पंजाब / गिरते जलस्तर के लिए सरकार की तैयारी; 3 हजार डैम और रेन हारवेस्टिंग प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे



3 thousand dams and 3 thousand rainwater harvesting projects will start in Punjab
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3 thousand dams and 3 thousand rainwater harvesting projects will start in Punjab

  • तेजी से गिर रहे भू-जल स्तर के आंकड़ों से डरी सरकार
  • सरकार ने देर से ही सही, लेकिन अपने स्तर पर समस्या से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं

Dainik Bhaskar

Jul 18, 2019, 07:05 AM IST

चंडीगढ़/जालंधर. पंजाब सरकार ने बारिश के पानी को रीचार्ज करने संबंधी बनाए नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। करीब तीन हजार ऐसे डैम बनाने का फैसला किया है, खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों का चयन किया है, जिनको किसी न किसी रूप मे नजरअंदाज किया जाता रहा है। सरकार 315 करोड़ रुपए में सूबे में 3000 रेन हारवेस्टिंग रिचार्ज स्ट्रक्चर लगाएगी। इनमें 305 चेक डैम और डैम शामिल किए जाएंगे ताकि पानी को रिजार्च कर इस्तेमाल लायक बनाया जा सके।

 

ऐसे करेंगे पानी स्टोर : राज्य के 20500 छप्पड़ कंक्रीट से बनाए जाएंगे

सूबे भर में करीब 20 हजार 500 छप्पड़ हैं, जिनमंे बारिश का पानी एकत्र रहता है। सरकार ने फैसला किया है कि इन सभी छप्पड़ों को कंक्रीट से बनाने की योजना है, जिससे पानी की स्टोरेज में बढ़ोतरी होगी। इस पानी को री-चार्ज करके खेतों के योग्य बनाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पहले 100 छप्पड़ों को लिया जाएगा। फिर अन्य पर काम किया जाएगा।

 

2 तरह से री-चार्ज होगा पानी...
सरकार ने दो तरह के पानी को रीचार्ज करने की योजना बनाई है। इसमें एक तो वह पानी जो खेतों से निकलेगा। दूसरा सभी सरकारी इमारतों स्कूल, कॉलेज, सभी सरकारी कार्यालय, संस्थाएं से जो बारिश का पानी निकालता है। उसको रीचार्ज किया जाएगा। इन सभी में इंजेक्शन बोरवेल लगाए जाएंगे जिससे पानी को रीचार्ज किया जा सकेगा।

 

इंडस्ट्री का पानी भी होगा रीचार्ज...
औद्याेगिक क्षेत्र से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को भी रीचार्ज कर इस्तेमाल के लायक बनाया जाएगा। समय समय पर उद्योगों की निरंतर चेकिंग की जाएगी। उद्योगों से निकलने वाले पानी को एकत्र का रीचार्ज करने के लिए अलग से प्रोजेक्ट लगाया जाएगा।

 

पानी बचाने की शुरुअात खुद से...गिलास में पानी उतना भरें जितना पी सकें

  • -नहाते वक्त पानी बाल्टी में भरकर और नलबंद करके नहाएं तो पानी बचेगा।
  • -ब्रश व सेविंग करते नल खुला न छोड़ें।
  • -कपड़े धोने के बाद बचा पानी पौधे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • -गाड़ी धोने के लिए भी वाटर पाइप का इस्तेमाल करने के बजाय बाल्टी में पानी भरकर प्रयोग करें।
  • -गर्म पानी के भरने के इंतजार में, नल और फव्वारे से आने वाला ठंडा पानी बर्बाद न होने दें और उसे संग्रहित करें।
  • -आप वाटर फिल्टर प्रयोग करते हैं, तो फिल्टर हुए पानी को बोतल में भरें और ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज में रखें।
  • -नहाने के बदले शावर का प्रयोग करें। नहाने से आप लगभग 50 से 60 लीटर पानी इस्तेमाल करते हैं! शावर में नहाने से एक तिहाई से कम पानी लगेगा।
  • -स्नान, कपड़े व बर्तन धोने से बचे पानी को बाग में इस्तेमाल करें
  • -साबुन वाले पानी को आप शौचालय में इस्तेमाल भी कर सकते हैं। उसे फ्लश टैंक को भर सकते हैं।
  • -टंकी में कम पानी का प्रयोग करने के लिए, पानी से भरी प्लास्टिक की बोतल को फ्लश टैंक में रखें। यदि आवश्यक हो तो, आप पानी की बोतल में कंकर या रेत डालकर उसे दबाकर रखें। या फिर, अपने जल बोर्ड से ‘हिप्पो’ या ‘सेव-अ-फ्लश’ को मंगवाएं।
  • -अपने फ्लश टैंक की जांच करें क्योंकि, सभी फ्लश टैंक पानी की कम मात्रा में प्रभावशाली रूप से काम नहीं करते।
  • -यदि आपने बोतल को पानी में डूबे रहने के लिए कंकर या रेत डालें हैं तो, ध्यान रखें कि बोतल का ढक्कन बंद रहे ताकि कंकर या रेत फ्लश टैंक में न गिरे हों।
  • -दो बटन वाले फ्लश की टंकी खरीदें। यह एक ऐसा फ्लश टैंक है जो मूत्र त्यागने के बाद थोड़ा पानी और मल त्यागने के बाद ज्यादा पानी का बहाव देता है, जिससे पानी की बचत होगी।
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