जालंधर

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अब वेंटिलेटर की कमी से नहीं जाएगी किसी मासूम की जान, एसडीएम ने दी ग्रांट

एसडीएम ने वेंटिलेटर और अन्य मशीनों के लिए 77 लाख रुपये जारी किए हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 05:11 AM IST
lack of a ventilator will not go away from any innocent person

जालंधर. सिविल अस्पताल में नवजात बच्चों को वेंटिलेटर की कमी का खमियाजा जान देकर नहीं चुकाना पड़ेगा। बच्चों के वेंटिलेटर की खरीद के लिए एसडीएम-1 राजीव वर्मा ने फंड जारी कर दिया है। वर्मा ने भास्कर को बताया कि मेरी तरफ से कोई देरी नहीं थी। सिविल अस्पताल ने मुझसे कभी फंड की डिमांड ही नहीं की थी। मैंने खुद अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केएस बावा को फोन कर कहा कि आपको बताना चाहिए था कि वेंटिलेटर की जरूरत है। मैंने खुद आपको चेक भेज देने थे। पको आने की जरूरत भी नहीं पड़नी थी।

एसडीएम ने वेंटिलेटर और अन्य मशीनों के लिए 77 लाख रुपये जारी किए हैं। जिक्रयोग है कि बच्चों के वेंटिलेटर के अभाव में नवजात बच्चों को सीरियस होने पर अमृतसर या किसी प्राइवेट अस्पताल में रेफर किया जाता है। कई मामलों में रास्ते में ही नवजात दम तोड़ देते हैं।

नवजात की जान बचाने में मदद मिलेगी
सिविलअस्पताल में नवजात बच्चों के वेंटिलेटर की सख्त जरूरत थी। प्री-मेच्योर बच्चों और जन्म लेते ही कई बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। फिलहाल दो न्यूनेटल वेंटिलेटर मिलने जा रहे हैं। हर हफ्ते एक से दो बच्चों को वेंटिलेटर स्पोर्ट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में हर महीने सिविल में 8-10 बच्चों को इसकी सुविधा मिल पाएगी। प्राइवेट अस्पतालों में वेंटिलेटर स्पोर्ट पर जाने वाले बच्चों का दिन में ही 8-10 हजार रुपये का खर्च हो जाता था। जिसमें वेंटिलेटर का किराया और दवाएं शामिल हैं। वेंटिलेटर लगने से बच्चों का सिविल में ही इलाज हो सकेगा।

एसडीएम राजीव वर्मा ने बताया कि एमपी लैड फंड के 75 प्रतिशत पैसे खर्च करने वाली एजेंसी को काम शुरू होने से पहले जारी कर दिए जाते हैं और बाकी के 25 प्रतिशत मशीन इंस्टाल या काम पूरा होने के बाद। सिविल अस्पताल को बाकी के पैसे यूजर सर्टिफिकेट (काम पूरा होने के बाद) जमा करवाने के बाद ही जारी होंगे। सिविल में ईको मशीन लग चुकी है इसलिए उसके बाकी 25 प्रतिशत फंड भी जारी कर दिए गए हैं। हमारी ओर से कभी देरी नहीं की जाती। राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल ने सिविल अस्पताल को पिछले चार महीनों में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड सेंक्शन किया था। पैसे एसडीएम-1 के पास जमा होते हैं।

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