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जीएसटी रिफंड जल्दी से देने के बारे में बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ नहीं कहा

सीए ने बजट लाइव देखा। - भास्कर जालंधर | बजट को लेकर इंडस्ट्री को तीन बातें पसंद नहीं आईं। पहला - इनकम टैक्स की स्लैब...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 04:15 AM IST
सीए ने बजट लाइव देखा। - भास्कर

जालंधर | बजट को लेकर इंडस्ट्री को तीन बातें पसंद नहीं आईं। पहला - इनकम टैक्स की स्लैब में कोई छूट नहीं दी। दूसरा - जीएसटी रिफंड अटके हैं, इसे जारी करने को लेकर बात तक नहीं की। तीसरा - एमएसएमई सेक्टर के लिए फंड्स तो रखने की बात की है लेकिन एक्सपोर्ट व लोकल मेन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए कोई इंसेटिव या पैकेज की घोषणा नहीं हुई है। खेतीबाड़ी सेक्टर, इंपलायमेंट और हैल्थ-एजूकेशन के प्रावधानों को अच्छा कदम भी बताया है।

कोई क्रांतिकारी बजट नहीं


बजट का होना न होना एक बराबर


मुद्रा में गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को एक्सपोजर अच्छा


अर्थव्यवस्था के हिसाब से जटिल बजट, धीरे-धीरे रिजल्ट आएंगे


छोटी इंडस्ट्री को नोटबंदी के नुकसान से राहत नहीं, खेती सेक्टर पर फोकस सराहनीय कदम

रोजगार बढ़ाने के प्रयासों पर सीए स्टूडेंट्स बोले -

इंप्लायमेंट पर फोकस पसंद

ग्रीन माडल टाउन में कुमार अश्विनी एसोसिएट्स के आॅफिस में सीए कर रहे स्टूडेंट्स ने बजट लाइव किया। बजट में युवाओं को ये बात पसंद आई है कि सरकार ने इंपलायमेंट पर जोर दिया है। बजट में सरकार ने इंटर्नशिप योजना लांच की है। इसके तहत जो ट्रेनी मुलाजिम कंपनियों में जमा होंगे, उन्हें आधा पैसा सरकार देगी। इस दौरान डाॅ. अश्विनी कुमार गुप्ता ने कहा कि इस बजट में सरकार ने रोजगार, ग्रामीण विकास और खेती सेक्टर-कारपोरेट सेक्टर पर जोर किया है। इस सेशन में निरपेश गुप्ता, साहिल गुप्ता, सेहज, शुभम, अक्ष्य, राहुल, शुभम राजपूत, रितिका आनंद, विक्रम कुमार, मोहित आनंद, एचएस बहल, कनिका कुमारी, लवली, नवदीप कुमार, रिया कुमारी शामिल रहीं।

कारपोरेट कंपनियों को 25 % टैक्स, छोटी को 30


ट्रेनों में सीसीटीवी लगाने का फैसला सराहनीय


मध्यम व्यापारी वर्ग को किया अनदेखा


इंडस्ट्री और कारोबारियों में निराशा - बजट को रूटीन बताया

विशेषज्ञों ने बजट पर चर्चा की। -भास्कर

टैक्सेशन कंसलटेंट्स फोरम ने कहा-

करदाताओं के लिए लाभप्रद नहीं

बजट के दौरान सिटी की टेक्सेशन कंसलटेंट्स फोरम ने भी चर्चा की। इसमें टैक्सेशन माहिरों ने कहा कि ये बजट करदाताओं व एमएसएमई सेक्टर के लिए लाभप्रद नहीं है। अब ये नियम बना दिया है कि चाहे किसी कंपनी की आमदनी जीरो ही रहे, उसने आईटीआर नहीं भरी तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। कारपोरेट कंपनियों को अढ़ाई सौ करोड़ की टर्नओवर तक 25 परसेंट इनकम टैक्स लगेगा जबकि साधारण फैक्ट्री वाले 10 लाख पर 30 परसेंट टैक्स देंगे। फोरम की मीटिंग में प्रेसिडेंट प्रियंका वर्मा, जनरल सेक्रेटरी पुनीत ओबराय, दीपक कुमार, संदीप विज, अनिल मिगलानी, विवेक परती, साहिल गुप्ता, नरिंदर विज, अश्वनी गुप्ता, अनिल मिगलानी,बलविंदर टंडन, सुनील महाजन शामिल रहे।

कारपोरेट को फायदा


आम रूटीन वाला बजट है


कपड़ा व्यापारी को नहीं राहत


नाम का ही बजट था


बजट से पाइप फिटिंग इंडस्ट्री दम तोड़ेगी


इलेक्ट्राॅनिक प्रोडक्ट महंगे किए


स्माल स्केल इंडस्ट्री को निराश किया


इंडस्ट्री को सीधी राहत नहीं मिली, जिससे ज्यादातर बड़े कारोबारियों ने कहा- ऐसे बजट का कोई फायदा नहीं

महंगे डीजल से सभी प्रोडक्ट महंगे


बड़ी इंडस्ट्री को फायदा छोटी का नुकसान


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