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सुसाइड नोट में लिखा- सॉरी पापा, मम्मा अब मुझसे बीमारी झेली नहीं जाती

टीबी से परेशान 20 साल के लड़के ने जहर निगल जान दी, ग्रेजुएट था अविनाश, बनना था पिता का सहारा।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 05:26 AM IST

जालंधर. टीबी से परेशान होकर 20 साल के अविनाश दत्ता (20) ने जहर निगलकर जान दे दी। न्यू दशमेश नगर के मकान नंबर 57 में किराये पर रहते अविनाश ने सुसाइड नोट में परिवार से माफी मांगते हुए लिखा है, “सॉरी पापा, सॉरी मम्मा, अब मुझसे बीमारी झेली नहीं जाती।’ पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखवाया है। एसएचओ बलबीर सिंह ने बताया कि अविनाश दत्ता मूल रूप से हिमाचल का रहने वाला था और चार महीने पहले ही दशमेश नगर में किराये के रूम में रहने आया था। उसे कई साल से टीबी और अस्थमा की शिकायत थी। फूड रेस्टोरेंट के इंप्लाई अविनाश के दोस्त जीवन सिंह ने बताया कि वह चार दिन से ड्यूटी पर नहीं आया था। टीबी के कारण सेहत काफी खराब हो गई थी। शुक्रवार सुबह जब उसके घर गए तो देखा कि लाश पड़ी है।

जीवन सिंह के मुताबिक अविनाश का उनके पिता राम लाल दत्ता ने हिमाचल में भी इलाज करवाया था। जालंधर आने पर उसने पिम्स से दवाई लेनी शुरू की थी। मगर टीबी दिन दिन बढ़ रही थी। अविनाश के पुलिस के मुताबिक फिलहाल परिवार के लोग जालंधर आए नहीं आए हैं। शनिवार को परिवार के आने पर अविनाश का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।

पिता राम लाल ने बताया कि बेटा हिमाचल से ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी की तलाश में जालंधर आया था। काम चलाने के लिए फूड बाजार रेस्टोरेंट में नौकरी करने लगा। हमेशा कहता था कि नौकरी कर घर का सहारा बनना है। जवान बेटे की मौत ने पूरी उम्र का दुख दे दिया है। अब वह अपना बुढ़ापा किसके सहारे बिताएंगे? राम लाल बाेले, अविनाश से कुछ दिन पहले बात हुई तो कह रहा था कि काम सीखने के बाद अपना काम शुरू करना है।

4 महीने के बच्चे को भी हो सकती है टीबी, दवा से इलाज संभव

जिला टीबी अफसर डॉ. रघु सभ्रवाल ने बताया कि टीबी किसी भी उम्र में हो सकती है। चार-पांच महीने के बच्चे को भी टीबी हो सकती है। पीड़ित मरीज के संपर्क में आने पर टीबी हो सकती है। इसमें भूख कम लगती है और कमजोरी जाती है। कई बार मरीज दिमागी रूप से परेशान हो जाते हैं। ट्रीटमेंट के बाद भी कुछ मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। दवाई अगर नियम से खाई जाए तो टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।