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कर्ज लेकर को भेजा था पढ़ने, फिर इस कारण देना पड़ा अपने बेटे की अर्थी को कंधा

शहीद ऊधम सिंह नगर में 30 मिनट कर मौत का खेल चलता रहा, लेकिन आस-पड़ोस के लोगों ने बीच-बचाव की जहमत नहीं उठाई।

Dainik Bhaskar

Dec 10, 2017, 02:46 AM IST
भाई को मुखाग्नि देता भाई और इनसेट में मृतक आशीष। भाई को मुखाग्नि देता भाई और इनसेट में मृतक आशीष।

फगवाड़ा. अपने जिस बेटे के दम पर वह अपना भविष्य देख रहा था, उस पिता ने ही अपने बेटे की अर्थी को कंधा दिया। बता दें कि मेघालय के शिबजी प्रसाद के बेटे आशीष को पड़ोसियों ने मामूली झगड़े में पीट-पीटकर मार डाला था। उसी क आज अंतिम संस्कार किया गया। झगड़े के समय सभी स्टूडेंट्स रूम में फ्रेंड का बर्थडे सेलिब्रेशन कर रहे थे, तभी ये हादसा हुआ था। दो बेटे करते हैं दुकान में काम...

- आशीष के पिता शिबजी प्रसाद ने बताया कि आशीष खामोश रहने वाला था। मेघालय में भी उसकी किसी ने शिकायत नहीं की, पता नहीं ऐसा कैसे हो गया।
- आशीष की पढ़ाई के लिए उसने कर्ज भी ले रखा था, लेकिन अब सब कुछ सपना बनकर रह गया।
- उसके 4 बेटे तथा 1 बेटी है। आशीष से छोटा भाई और बहन स्कूल में पढ़ते हैं, जबकि दो बेटे उसके साथ बर्तन की दुकान में काम करते हैं।
- मौत की खबर के बाद गुवाहाटी से फ्लाइट से दिल्ली और टैक्सी फगवाड़ा पहुंचा। बॉडी ले जाना मुश्किल होने के कारण संस्कार फगवाड़ा में ही कर दिया गया। उसके पार्थिव शरीर को भाई मुकेश ने अग्नि दी।

बाथरूमों में जाकर बचाई जान
- इस बीच पुलिस ने हत्या में शामिल दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर दो दिनों का रिमांड हासिल किया, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है।
- पुलिस दी शिकायत में अमन कुमार ने बताया था कि वो अपने मित्रों विवेक कुमार पांडे, आकाश श्रीवास्तव, सौरव कुमार, रजत चौबे के साथ आशीष प्रसाद निवासी मेघालय के पीजी पर ऋषभ का जन्मदिन सेलीब्रेट कर रहे थे। इस बीच सामने वाले मकान में रहने वालों ने घर पर पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
- उनमें से 4 युवकों ने कमरों व बाथरूमों में जाकर जान बचाई। उन लोगों ने घर में दाखिल होकर बेस बैट, लकड़ी के दस्तों से आशीष और उस पर हमला कर जख्मी कर दिया।
- वो आशीष को मोटरसाइकिल से हॉस्पिटल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...

विलाप करती हुई मां। विलाप करती हुई मां।
मां का रो-रोकर बुरा हाल था। मां का रो-रोकर बुरा हाल था।
कमरे के कांच फूटे हुए। कमरे के कांच फूटे हुए।
कमरे में मिला पार्टी का सामान। कमरे में मिला पार्टी का सामान।
पुलिस जानकारी लेते हुए। पुलिस जानकारी लेते हुए।
सभी स्टूडेंट पीजी पर फ्रेंड का जन्मदिन सेलीब्रेट कर रहे थे। सभी स्टूडेंट पीजी पर फ्रेंड का जन्मदिन सेलीब्रेट कर रहे थे।
पिता जानकारी देते हुए। पिता जानकारी देते हुए।
4 युवकों ने कमरों व बाथरूमों में जाकर जान बचाई थी। 4 युवकों ने कमरों व बाथरूमों में जाकर जान बचाई थी।
शुरू में तो छात्र यह समझ ही नहीं सके कि तोड़फोड़ और पत्थरबाजी कौन और क्यों कर रहा है। शुरू में तो छात्र यह समझ ही नहीं सके कि तोड़फोड़ और पत्थरबाजी कौन और क्यों कर रहा है।
दोनों आरोपी। दोनों आरोपी।
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भाई को मुखाग्नि देता भाई और इनसेट में मृतक आशीष।भाई को मुखाग्नि देता भाई और इनसेट में मृतक आशीष।
विलाप करती हुई मां।विलाप करती हुई मां।
मां का रो-रोकर बुरा हाल था।मां का रो-रोकर बुरा हाल था।
कमरे के कांच फूटे हुए।कमरे के कांच फूटे हुए।
कमरे में मिला पार्टी का सामान।कमरे में मिला पार्टी का सामान।
पुलिस जानकारी लेते हुए।पुलिस जानकारी लेते हुए।
सभी स्टूडेंट पीजी पर फ्रेंड का जन्मदिन सेलीब्रेट कर रहे थे।सभी स्टूडेंट पीजी पर फ्रेंड का जन्मदिन सेलीब्रेट कर रहे थे।
पिता जानकारी देते हुए।पिता जानकारी देते हुए।
4 युवकों ने कमरों व बाथरूमों में जाकर जान बचाई थी।4 युवकों ने कमरों व बाथरूमों में जाकर जान बचाई थी।
शुरू में तो छात्र यह समझ ही नहीं सके कि तोड़फोड़ और पत्थरबाजी कौन और क्यों कर रहा है।शुरू में तो छात्र यह समझ ही नहीं सके कि तोड़फोड़ और पत्थरबाजी कौन और क्यों कर रहा है।
दोनों आरोपी।दोनों आरोपी।
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