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सिविल में लग रहा मोबाइल टावर, प्रबंधकों को जानकारी नहीं

भास्कर संवाददाता | होशियारपुर सिविल अस्पताल परिसर में पड़ती कैंटीन के पीछे एक टेलीकॉम कंपनी द्वारा मोबाइल टावर...

Danik Bhaskar | May 03, 2018, 02:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | होशियारपुर

सिविल अस्पताल परिसर में पड़ती कैंटीन के पीछे एक टेलीकॉम कंपनी द्वारा मोबाइल टावर लगाया जा रहा है। इसकी तैयारी लगभग मुकम्मल हो चुकी है। वहीं टावर की रेडिएशन को लेकर लोगों में डर है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में इस तरह का टावर लगाना गलत है। हैरत की बात कि सिविल अस्पताल में जो करीब 60 फुट ऊंचा टावर लगाया जा रहा है और इस मामले की जानकारी ना तो एसएमओ को है और न ही सिविल सर्जन को है। एसएमओ ओपी गोजरा ने कहा कि इसके बारे में एसएमओ विनोद सरीन बता सकते है लेकिन वह कुछ दिन तक छुट्टियों पर है।

अस्पताल से हुआ है कांट्रेक्ट : इंजीनियर

टावर लगा रही कंपनी के इंजीनियर रोहित कुमार ने कहा कि टावर लगाने के लिए सरकारी अस्पताल के साथ कांट्रेक्ट हुआ है। इसके एवज में विभाग के खाते में पैसे जमा करवाए गए हैं और हर तरह की एनओसी लेने के बाद ही काम हो रहा है। रेडिएशन के बारे में उन्होंने कहा कि रेडिएशन तो सभी के फोन से भी निकलती है तो क्या फोन बंद कर दें। उनकी कंपनी ने तो एक टावर डीसी की सरकारी कोठी में भी लगाया है।

सिविल सर्जन ने माना- टावर की रेडिएशन पैदा करती है बीमारियां

सिविल सर्जन रेनू सूद से टावर के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि टावर लगाने की मंजूरी के लिए उनके पास एक चिट्ठी आई थी जिसको एसएमओ विनोद सरीन को फॉरवर्ड कर दिया गया था। इस मामले को वही देख रहे हैं और वह छुट्टी पर हैं। सिविल सर्जन ने कहा कि टावर से निकलने वाली रेडिएशन कई तरह की बीमारियों को जन्म देती हैं और सबसे खतरनाक बीमारी कैंसर है। टावर को अस्पताल परिसर में लगाने के जबाव से सिविल सर्जन पल्ला झाड़ती रही और सारा मामला एसएमओ विनोद सरीन के ऊपर डाल दिया।

रेडिएशन नहीं निकलती : डीसी

डीसी की सरकारी कोठी ने लगे टावर के बारे में डीसी विपुल उज्ज्वल ने कहा कि टेलीकॉम कंपनी प्रशासन को रेंट पेय करती है। उनके घर पर कोई भी नेटवर्क नहीं आता था लेकिन अब इसके लगने से यह समस्या खत्म हो गई है। रही बात रेडिएशन की तो इससे कोई रेडिएशन नहीं निकलती।

सरकार से मिलकर लगा रहे टावर : कंपनी प्रवक्ता

इस बारे में टेलीकॉम कंपनी के प्रवक्ता तरुण ने बताया कि उनकी कंपनी पूरे देश में सरकार के साथ मिलकर टावर लगा रही है। पीजीआई तक रिसर्च हो चुकी है कि मोबाइल टावर की रेडिएशन का कोई नुकसान नहीं।