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नौजवान बुजुर्ग और अमीर गरीब बनकर ले रहे थे पेंशन का लाभ, पेंशनरों की हुई जांच

अब तक ऐसे फर्जी पेंशनर सरकार को तीन सालों में करोड़ों रुपए का चूना लगा चुके हैं।

Danik Bhaskar | Dec 31, 2017, 06:36 AM IST

मानसा. पूर्व अकाली-भाजपा सरकार समय लगाई पेंशन सहायता में जांच दौरान करोड़ों रुपए का घपला निकलने के आसार है। मानसा जिले में पंजाब सरकार द्वारा बुढ़ापा, विधवा पेंशनरों की करवाई गई जांच में 14600 ऐसे फर्जी पेंशनर्स निकले हैं जो अब तक बूढ़े, आश्रित बच्चे आदि बनकर पेंशन लेते रहे हैं। और तो और इनमें वह व्यक्ति भी शामिल हैं जो घर से अमीर हैं लेकिन सरकार द्वारा हर महीने मिलने वाली 500 रुपए पेंशन लेने के लिए वह गरीब बने रहे। अब तक ऐसे फर्जी पेंशनर सरकार को तीन सालों में करोड़ों रुपए का चूना लगा चुके हैं।

अभी सामाजिक सुरक्षा और परिवार भलाई विभाग यह जांच करवा रहा है कि इन व्यक्तियों ने कितना समय सरकार से पेंशन सहायता के लिए तथा यह कितने पैसे हड़प कर गए। इसके लिए विभाग ने पंजाब सरकार को सारी रिपोर्ट तैयार करके भेजी है।

पंजाब में सत्ता बदलने के बाद जैसे विधवा, बुढ़ापा आश्रित बच्चों को मिलने वाली पेंशन सहायता पर रोक लग गई हो। मानसा जिले में उक्त व्यक्तियों को दी जाने वाली पेंशन सहायता तहत अब तक अप्रैल 2017 की 4 करोड़ 26 लाख, 50 हजार रुपए की रकम मिली है। जबकि इसके बाद मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर के लिए कोई भी किश्त जारी नहीं हुई है। जिला सामाजिक सुरक्षा अफसर सतीश कपूर का कहना है कि इसके लिए सरकार को लिखा गया है और आती रकम पेंशनरों में बांट दी जाती है।

तीन सालों में यह व्यक्ति पंजाब सरकार के खजाने को अकेले मानसा में ही 26 करोड़ 28 लाख का चूना लगा चुके हैं। जिला सामाजिक सुरक्षा अफसर सतीश कपूर का कहना है कि सरकार द्वारा करवाई गई पेंशनों की जांच दौरान मानसा जिले में 85 हजार में से 14600 व्यक्ति फर्जी पेंशन लेने वाले निकले हैं जिनकी पेंशनें काटकर इसकी रिपोर्ट सरकार को आगे भेज दी गई है।

सामाजिक सुरक्षा और परिवार भलाई विभाग मानसा के पास पूर्व अकाली-भाजपा सरकार के समय से 85 हजार व्यक्ति आश्रित बच्चे, विधवाओं और बुजुर्ग के आधार पर पेंशन लेते रहे हैं जिन पर हर शर्त भी लागू होती थी कि इन व्यक्तियों के पास 60 हजार रुपए से अधिक सालाना आमदन हो, जिनकी उम्र सीमा बुढ़ापा कटेगरी में 65 साल से अधिक हो और महिलाओं में यह हद 58 साल तय की गई है। पंजाब में सत्ता बदलने के बाद कांग्रेस सरकार द्वारा जिला स्तर पर करवाई गई पेंशनों की जांच दौरान 85 हजार में से 14600 व्यक्ति फर्जी पेंशनर निकले हैं जो कम उम्र दिखाकर बूढ़े पर उक्त शर्तों अनुसार सरकार से 500 रुपए प्रति पेंशन लेते रहे।