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गुरु गद्दी को नियुक्ति बताना, सूफी मत लखदाता से शुरू होना और ऊधम सिंह ने ली हीर रांझे की शपथ बने विवाद

परमिंदर बरियाणा | होशियारपुर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से बाहरवीं कक्षा की इतिहास की किताब इन दिनों चर्चा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:30 AM IST

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    परमिंदर बरियाणा | होशियारपुर

    पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से बाहरवीं कक्षा की इतिहास की किताब इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। अकाली दल जहां इस किताब को आधार बनाकर पंजाब सरकार पर सिख इतिहास से युवा पीढ़ी को दूर करने का आरोप लगा रहा है। वहीं एसजीपीसी की ओर से इस किताब की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने भी इस किताब को सिरे से नकार दिया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल को सौंप दी है। एसजीपीसी ने पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड को प्रपोजल दी है कि वह बोर्ड की नई किताब तैयार करने में सहायता कर सकती है।

    एसजीपीसी की सब कमेटी ने जताई आपत्ति

    एसजीपीसी की सब कमेटी के कनवीनर डा. जतिंदर सिंह सिद्धू ने कहा है कि सिख गुरुओं को गुरु गद्दी सौंपने की बाकायदा रस्म होती थी। दूसरे गुरु अंगद देव जी से लेकर 6वें गुरु हरगोबिंद साहिब जी सहित पांच गुरुओं को तो बाबा बुढ़ा जी ने गुरु तिलक लगाया था। जबकि किताब में लिखा है कि गुरु नानक देव जी ने गुरु अंगद देव जी की नियुक्ति की थी। यही नहीं शहीद की परंपरा गुरु अर्जुन देव जी की शहादत से न बताकर किताब में शहादत की परम्परा को खत्म कर यह लिख दिया गया है कि मीर मनू ने सिखों को फाहे लगाया था।

    हिस्ट्री की नई किताब के बारे में वो सबकुछ...जोआपको जानना जरूरी है

    सूफी मत की शुरुआत बाबा फरीद से नहीं बल्कि सखी सरवर से कहना

    1.

    पूरी दुनिया को इस बात की जानकारी है कि सूफी मत की शुरूआत बाबा फरीद जी से शुरू हुई थी लेकिन किताब में बाबा फरीद जी को इतिहास से गायब ही कर दिया गया है। नई किताब में सूफी मत की शुरूआत सयैद अहमद सुल्तान से बताई गई है जिसे सखी सरवर लख दाता के तौर पर भी जाना जाता है और सखी सरवर को हिन्दुओं और मुसलमानों के साथ जोड़ दिया गया है। किताब में इस बात का भी जिक्र है कि रेशमा ने लाल मेरी पत रखियो .. सखी सरवर का गीत गाया है।

    मंगल पांडे के बारे में जानना है तो आमिर खान की फिल्म देखें

    3.

    किताब में साफ तौर पर लिखा है कि अगर स्टूडेंट ने मंगल पांडे के बारे में जानना है तो वह आमिर खान और रानी मुखर्जी द्वारा बनाई गई फिल्म देखें। इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्य लेकर उस पर लिखें और इसके लिए वह अध्यापक से भी सहायता ले सकते हैं।

    ऊधम सिंह ने गुटका साहिब की नहीं बल्कि हीर रांझे की शपथ ली थी

    2.

    नई किताब में पंजाब की आजादी की मूवमेंट में 92 फीसदी भागीदारी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यह बताने की कोशिश की गई है कि यह पंजाब का आजादी लहर के साथ कोई खास लेना-देना नहीं था। आजादी के नायक बाहरी राज्यों के ही बताए गए हैं। इसी दौरान एक हास्यास्पद तथ्य शहीद ऊधम सिंह के साथ जुड़ा हुआ पेश कर दिया है कि उन्होंने फांसी से पहले किसी धार्मिक ग्रंथ की शपथ न उठा कर वारिस की हीर रांझे की शपथ ग्रहण की थी। पहले जिक्र आता रहा कि ऊधम सिंह ने गुटका साहिब की शपथ ली थी।

    बड़ा आरोप ये भी

    किताब में भगवाकरण को दिया गया बढ़ावा, सबड़े बड़ी भक्ति लहर राम भक्ति बताई

    डा. सिद्धू ने कहा कि किताब का अध्ययन चल रहा है और अभी तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं उसके अनुसार किताब में भक्ति की सबसे बड़ी लहर राम भक्ति को दर्जा दिया है। यही नहीं कि इन्होंने राम भक्ति लहर को गुरु नानक देव जी की भक्ति लहर के साथ जोड़ कर इसका भगवाकरण करने की पूरी कोशिश की है। सिद्धू के अनुसार ऐसा कर सिख इतिहास को बिल्कुल ही समाप्त करने की कोशिश की गई है। इसे किसी भी तरह से सही नहीं माना जा सकता। सरकार को यह किताब सिलेबस से हटा लेनी चाहिए।

    12वीं के अध्याय 11वीं में जोड़े गए हैं, मैंने सिर्फ फैक्ट जांचे

    कैप्टन को मिसगाइड किया गया: प्रो. परमवीर

    राणा रणधीर |पटियाला

    सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाबी यूनिवर्सिटी रिलीजन डिपार्टमेंट के जिस प्रोफेसर परमवीर सिंह पर सिलेबस तैयार करने वाली कमेटी में शामिल होने का हवाला देकर सारा सिलेबस ठीक होने का दावा किया था, वो प्रोफेसर असल में सिलेबस कमेटी में शामिल ही नहीं थे। दैनिक भास्कर से खास बात करते हुए प्रो. परमवीर ने बताया कि सिलेबस तैयार करने वाली कमेटी में वे शामिल नहीं थे। सिलेबस डिफाइन होने के बाद उन्होंने तो सिर्फ फैक्ट्स चैक किए। मुझे लगता है कि सीएम को मेरी भूमिका को लेकर मिसगाइड किया जा रहा है।

    11वीं बंक करने वाला सिख इितहास से रह जाएगा अछूता

    प्रो. परमवीर के मुताबिक 12वीं की किताब में सिर्फ बंदा सिंह बहादुर से लेकर महाराजा रणजीत सिंह तक का पीरियड ही रखा गया है। इसके अलावा इंडियन हिस्ट्री सिलेबस में हैं। सिख गुरुअों के इतिहास को सिर्फ 11वीं में ही रखा गया है। 11वीं की बजाए सीधे 12वीं करने वाले बच्चे इससे वंचित रह जाएंगे। हालांकि एेसे बच्चों की संख्या बहुत कम है।

    बाबा बंदा बहादुर को लिखा गुरु गोबिंद सिंह का चेला

    प्रो. परमवीर के मुताबिक 11वीं की किताब में भी कई फैक्ट्स अधूरे हैं। जैसे जब गुरु गोबिंद सिंह जी ने बाबा बंदा बहादुर को चार साहिबजादों की शहादत का बदला लेने के लिए पंजाब भेजा तो उनके साथ 5 सिख थे। किताब में सिर्फ 3 का जिक्र किया गया है। इसी तरह बाबा बंदा बहादुर को गुरु जी का श्रद्धावान चेला बताया गया है जो गलत है जबकि उन्हें गुरु साहिब ने खालसा रूप देकर भेजा था।

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