सिटी की 12 मंडियों में पहुंचा 1.07 टन धान, खरीद हुई पर लिफ्टिंग नहीं

Jalandhar News - जिले की मंडियों में धान की आमद तेज हाे गई है। धान को संभालने और लिफ्टिंग के लिए प्रशासन की ओर से कोई खास प्रबंध नहीं...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:46 AM IST
Jalandhar News - 107 tonnes of paddy arrived in 12 mandis of the city but no lifting
जिले की मंडियों में धान की आमद तेज हाे गई है। धान को संभालने और लिफ्टिंग के लिए प्रशासन की ओर से कोई खास प्रबंध नहीं किए जा रहे। खरीद एजेंसियां धान की फसल की खरीद तो कर रही हैं लेकिन उसकी लिफ्टिंग नहीं हो पा रही। इसका सबसे बड़ा कारण शैलर मालिकों को लेवी सिक्योरिटी, अदर सिक्योरिटी और 50 से 60 लाख रुपए की बैंक गारंटी बैंक में जमा करवाने की बात कही जा रही है। इसे लेकर शैलर मालिक एजंेसियों से धान की फसल लिफ्ट नहीं करवा रहे।

इस साल 1.70 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल लगाई गई थी। एग्रीकल्चर अधिकारी नरेश गुलाटी ने बताया कि इतने रकबे में फसल लगाने के बाद 11 लाख टन के करीब धान की पैदावार होने की उम्मीद है।

जिला प्रशासन ने मंडियों में धान को संभालने और लिफ्टिंग करने के उचित प्रबंध नहीं किए

जिले की 12 मंडियों मे 1.07 लाख टन के करीब फसल आई और 1.04 टन के करीब खरीद हो चुकी है। आढ़तियों काे इस बात की चिंता सता रही है कि एजेंसियां खरीद तो कर रही हैं लेकिन आगे लिफ्टिंग नहीं हो पा रही। पिछले साल धान की फसल का सरकारी रेट 1750 रुपए था और इस बार 1835 रुपए निर्धारित किया गया है। जालंधर की मंडियों में 2.08 लाख क्विंटल की आमद हुई जिसमें से पन ग्रेन ने 66 क्विंटल, मार्कफेड ने 43 क्विंटल, पनसप ने 91 क्विंटल, वेयर हाउस ने 3 क्विंटल और प्राइवेट कंपनियों ने 3 क्विंटल के करीब धान की फसल की खरीद की है। जितनी धान मंडियों में आई है उसकी सारी की खरीद तो हो गई लेकिन लिफ्टिंग नहीं हुई।

मॉस्चराइजर ज्यादा चाहिए...दाना मंडी में आढ़तियों ने बताया कि धान की फसल को बेचने के लिए 17 मॉस्चराइजर होना चाहिए लेकिन मौसम में हुए बदलाव के कारण 19 से 20 के करीब मॉस्चराइजर आ रहा है। फसल सुखाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ रही है। अगर मॉस्चराइजर सही होगा तब ही सही खरीद का मूल्य मिलेगा।

लिफ्टिंग न होने के कारण मंडी में लगे धान के ढेर।

लिफ्टिंग न हुई तो आ सकती है समस्या...आढ़तियों ने कहा कि मंडियों में फसल को संभालने के लिए प्रबंध तो सही हैं लेकिन अगर इसी तरह से फसल की हर रोज आमद होती रही और लिफ्टिंग न हुई तो आने वाले दिनों में मुश्किल पैदा हो सकती है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वे शैलर मालिकों की मांगों की तरफ ध्यान दे।

सरकार की पॉलिसी से नाराज शेलर मालिक

लेवी सिक्योरिटी, अदर सिक्योरिटी के नाम पर पंजाब सरकार द्वारा शेलर मालिकों से 50 से 60 लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करवाने के लिए कहा गया है। शेलर मालिकाें ने कहा कि चाहे उन्होंने ये रकम बैंकों में रखनी है लेकिन इतनी बड़ी रकम को ब्लॉक कर उनका ही नुकसान है। शेलर मालिकों का कहना है कि कई खर्चे ऐसे हैं जिनका समय पर ही भुगतान करना होता है। अगर इतनी बड़ी रकम बैंकों में ही मजा करवाते हैं तो काम कैसे करेंगे।

गोदामों में फसल को स्टोर करने की जगह नहीं

शैलर मालिकों का कहना है कि पहले का स्टॉक गोदामों मे पड़ा है। अब नई फसल को स्टोर करने के लिए जगह नहीं है। सरकार द्वारा गोदामों में पहले 5 हजार मीट्रिक टन जमा होता था और बैंक गांरटी ली जाती थी, अब सरकार ने इसे 4 हजार मीट्रिक टन कर दिया है और इसके साथ 50 लाख रुपए बैंक में गारंटी के तौर पर जमा करवाने होंगे जो रिफंडेबल है।

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