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अंबियां नूं बूर पेया... मिठास में न डालें रासायनिक खाद का जहर

पठानकोट| आम के पेड़ इन दिनों बूर से लद गए हैं। फूल के एकाध महीने बाद ही इनमें फल लगना शुरू हो जाएगा। बागों की संभाल के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:30 AM IST

अंबियां नूं बूर पेया... मिठास में न डालें रासायनिक खाद का जहर
पठानकोट| आम के पेड़ इन दिनों बूर से लद गए हैं। फूल के एकाध महीने बाद ही इनमें फल लगना शुरू हो जाएगा। बागों की संभाल के लिए बागवानों का यह सबसे नाजुक दौर है। इन दिनों आम की बगीचे में पानी देने के साथ पेड़ों की निराई गुड़ाई करनी जरूरी है। वहीं किसान यूरिया खाद डालकर ज्यादा पैदावार लेने के चक्कर में आम की मिठास में जहर न घोलें। कृषि विज्ञानियों की सलाह है कि हरी या आर्गेनिग खाद का ही यूज करें।

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से ही करें स्प्रे

इनसे सीखें...गुजरात के किसान आॅर्गेनिक खाद से उगा रहे आम...गुजरात के किसान अनिल कुमार गोसाईं ने बताया कि मैंने 20 एकड़ में 400 आम के पेड़ लगाए हैं। पहले इनमें यूरिया खाद डालकर आम की पैदावार ली जाती थी। 9 लाख रुपए सालाना मुनाफा कमाते थे। जबसे आॅर्गेनिक खाद डालनी शुरू की तो अब 20 लाख रुपए सालाना मुनाफा ले रहे हैं। साल में यह पेड़ तीन बार फल देते हैं। इनमें केसर, अलफाजो, तोता पुरी, बंगलोरी बदाम, राजापुरी नस्लें हैं।

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