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रीढ़ की हड्डी के टूटने से बिस्तर से उठने में नाकाम लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की फ्री ट्रेनिंग देगा उड़ान सेंटर

एनएचएस अस्पताल में शुरू हुए उड़ान रिहेबलिटेशन सेंटर ने देश का ऐसा पहला स्पाइन कॉर्ड इंजरी रिहेबलिटेशन सेंटर होने...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:05 AM IST
एनएचएस अस्पताल में शुरू हुए उड़ान रिहेबलिटेशन सेंटर ने देश का ऐसा पहला स्पाइन कॉर्ड इंजरी रिहेबलिटेशन सेंटर होने का दावा किया, जहां जरूरतमंद लोगों को फ्री में ट्रेनिंग दी जाएगी। स्पाइन कॉर्ड इंजरी यानी रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद जिन लोगों का कमर से नीचे या गर्दन से नीचे का हिस्सा लकवा मार जाता है उन्हें फिर से मुख्यधारा में लाने के लिए यह सेंटर शुरू किया जा रहा है।

खास बात यह है कि इसका प्रबंधन खुद एससीआईए (स्पाइनल कॉर्ड इंजरी एसोसिएशन) के हाथ में रहेगा। यह ऐसा ग्रुप है जिसके सदस्य खुद सालों तक बिस्तर पर जिंदगी जी रहे थे। शौच भी बेड पर कर रहे थे। संस्था के उप प्रधान दविंदर सिंह ने बताया कि ‘हम दिल्ली के एक रीहैब सेंटर गए और हमारी जिंदगी एक आम आदमी की तरह हो गई। शारीरिक कोई बदलाव नहीं आया लेकिन ट्रेनिंग से जिंदगी जीने का तरीका आ गया। हम खुद अपनी गाड़ी चलाने लग गए। शौच का पता चलना शुरू हो गया।

बेड से उठकर व्हील चेयर से अपने काम धंधे संभालने लग गए। जब जी चाहता देश के किसी भी कोने में जाने के लिए सक्षम हो गए। मगर जब पंजाब वापस आए तो हमें महसूस हुआ कि अपने आस पास के लोगों को भी बेड से उठाना है। मुश्किल यह आ रही थी कि सेंटर दिल्ली में था और हर कोई वहां का खर्च नहीं उठा सकता था।

रीजनल सेंटर कोई नहीं था। हम चाहते थे कि किफायती रीहैब सेंटर होना चाहिए। हम 10-20 लोग अक्सर मिलकर ये बातें किया करते थे कि तभी लवली युनिवर्सिटी ने हमें बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म दिया और एक प्रोग्राम आयोजित किया जिसमें 100 से 200 एससीआई लोग पहुंचे। वहां हमें फ्री ट्रेनिंग के लिए डॉ. शुभांग अग्रवाल, डॉ. नवीन चितकारा और डॉ. संदीप गोयल भी आते थे और बाद में हमने तय किया कि क्यों न पंजाब में एक सेंटर बनाया जाए जिससे ऐसे लोगों की जिंदगी खुशहाल हो सके। इन तीनों ने भी हामी भरी और हमें एनएचएस अस्पताल का एक फ्लोर दे दिया जहां एक समय में चार से छह लोगों का पुनर्वास किया जा सकेगा। एससीआईए टीम में सेक्रेटरी अभय डोगरा, परविंदर सिंह गोराया और गुरविंदर सिंह भी शामिल हैं।

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