--Advertisement--

इंच-मीटर के हिसाब से होंगी रजिस्ट्रियां, ऐसे होगी कैल्क्युलेट

लोगों को छोटे-बड़े मरले की कंफ्यूजन से राहत मिलेगी, वहीं रेवेन्यू रिकाॅर्ड में गड़बड़ियां भी बंद होंगी।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 05:33 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

जालंधर. जिले में अब लैंड मय्यरमेंट में कोई गड़बड़ नहीं होगी सकेगी क्योंकि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए मैट्रिक्स सिस्टम तैयार हो रहा है। जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए जहां-जहां नया जेनरिक सॉफ्टवेयर लांच होगा वहां पर मे ट्रिक सिस्टम भी लॉन्च किया जाएगा। लोगों को छोटे-बड़े मरले की कंफ्यूजन से राहत मिलेगी, वहीं रेवेन्यू रिकाॅर्ड में गड़बड़ियां भी बंद होंगी। नए सिस्टम में पटवारी लोगों की जमीन इधर-उधर नहीं कर सकेंगे।

रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने लैंड मय्यरमेंट के लिए 5 श्रेणियां तय कीं
पंजाब लैंड रेवेन्यू मेनुअल के मुताबिक हर जिले और हर मोहल्ले के लिए अलग-अलग लैंड केलकुलेशन सिस्टम है। जालंधर जिले में लैंड मेजरमेंट के लिए पांच श्रेणियां तय की गई हैं। इसमें सबसे छोटी श्रेणी सरसाही है। इसके बाद करम, फिर मरला, फिर कनाल और फिर गुमाओ है। यह श्रेणियां 1975 में फाइनल हुई थी लेकिन आज तक किसी ने इन्हें फॉलो ही नहीं किया। छोटे-बड़े मरले का सिस्टम हावी हो गया। शहर के कई इलाकों में 207 स्कवेयर फीट का मरला है तो कहीं 272 स्कवेयर फीट का मरला। इससे रेवेन्यू रिकार्ड में भी खामियां गई।

जमीन के हिसाब से स्टांप ड्यूटी
पटवारियों का रिकाॅर्ड मैच होना बंद हो गया जबकि मैनुअल में सब कुछ क्लियर है। मेनुअल में स्कवेयर फीट वाला सिस्टम नहीं है। हर इलाके की कैलकुलेशन रिपोर्ट तैयार बन रही है। पटवारियों को मेनुअल के मुताबिक कैलकुलेशन की डिटेल देने को कहा है। डिटेल ऑनलाइन के बाद रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर के साथ लिंक होगी। जितने लोग सॉफ्टवेयर में रजिस्ट्री करवाएंगे, उन्हें मैट्रिक्स सिस्टम के जरिए अपनी जमीन की कैलकुलेशन करवानी होगी। जितनी जमीन कैलकुलेट होगी, उसके हिसाब से ही स्टांप ड्यूटी देनी होगी।