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100 फीसदी डिसएबल वंदना ने 11 साल बाद शुरू की पढ़ाई

‘इंसान हौसला रखे तो किसी भी हालात में सफल हो सकता है। मेरी जिंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आए, जब लगा अब सब कुछ खत्म हो गया।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:10 AM IST

‘इंसान हौसला रखे तो किसी भी हालात में सफल हो सकता है। मेरी जिंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आए, जब लगा अब सब कुछ खत्म हो गया। जिंदगी तो बीत रही थी लेकिन कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था कि मुकाम मिल जाए। ऐसे में विवेक जोशी ने मुझे पढ़ाई की तरफ मोड़ा। अब वकील बनना मेरा टारगेट है।’

ये कहना है 26 साल की वंदना का, जो डॉक्टरों के मुताबिक 100 परसेंट डिसएबल है। गांव चौहका कलां की वंदना को पढ़ाई के अलावा संगीत का भी शौक है। उसकी पढ़ाई पूरी करवाने के लिए राष्ट्रपति अवॉर्ड हासिल कर चुके 100% डिसएबल विवेक जोशी आगे आए हैं।

राष्ट्रपति अवॉर्ड हासिल कर चुके विवेक जोशी कर रहे मदद, एक किलोमीटर दूर रोज पढ़ने जाती है ट्यूशन

8वीं पास करने के बाद छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई

11 साल पहले वंदना के भाई की मौत हो गई। तब उसने 8वीं की पढ़ाई पूरी की थी। घर के हालात सही न होने के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। 11 साल से पढ़ाई की ललक थी। विवेक जोशी को पता लगा कि वो 100 प्रतिशत डिसएबल होने के बावजूद पढ़ाई करना चाहती है तो विवेक घर पर आए और उनकी मां को समझाया और पढ़ाई का सारा खर्चा उठाया।

वकील बनना चाहती है वंदना, समाज से लड़ने को खुद को कर रही तैयार

वंदना ने कहा कि विवेक जोशी ने जिस तरह से हौंसला दिया है उसको देखते हुए वो भी वकील बनना चाहती है क्योंकि समाज के साथ लड़ने के लिए वो अपने आप को तैयार कर रही है। अब चाहे जो मर्जी हो जाए वो पढ़ाई बंद नहीं करेगी और समाज में अपनी अलग ही पहचान बनाएगी।

इलेक्ट्रॉनिक चेयर पर मेन रोड से होते हुए जाती हैं ट्यूशन

वंदना ने अप्रैल 2017 में 10वीं कक्षा में प्राइवेट एडमिशन ली और अब वह 10वीं के एग्जाम दे रही है। गांव चौहकां से एक किलोमीटर दूर बसंत हिल्स में ट्यूशन पढ़ने के लिए अकेली इलेक्ट्रॉनिक व्हील चेयर पर बैठकर मेन सड़क से होते हुए माधव सेवा सोसायटी में जाती है। यहां उन्हें फ्री पढ़ाया जा रहा है। माधव सेवा सोसायटी में कई एेसे बच्चे हैं, जिनको फ्री राष्ट्रपति अवार्डी कौशल्या देवी और विवेक जोशी की ओर से पढ़ाया जा रहा है।

पिता को पैरालाइज, बहन उठा रही है घर का सारा खर्च

वंदना ने बताया कि उनके पापा टैक्सी ड्राइवर थे और घर का सारा खर्च उनकी कमाई से ही चलता था। अचानक एक दिन पापा बीमार हुए और उनको अटैक आ गया। एक साथ तीन अटैक आने के कारण उनको पैरालाइज का अटैक भी आ गया। शरीर का एक हिस्सा बिल्कुल ही काम का नहीं रहा। भाई पारिवारिक झगड़े के कारण चल बसा और बहन का चार साल पहले डिवोर्स हो गया था। अब बहन भाई की जगह पर ही जॉब कर रही है और घर का सारा खर्च उठा रही है। वंदना ने कहा कि रोड पर स्पीड ब्रेकरों से उसे काफी परेशानी होती है लेकिन वे उन सभी बाधाओं को पार करना चाहती है, जो उसे रोक रही हैं।

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