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यहां मिली थी प्रीमेच्योर बच्ची, इलाज के दौरान हुई मौत,

लिंगानुपात 1000 लड़कों के पीछे 892 लड़कियां हैं।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 06:54 AM IST

बरनाला. जिला प्रशासन की ओर से बेसहारा लावारिस नवजात बच्चों के लिए की गई पंगूड़े की स्थापना के 70 दिन बाद पहली बार कोई पंगूड़े में बच्ची को छोड़ गया। उसे प्राथमिक इलाज देने के बाद राजिंदरा अस्पताल पटियाला में रेफर किया।

लेकिन जिला प्रशासन सेहत विभाग की बच्ची को बचाने के लिए की गई कड़ी मशक्कत भी काम कर सकी और बच्ची ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।वहीं डीसी घनश्याम थोरी ने कहा कि जिले में लिंगानुपात 1000 लड़कों के पीछे 892 लड़कियां हैं। सहायक कमिश्नर डॉ. हिमांशू गुप्ता ने बताया कि भ्रूणहत्या की रोकथाम के लिए इस वर्ष 17 अक्टूबर को सिविल अस्पताल में डीसी घनश्याम थोरी ने पंगूड़ा सिस्टम की शुरुआत की थी, ताकि कोई भी व्यक्ति जो अपने बेटा बेटी की परवरिश नहीं करना चाहता वह बच्चे को इस पंगूड़ा में डाल सकता है।

जिसकी लावारिस बच्चे बच्ची की संभाल आगे उसे सरकार से मान्यता प्राप्त किसी एनजीओ को सौंपने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। मंगलवार को जब बच्ची को किसी अज्ञात द्वारा पंगूड़ा में डाला गया तो स्टाफ नर्स गुरप्रीत कौर ने बच्ची को जाकर उठाया। सूचना मिलते ही वह खुद, सेक्रेटरी रेड क्राॅस विजय गुप्ता, कार्यकारी एसएमओ डॉ. अविनाश राय जिला बाल सुरक्षा अधिकारी अभिषेक सिंगला मौके पर पहुंच गए। गुप्ता ने कहा कि तुरंत ही एसएमओ द्वारा पुलिस को सुचित किया गया और बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार देने के बाद पटियाला के राजिंदरा अस्पताल के लिए भेज दिया गया। डॉ.अविनाश राय ने कहा कि राजिंदरा अस्पताल पटियाला के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इस प्री-मेच्योर बच्ची की आयु 20 से 24 हफ्ते थी और बच्ची को पटियाला में मोर्चरी में रखा गया है।

बच्ची की मौत की सूचना नहीं मिली: एसएचओ
थाना सिटी के एसएचओ बलवंत सिंह ने कहा कि लावारिस बच्ची के पंघूड़े में प्राप्त होने की सूचना तो उन्हें प्राप्त हो गई थी, लेकिन बच्ची की मौत संबंधित अभी तक उनको कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कानूनी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। (हरविंदर रोमी)