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पहले बिजली कटी, फिर इंटरनेट, अब 5 महीनेे से सैलरी नहीं

सेवा केंद्रों की हालत प्रतिदिन बिगड़ रही है। पंजाब सरकार की तरफ से 1600 से ज्यादा सेवा केंद्रों को बंद करने और कंपनी...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:15 AM IST
सेवा केंद्रों की हालत प्रतिदिन बिगड़ रही है। पंजाब सरकार की तरफ से 1600 से ज्यादा सेवा केंद्रों को बंद करने और कंपनी का एग्रीमेंट रद्द करने की घोषणा के बाद से ही यह दौर शुरू हुआ है। जिले में आधे से ज्यादा सेवा केंद्रों का बिजली कनेक्शन कट चुका है। पिछले कई महीनों का बकाया सेवा केंद्रों पर पावरकॉम का खड़ा था। इसके बाद अब सेवा केंद्रों के इंटरनेट कनेक्शन भी ठप हो गए हैं।

शहर में ज्यादातर सेवा केंद्रों पर नोटिस लगा हुआ है कि इंटरनेट व्यवस्था नहीं है, इसलिए किसी दूसरे सेंटर से जाकर सर्विस लें। तीसरी सबसे बड़ी परेशानी स्टाफ को लेकर है। पिछले 5 महीने से मुलाजिमों को तनख्वाह नहीं मिली। इसलिए बड़ी तादाद में मुलाजिम काम छोड़कर जा चुके हैं। कई मुलाजिम अपनी मर्जी से ड्यूटी पर आते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि सैलरी मिलना मुमकिन नहीं।

सरकार की अनदेखी के कारण सेवा केंद्रों का बुरा हाल, आम पब्लिक झेल रही परेशानी

आधे से ज्यादा सेंटर में बिजली बंद, डीसी कांप्लेक्स में टाइप-1 सेवा केंद्र ही चालू

सिटी में 140 सेवा केंद्र, 106 को बंद करने का फैसला

लोग सेवा केंद्र जाते हैं तो उन्हें वहां जाकर पता चलता कि बिजली कनेक्शन कटा हुआ है या इंटरनेट बंद है। फिर वह किसी दूसरे सेंटर पर जाते हैं तो वहां भी उन्हें यही दिक्कत सामने आती है। सिर्फ डीसी कांप्लेक्स में स्थित टाइप-1 सेवा केंद्र को छोड़कर बाकी सभी जगह सेवाएं रुकी हुई हैं। जालंधर में 140 सेवा केंद्र हैं, जिसमें से 106 सेवा केंद्रों को बंद करने का सरकार फैसला ले चुकी है। बीएलएस कंपनी की जगह नई कंपनी को काम देने के लिए सरकार नोटिस जारी कर चुकी है। बदतर हो चुकी व्यवस्था का खामियाजा पब्लिक भुगत रही है।

अफसर बिजी, नहीं उठाते पब्लिक के फोन

डिप्टी कमिश्नर वरिंदर कुमार शर्मा की तरफ से पीसीएस अफसर डॉ. जय इंद्र की ड्यूटी सेवा केंद्रों की निगरानी और सुधार के लिए लगाई गई थी। मगर उनकी नियुक्ति जालंधर डेवलपमेंट अथाॅरिटी में बतौर एसीए हो चुकी है। डीसी दफ्तर में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का एडिशनल चार्ज है। अब पीसीएस डॉ. जय इंद्र ज्यादातर समय जेडीए में बिताते हैं। डीसी ऑफिस नहीं आते। सेवा केंद्रों में भी नहीं जाते। उनके पास जेडीए से संबंधित काम का बोझ इतना ज्यादा है कि वह सेवा केंद्रों की शिकायत लेकर फोन करने वाली पब्लिक का फोन भी नहीं उठा पाते। इससे हालात और खराब हो रहे हैं। लोगों ने मांग कि है कि प्रशासन से ही किसी अफसर की ड्यूटी सेवा केंद्रों के लिए लगानी चाहिए, जो सेवा केंद्रों जैसे छोटे मसले पर भी ध्यान दे सके।