंडी भी इसी राह पर...

डेरो के प्राइमरी स्कूल में लोगों का डेरा...

स्कूल के ऑफिस में बेडरूम, प्रांगण में ट्रैक्टर

डेरो के सरकारी प्राइमरी स्कूल के प्रांगण में झोपड़ी भी है। क्योंकि क्लास रूम और ऑफिस मंे जब मजदूरों की संख्या बढ़ जाती है तो कुछ मजदूर झोपड़ी में रात गुजारते हैं। प्रांगण में ही एक ट्रैक्टर और ट्राली भी खड़ी रहती है जो गांव को आने वाली लिंक सड़क बना रहे ठेकेदार की है।

यह है डेरो स्कूल का दफ्तर जहां लिखा है शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है....

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