• Home
  • Punjab
  • Jalandhar
  • चुनौतियों का सामना सोच में बदलाव से ही संभव: सांपला
--Advertisement--

चुनौतियों का सामना सोच में बदलाव से ही संभव: सांपला

केएमवी में विजय सांपला, यूनियन मिनिस्टर फार सोशल जस्टिस एंड डेवलपमेंट ने यूथ डेवलपमेंट फोरम का उद्घाटन किया।...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:10 AM IST
केएमवी में विजय सांपला, यूनियन मिनिस्टर फार सोशल जस्टिस एंड डेवलपमेंट ने यूथ डेवलपमेंट फोरम का उद्घाटन किया। उन्होंने ‘लीडरशिप चैलेंजेस इन पब्लिक लाइफ’ विषय पर स्टूडेंट्स को संबोधित किया और देश की युवा प्रतिभाओं से बातचीत की। इस अतिरिक्त मुख्य मेहमानों में रमेश शर्मा जिला अध्यक्ष बीजेपी, चंदर मोहन प्रधान आर्य शिक्षा मंडल एवं डॉ. सतपाल गुप्ता सदस्य केएमवी मैनेजमेंट कमेटी शामिल रहे। प्रिंसिपल प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने केएमवी की उपलब्धियों का परिचय दिया।

मुख्यातिथि विजय सांपला ने विद्यालय की ओर से युवा शक्ति के वैचारिक उत्थान के लिए प्रारंभ किए गए यूथ डेवलपमेंट फोरम का उद्घाटन किया गया। इसी के साथ उन्होंने यूनिवर्सिटी में मैरिट पोजिशंस प्राप्त करने वाली छात्राओं और संस्था की विशिष्ट छात्राओं को लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित किया। सांपला ने स्टूडेंट्स को कहा कि बदलते पारिदृश्य में चुनौतियों का सामना बदलाव से ही संभव है।

विशिष्ट सेवाएं देने वाली छात्राओर को लीडरशिप अवॉर्ड

अनुशासन और व्यवस्था के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी की बात करते हुए स्टूडेंट्स को इन्हें अपनाने की प्रेरणा दी।

सफलता के लिए सहयोग और समाज के प्रति जिम्मेदारी महत्वपूर्ण

चंद्रमोहन ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली को व्यावसायिक कौशल पर आधारित करने के साथ-साथ उसमें उन उदात्त मानवीय मूल्यों को सम्मिलित किया जाना जरूरी है जिनसे देश के युवाओं को स्वस्थ, सक्रिय, ऊर्जावान और मानव के रूप में संवेदनशील बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि भौतिक सफलता और उपलब्धियों के साथ-साथ जीवन में आपसी प्रेम, सहयोग, समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी महत्वपूर्ण है। समारोह का समापन राष्ट्र गान से किया गया। सांपला ने स्टूडेंट्स द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए और उनसे संवाद किया। छात्राओं के द्वारा राजनीति और समाज में फैले भ्रष्टाचार, समाज में फैली आपराधिक प्रवृति, अपराधों के उन्मूलन में असफल कानून व्यवस्था की विसंगतियों, महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराधों की घटनाओं, राजनीति, प्रशासन, एवं समाज में महिलाओं की उपेक्षित स्थिति, मंत्री होने के नाते उनके समक्ष पेश हुई चुनौतियों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे जिनका प्रत्युत्तर अत्यंत सरल भाषा, आत्मीय एवं भावुक शैली में देते हुए कहा कि राजनीति, सामाजिक जीवन की चुनौतियों का सामना सिर्फ कानूनी प्रावधानों से नहीं, नागरिकों के दृष्टिकोण और सोच में परिवर्तन हो सकता है।