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प्रिंसिपल से चार्ज मांगा तो एमजीएन के ट्रस्टीज का सामूहिक इस्तीफा

एमजीएन स्कूल आदर्श नगर की प्रिंसिपल गुरमीत कौर से चार्ज मांगने के विरोध में 96 साल पुराने एनजीएन एजुकेशनल ट्रस्ट...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:15 AM IST
एमजीएन स्कूल आदर्श नगर की प्रिंसिपल गुरमीत कौर से चार्ज मांगने के विरोध में 96 साल पुराने एनजीएन एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सेक्रेटरी समेत पांच सदस्यों और अन्य पदाधिकारियों ने शनिवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया।

सामूहिक इस्तीफे पर ट्रस्टीज ने लिखा है कि ‘वे एक ट्रस्टी के अहंकार से परेशान थे। अहंकार में एक ट्रस्टी प्रिंसिपल गुरमीत कौर को हटाने पर तुला हुआ है। ट्रस्ट के कुल 11 सदस्य हैं जिनमें से पांच सदस्य सेक्रेटरी जरनैल सिंह पसरीचा के साथ हैं जबकि छह सदस्य दूसरे गुट में हैं जो पसरीचा परिवार के ही एक सदस्य के नेतृत्व में चल रहा है।

जरनैल सिंह पसरीचा

एक वरिष्ठ मेंबर बोले- प्रिंसिपल वीअाईपी ट्रीटमेंट नहीं दे पाती थीं

ट्रस्ट के एक सीनियर मेंबर ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य को प्रिंसिपल विश नहीं करती थीं तो उन्हें बुरा लगता था। जब प्रिंसिपल राउंड पर होती थीं और उस ट्रस्टी से नहीं मिलती थीं तो ट्रस्टी कहता था कि ‘आपको पता नहीं चला कि मैं आया था’? इसी कारण उस मेंबर ने प्रिंसिपल को हटाने का प्लान बनाया और हमारे दो साथियों को भी साथ मिला लिया। एमजीएन ट्रस्ट के आठ स्कूल और दो काॅलेज चलते हैं। 1961 से ट्रस्ट के मेंबर और 1979 से सेक्रेटरी रहे जरनैल सिंह पसरीचा ने बताया कि ‘स्कूल में लगभग 3500 बच्चे हैं। उनके माता-पिता को मिला लिया जाए तो लगभग 10 हजार लोगों को हेंडल करने के लिए एक काबिल प्रिंसिपल की जरूरत थी। हमने लुधियाना से प्रिंसिपल गुरमीत कौर को जालंधर बुलाने पर राजी किया। वह अच्छा काम कर रही थीं लेकिन उनसे गलती यह हो गई कि उन्होंने अपने से कम काबिल व्यक्ति को बॉस की तरह विश नहीं किया। प्रिंसिपल एक प्रतिष्ठित पद है, उसका सम्मान होना चाहिए था। इसलिए हमने सामूहिक इस्तीफा दिया है।

मुझसे तीन साल की बात हुई थी : प्रिंसिपल

40 वर्षीय प्रिंसिपल गुरमीत कौर ने बताया कि जब जरनैल सिंह पसरीचा मुझसे मिले तो उन्होंने कहा था कि आप कम से कम तीन साल तक हमारे स्कूल को संभालेंगी। उसके बाद बाकी बातें होंगी। मुझे एक साल पूरा होने से पहले ही कहा जाने लगा कि आप जिम्मेदारियां हेंडओवर कर दीजिए। मैंने इस्तीफा तो नहीं दिया है और न ही मुझे हटाया गया है लेकिन विरोध करते हुए अपनी जिम्मेदारी सौंप दी है। मुझे ट्रस्ट ने प्रिंसिपल चुना था। एक सदस्य यह नहीं कह सकता कि मैं इस्तीफा दे दूं।

1979 में पांच लाख कर्ज था आज लगभग 500 करोड़ की प्रॉपर्टी...जरनैल सिंह पसरीचा ने बताया कि जब मैं स्कूल का सेक्रेटरी बना तब स्कूल पर पांच लाख रुपए कर्ज था। आज हम हर महीने 50 लाख रुपए तो सैलरी के ही दे रहे हैं। स्कूल ने बहुत तरक्की की है और हमारे कपूरथला वाले स्कूल की जमीन की कीमत ही लगभग 250 करोड़ रुपए होगी। एमजीएन में कर्मचारियों को पांच तारीख से पहले सैलरी दे दी जाती है।

त्यागपत्र देने वाले ट्रस्टी






एसएमसी एमजीएन एडिड स्कूल के पदाधिकारियों ने भी इस्तीफा दिया