रॉ के नए चीफ / आंतक के दौर में पंजाब कैडर से आईपीएस बने थे सामंत गोयल

आईपीएस सामंत गोयल। आईपीएस सामंत गोयल।
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आईपीएस सामंत गोयल।आईपीएस सामंत गोयल।

  • रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) में डेपुटेशन पर चल रहे पंजाब कैडर के आईपीएस
  • उन्हें पंजाब का डीजीपी बनाए जाने की चर्चाएं भी थीं

Jun 27, 2019, 10:59 AM IST

जालंधर. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आरएडब्ल्यू) के चीफ बने आईपीएस सामंत गोयल की भूमिका पंजाब से खालिस्तान समर्थित आतंकवाद खत्म कराने में प्रमुख रही। उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने में भी अपनी भूमिका निभाई थी। रॉ के चीफ बनने से पहले उन्हें पंजाब का डीजीपी बनाने की चर्चाएं भी जोर पकड़े हुए थीं।
 
सामंत गोयल ने 1984 में आईपीएस बने। उन्हें पंजाब कैडर मिला था।शुरुआत के तौर पर उनकी ट्रेनिंग के तौर पर झब्बाल के एसएचओ के तौर पर नियुक्ति हुई थी। वह गुरदासपुर, अमृतसर और बार्डर एरिया में बतौर एसएसपी तैनात रहे हैं। अब 2020 में वह रिटायर होने वाले हैं। पाकिस्‍तान संबंधी मामलों की उन्हें अच्‍छी-खासी समझ है। हाल ही में फरवरी में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमले की जवाबी र्कारवाई के रूप में बालाकोट एयरस्ट्राइक की प्लानिंग में भी वह शामिल थे। लंबे समय से केंद्र में डेपुटेशन पर चल रहे सामंत गोयल इस समय रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) में हैं। बुधवार को उन्हें रॉ का सर्वोच्च पद मिल जाना और भी बड़ी उपलब्धि है।

 

डीजीपी बनते तो होती कैडर में वापसी
इससे पहले सितंबर 2018 में जब पंजाब के पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा रिटायर हो रहे तो उनकी जगह सामंत गोयल को मिलने की संभावनाएं बनी थी। अपने मूल कैडर में लौटने के चाहवान सामंत गोयल ने 7 सितंबर को दिल्ली में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात की। अगर उस वक्त उनकी नियुक्ति डीजीपी के तौर पर हो जाती तो इस पद को लेकर चल रही खींचतान और अधिकारियों की एक-दूसरे के प्रति की जा रही छींटाकशी से भी मुक्ति मिलना लाजमी था। साथ ही उनकी भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश कि डीजीपी के सेवाकाल में कम से कम एक साल अवश्य रहना चाहिए, की शर्त पूरी हो जाती।

 

सीबीआई के विवाद में भी आया था गोयल का नाम
सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों के विवाद में भी सामंत गोयल का नाम आया था। सीबीआई के दावे के मुताबिक सामंत गोयल ने ही सोमेश के साथ डायरेक्टर राकेश अस्थाना और अन्य अधिकारियों की मीटिंग करवाई थी। जांच के दौरान गोयल और सोमेश के द्वारा एक-दूसरे को भेजे गए व्हाट्सऐप्प मैसेज भी मिले थे, जिनका संबंध राकेश अस्थाना के रिश्वत विवाद से था। इसके चलते उन्हें पीएमओ द्वारा रॉ की अहम जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने की भी आशंकाएं प्रबल हो गई थी। सतीश बाबू ने अपनी शिकायत में रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल का भी नाम लिखा था, लेकिन सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है।

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