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यहां हर 5वीं महिला घरेलू हिंसा की शिकार, शर्मसार करने वाली रिपोर्ट

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली और समाज को शर्मसार करने वाली है।

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2018, 06:31 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर। प्रतीकात्मक तस्वीर।

जालंधर. पंजाब में हर 5वीं महिला घरेलू हिंसा की शिकार है। यहां शहर से लेकर गांव तक घरों में भी महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं। सास से सवाल जवाब करने पर, बच्चों की सही देखभाल न होने पर, दो से ज्यादा बेटियां होने पर घरों में उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। यह खुलासा हुआ है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-2016) की रिपोर्ट में।


प्रदेश के 16449 परिवारों पर हुए इस सर्वे में 15 से 49 वर्ष) की 21 हजार महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी है। 20.5 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हैं। इसमें 19 प्रतिशत विवाहित महिलाएं हैं। हैरानी की बात यह है कि इसमें से 63 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा के खिलाफ न तो किसी को बताती हैं और न ही इसके खिलाफ आवाज उठाती हैं। वह चुपचाप इस दंश को झेल रही हैं। क्योंकि वे जानती हैं कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो मायके और ससुराल दोनों घरों के द्वार उन के लिये सदा के लिये बंद हो जायेंगे।


रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 60 प्रतिशत मामलों में पाया गया, कि हिंसा के वक्त पति शराब के नशे में होते हैं। यानी नशे में छोटी-छोटी बात पर पत्नियों की पिटाई कर देते हैं। बात अगर पड़ोसी राज्य हरियाणा की करें तो यहां भी स्थिति सुखद नहीं है। हरियाणा में 34 प्रतिशत यानि हर तीसरी महिला घरेलू हिंसा से पीड़ित है। शराब के नशे में पतियों द्वारा हिंसा करने की दर 71 प्रतिशत है और इस बारे में आवाज न उठाने अथवा मदद की गुहार न लगाने का प्रतिशत 77 है। हालांकि, इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए 2006 में जोर-शोर से 'घरेलू हिंसा अधिनियम' लागू किया गया मगर यह दिखावे का ही है। बड़ी बात यह भी है कि घरेलू हिंसा में पिटाई को बहुत सी महिलाओं ने सहज ही स्वीकार कर लिया है।


पंजाब में 19484 महिलाओं पर हुए सर्वे में 33 प्रतिशत महिलाएं विशेष परिस्थिति में पति द्वारा पिटाई को सही मानती हैं। वहीं, 21 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि यदि सास के साथ उन्होंने अच्छा व्यवहार नहीं किया है तो उनकी पिटाई जायज है। 15 प्रतिशत का मानना है कि बच्चों की सही देखभाल न किए जाने पर उनकी पिटाई उचित है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-2016) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान ने किया है। इसका उद्देश्य भारतीय समाज के प्रत्येक क्षेत्र विशेषकर स्वास्थ्य, शिक्षा, जन्म और मृत्यु दर, धर्म, जाति इत्यादि में हो रहे परिवर्तन का एक सुव्यवस्थित डाटा बैंक बनाना है।

अधिनियम बना पर नहीं होती सुनवाई

घरेलू हिंसा अधिनियम का निर्माण 2005 में किया गया और 26 अक्टूबर 2006 से इसे लागू किया गया। यह अधिनियम महिला बाल विकास द्वारा संचालित किया जाता है। शहर में महिला बाल विकास द्वारा जोन के अनुसार आठ संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जो घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनते हैं और पूरी पड़ताल के बाद मामले को कोर्ट भेजा जाता है। अधिनियम के अंतर्गत महिलाओं के हर रूप मां, भाभी, बहन, पत्नी व महिलाओं के हर रूप और किशोरियों से संबंधित मामलों को शामिल किया जाता है। लेकिन घरेलू मामले बाहर आ ही नहीं पाते।

पुलिस की लापरवाही के 3 उदाहरण

1. एफआईआर दर्ज नहीं करते
घरेलू हिंसा में कई बार पुलिस केस दर्ज नहीं करती। सिर्फ डायरी में लिख लेती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो पीड़ित महिलाओं को एफआईआर की नकल तक नहीं दी जाती। मांगने पर परेशान किया जाता है। घरेलू हिंसा के आंकड़े बढ़ने के डर से पुलिस कार्रवाई से बचती है।

2. बड़ा मुद्दा ना मानना
पति द्वारा महिलाओं को पीटने को पुलिस बड़ा मुद्दा नहीं मानती। 'पति ने ही तो पीटा है, प्यार भी वही करता है' कहकर पुलिस महिलाओं को टाल देती है। पुलिसकर्मी रिश्वत लेकर प्रताड़ित महिला को समझौते के लिए विवश करते हैं अथवा प्रकरण कमजोर कर देते हैं।

3. ज्यादातर ये मानना कि घरेलू हिंसा के झूठे प्रकरण अधिक


थाने में सिर्फ एक या दो महिला सिपाही तैनात हाेती हैं। महिला या घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों में उनका हस्तक्षेप भी कम कर दिया जाता है। यही कारण है कि महिला पुलिसकर्मी भी घरेलू हिंसा की शिकार महिला की ज्यादा मदद नहीं कर पाती हैं। कई बार तो उनका ही शोषण किया जाता है। पुलिस का कहना होता है कि दहेज तथा घरेलू हिंसा के झूठे प्रकरण ही अधिक होते हैं।

ऐसे किया गया सर्वे...

पंजाब के 20 जिलों के 16449 परिवार वालों को शामिल किया गया, इसमें 19484 महिलाएं (आयु 15-49) और 93 प्रतिशत पुरुषों (15-54) ने अपनी राय रखी।

हरियाणा के 21 जिलों में 13 फरवरी 2015 से 24 जून 2015 तक 17332 घरों की 21652 महिला (15-49 आयुवर्ग) और 3548 पुरुषों ने अपनी राय रखी। (15-24 आयु वर्ग) से बात कर रिपोर्ट तैयार की गई।)

प्रश्नावली : सर्वे में हर क्षेत्र से संबंधित विषयों के सवाल पूछे गए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।प्रतीकात्मक तस्वीर।
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