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राणा गुरजीत के बेटे कोे ईडी ने 17 को बुलाया, फेमा एक्ट के उल्लंघन का आरोप

विदेश में शेयरों या जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट) के रूप में करीब सौ करोड़ रुपए जुटाए हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 04:52 AM IST
Rana Gurjeets son Ko Ed summoned 17

जालंधर. कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह को ईडी ने फेमा एक्ट के उल्लंघन में समन जारी कर 17 जनवरी को सुबह 10 बजे दफ्तर में बुलाया है। राणा के बेटे पर आरोप है कि उनकी कंपनी राणा शूगर्स लिमिटेड के नाम पर विदेश में शेयरों या जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट) के रूप में करीब सौ करोड़ रुपए जुटाए हैं।


ईडी का कहना है कि राणा शूगर्स ने शेयरों की खरीद-फरोख्त के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी नहीं ली और न ही बताया। कैबिनेट मंत्री राणा के बेटे राणा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, इसलिए ईडी उनसे फेमा के उल्लंघन को लेकर तीखे सवाल-जवाब के मूड में है। उनसे पूछताछ जालंधर दफ्तर में डिप्टी डायरेक्टर राहुल सोहू करेंगे। ईडी को शक है कि राणा की कंपनी ने विदेशों में बैंकों से विदेशी निवेशकों या संस्थाओं द्वारा उठाए गए लोन के लिए गारंटी दी थी।


इसलिए मंत्री के बेटे को समन|जीडीआर जारी करने वाली भारतीय कंपनियों को फेमा के तहत कुछ नियमों का पालन करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सूचनाएं साझा करना लाजमी है। आरबीआई ने ईडी को बताया है कि राणा शूगर्स द्वारा जीडीआर जारी करने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। कंपनी ने इंडिया में पैसे के अंतिम उपयोग के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी।

राणा की कंपनी का ईडी को जवाब, हमने कोई गलत काम नहीं किया

ईडी ने राणा की कंपनी से साल 2005-06 से लेकर 2007-08 तक की ऑडिट बैलेंसशीट के रिकाॅर्ड के साथ-साथ जीडीआर की जानकारी मांगी थी। राणा की कंपनी ने जुलाई में ईडी की ओर से मांगे गए डॉक्यूमेंट दे दिए थे। तब राणा की कंपनी ने तर्क दिया था कि उनकी कंपनी ने कुछ गलत नहीं किया और न ही हमारी कंपनी ने किसी कानून का उल्लंघन किया। ईडी ने 6 महीने डॉक्यूमेंट्स की जांच की। राणा की कंपनी की ओर से दी गई जानकारी से ईडी संतुष्ट नहीं है। इसीलिए दो जनवरी को पहला समन राणा के बेटे को जारी किया था पर वह नहीं आए थे।

सेबी ने पकड़ा दुबई का नेटवर्क तो सामने आया था मंत्री के बेटे की कंपनी का नाम

सेबी ने दुबई से चल रहे अरुण पंचारिया के नेटवर्क को पकड़ा है। नेटवर्क में 51 कंपनियां हैं। सेबी ने जांच की तो जांच के दायरे में राणा शूगर्स भी आ गई। कहा जा रहा है कि राणा शूगर्स का पैसा भारत में ट्रांसफर करने से पहले कुछ समय के लिए पुर्तगाल के बैंक में रखा गया था। इस पैसे के बारे में आरबीआई या सेबी को जानकारी नहीं दी थी। सेबी ने पहले अपने स्तर पर जांच की तो फेमा के उल्लंघन के क्लू मिले थे। सेबी ने जून में अपनी जांच पूरी कर मामला ईडी को भेज दिया था।

दस साल पहले प्लांट के लिए फंड जुटाए थे


हम बिजनेस करते हैं। हमें कोई भी डिपार्टमेंट कोई भी चीज पूछ सकता है। चाहे इनकम टैक्स, सेल टैक्स या फिर ईडी। अगर कोई डिपार्टमेंट बुलाता है और चिट्टी भेजता है तो हमें जाना ही पड़ता है। दस साल पहले हमने कुछ प्लांट लगाए थे और इसके लिए फंड जुटाए थे। हमारी कंपनी ने कोई गलत काम नहीं किया। -राणा इंद्र प्रताप सिंह, एमडी. राणा शूगर्स लिमिटेड

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