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स्कूल में टीचरों के सामने स्टूडेंट से बदसलूकी, पूरे स्टाफ काे हटाया

जांच कमेटी की रिपोर्ट- बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, नेता भी खूब कर रहे दौरा

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2018, 04:08 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

पटियाला/नाभा. नाभा के गांव टोहड़ा के सरकारी स्कूल में लड़की वीरपाल कौर से जाति सूचक शब्द बोलने, मारपीट और फेसबुक पर बदनाम करने पर स्कूल के पूरे 16 लोगों के स्टाफ का ट्रांसफर कर दिया है। जांच के लिए डीसी की अगुवाई में बनी कमेटी इसकी सिफारिश की थी। इसमें सेवादार और क्लर्क से लेकर प्रिंसिपल तक हैं। प्रिंसिपल को संगरूर भेजा गया है। मामला मई 2017 का है।

इस मामले में वीरवार को कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने चार मेंबर कमेटी बनाई थी। टीम ने शनिवार को रिपोर्ट में कहा कि टीचरों के रहते माहौल खराब हो रहा है। पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नेताओं के लगातार किए जा रहे दौरा से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। मामला में श्री अकाल तख्त साहिब ने भी जांच के लिए कमेटी बनाई है।

यह था मामला

मार्च 2017 में वीरपाल ने प्रिंसिपल और क्लर्क के कहने पर भी जाटों के बच्चों को नकल नहीं कराई। इस पर स्टाफ ने उत्पीड़न व बच्चों ने मारपीट की थी। जनवरी 2018 में वीरपाल ने एससी-बीसी कमीशन को शिकायत की। दलित नेता डॉ. जतिंदर मट्‌टू ने मीडिया के सामने सारे सबूत रखे। जिस पर कार्रवाई हुई।

वीरपाल कौर का कहना- कुछ की गलती, सजा सभी को

तत्कालीन एसएचओ को तुरंत कार्रवाई करनी थी। प्रिंसिपल ने भी एक्शन नहीं लिया। नतीजा रहा कि कुछ ने गलती की और सभी को सजा भुगतनी पड़ी।

डीपीआई सेक्रेटरी ने कहा- हेड का तो पहले ही जाना तय था

डीपीआई सेक्रेटरी परमजीत सिंह ने कहा िक डीपीआई कमेटी की सिफारिश पर ट्रांसफर किया गया है। अधिक दोषी तो प्रिंसिपल हैं, क्योंकि उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसलिए ट्रांसफर हुआ।

प्रिंसिपल-क्लर्क को छोड़ बाकी का जिले में ही तबादला

कमेटी के मुताबिक, जांच में सबसे ज्यादा दोषी प्रिंसिपल पाए गए। इसके चलते उनको दूसरे जिले में भेजा गया है। क्लर्क को भी इसीलिए कपूरथला भेजा। प्रिंसिपल को मामले को शुरुआत से ही सख्त होना चाहिए था।

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