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संसार पर पाप बढ़ने पर अवतरित होते हैं भगवान

साध्वी आभा भारती ने कहा कि महावीर जी अहिंसा के प्रवर्तक थे। -भास्कर सिटी रिपोर्टर | जालंधर दिव्य ज्योति जागृति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:15 AM IST

संसार पर पाप बढ़ने पर अवतरित होते हैं भगवान
साध्वी आभा भारती ने कहा कि महावीर जी अहिंसा के प्रवर्तक थे। -भास्कर

सिटी रिपोर्टर | जालंधर

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने अर्बन अस्टेट फेस-1 में महावीर जयंती को समर्पित सत्संग आयोजित किया। साध्वी आभा भारती ने कहा कि महावीर जी अहिंसा के प्रवर्तक थे। स्वयं भगवान महावीर का चरित्र अहिंसा की मूर्ति था। हमें अपने भीतरी वैरियों पर विजय पाने के लिए अंतर्मुखी होना होगा। तभी हम आंतरिक शत्रुओं का हनन कर पाएंगे। भगवान महावीर ने आत्मस्थित होने के लिए त्रिपदी सूत्र दिया था। आत्मा को देखे, जाने व अनुभव किए बिना तुम उसमें कैसे स्थित हो सकते हो? इसलिए एक पूर्ण आचार्य का सानिध्य प्राप्त करो। उनकी कृपा द्वारा ही तुम सम्यक दर्शन कर पाओगे, दर्शनोपरांत ही तुम आत्मा को जान पाओगे।

जिस के बाद तुम्हारा चरित्र सम्यक होगा। तुम आत्मस्थित हो पाओगे तभी आंतरिक शत्रु ध्वस्त होंगे और विजय बिगुल बज सकेगा। हम प्रतिवर्ष अरिहंतो, सिद्वों आचार्यों का जन्मदिन मनाते है। परंतु हममें से कितने लोग है जो इनको जीते है। इनको जीने का अर्थ हैं इनके दर्शन को जीना, इनकी जागरूकता को जीना और इनसे प्राप्त दिशाबोध को जीना। इन महापुरुषों ने सदैव यही राह दिखाई- दूसरों की जय से पहले खुद को जय करें। चौबीसों तीर्थंकरों व सिद्धों ने हमें त्रिपदी द्वारा स्वयं विजयी बनने की प्रेरणा दी और फिर जैन शब्द तो निकला ही जिन धातु से है जिसका अर्थ होता है- जीतना। पर क्या आज तक हम इस परिभाषा पर खरे उतर पाए? स्वयं को जीत पाए? पूछिए अपने आप से।

नकोदर में श्री कृष्ण कथा

नकोदर | दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से नकोदर में आयोजित पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा के चौथे दिन साध्वी सौम्या भारती ने प्रभु कथा का रसपान करवाते हुए कहा कि परम शक्ति समय-समय पर धर्म की स्थापना के लिए आती है। प्रभु ने तो अत्याचारी रावण का वध कर राम राज्य की स्थापना की और श्री कृष्ण जी के रूप में आए तो पापी कंस का वध कर राज्य अग्रसेन को सौंप दिया। भाव जब-जब पाप बढता है । शिक्षा देने के लिए प्रभु को आना ही पड़ता है। साध्वी जी ने कहा कि गीता का उपदेश मानव जीवन में नवजीवन का संचार करने वाला है। यह हमें आतम उत्थान का मार्ग प्रदान करती है। गीता हमारे जीवन में एक संजीवनी का कार्य करती है। गीता मात्र शाब्दिक ज्ञान नहीं है अपितु यह तो आत्मा जागृति का संदेश है।

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