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जीएसटी रिफंड जल्दी से देने के बारे में बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ नहीं कहा

सीए ने बजट लाइव देखा। - भास्कर जालंधर | बजट को लेकर इंडस्ट्री को तीन बातें पसंद नहीं आईं। पहला - इनकम टैक्स की स्लैब...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:15 AM IST

सीए ने बजट लाइव देखा। - भास्कर

जालंधर | बजट को लेकर इंडस्ट्री को तीन बातें पसंद नहीं आईं। पहला - इनकम टैक्स की स्लैब में कोई छूट नहीं दी। दूसरा - जीएसटी रिफंड अटके हैं, इसे जारी करने को लेकर बात तक नहीं की। तीसरा - एमएसएमई सेक्टर के लिए फंड्स तो रखने की बात की है लेकिन एक्सपोर्ट व लोकल मेन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए कोई इंसेटिव या पैकेज की घोषणा नहीं हुई है। खेतीबाड़ी सेक्टर, इंपलायमेंट और हैल्थ-एजूकेशन के प्रावधानों को अच्छा कदम भी बताया है।

कोई क्रांतिकारी बजट नहीं

यूनीक पाइप फिटिंग के विनोद घई ने कहा कि ये क्रांतिकारी बजट नहीं है, जैसी उम्मीद जीएसटी से कमाई बढ़ने के बाद की जा रही थी। नोटबंदी के बाद लोगों ने बैंकों में पैसा जमा कराया, फिर जीएसटी भी आया। नई टैक्स दरों से चीजों के रेट भी बढ़े। इस लिहाज से आम आदमी को इनकम टैक्स की स्लैब से राहत देनी चाहिए थी। कारपोरेट कंपनियों के लिए इनकम टैक्स में अढ़ाई सौ करोड़ के कारोबार पर 5 परसेंट की छूट दी गई है जबकि एमएसएमई 10 लाख पर 30 परसेंट आईटी देगी।

बजट का होना न होना एक बराबर

जेएमपी इंडस्ट्री के संचालक बलराम कपूर ने कहा कि इस बजट का होना या ना होना, एक बराबर है। बजट में स्मार्ट सिटी का जिक्र है। किसानों के लिए एमएसपी बढ़ाने और 1200 करोड़ से बांस की खेती कराने का जिक्र है। रोजगार देने का भी जिक्र, लेकिन ये नहीं बताया है कि 7 करोड़ एमएसएमई सेक्टर की फैक्ट्रियों की जीएसटी रिफंड ना मिलने से पैदा मंदी कैसे दूर करेंगे। एमएसएमई के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही है लेकिन कैसे?

मुद्रा में गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को एक्सपोजर अच्छा

पंजाब हरियाणा फाइनेंस कंपनीज एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी आलोक सोंधी ने कहा कि सरकार गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मुद्रा योजना में उत्साहित करेगी। लेकिन हमने उम्मीद रखी थी सरकार गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को नान परफार्मिंग एसेट्स की रिकवरी में बैंकों की तरह अधिकार देगी, ये पूरी नहीं हुई है। लेकिन सरकार जो घाटे को रोकने के लिए बजट में प्रावधान किए हैं, इन्हें लेकर एक बड़ा चैलेंज भी है।

अर्थव्यवस्था के हिसाब से जटिल बजट, धीरे-धीरे रिजल्ट आएंगे

कौंसिल आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जालंधर ब्रांच के पूर्व चेयरमैन सीए अश्वनी जिंदल ने कहा कि बजट में 3 घोषणाएं आम आदमी से जुड़ी हैं। पहला - 10 करोड़ परिवारों के लिए हेल्थ बीमा। दूसरा - 24 मेडिकल कालेज बनेंगे। तीसरा - ग्रामीण विकास पर जोर दिया है। इसके अलावा सरकार ने जीएसटी से खूब कमाई की बात कही है लेकिन फंड्स की एलोकेशन पैकेज सिस्टम के तहत नहीं की है।

छोटी इंडस्ट्री को नोटबंदी के नुकसान से राहत नहीं, खेती सेक्टर पर फोकस सराहनीय कदम

रोजगार बढ़ाने के प्रयासों पर सीए स्टूडेंट्स बोले -

इंप्लायमेंट पर फोकस पसंद

ग्रीन माडल टाउन में कुमार अश्विनी एसोसिएट्स के आॅफिस में सीए कर रहे स्टूडेंट्स ने बजट लाइव किया। बजट में युवाओं को ये बात पसंद आई है कि सरकार ने इंपलायमेंट पर जोर दिया है। बजट में सरकार ने इंटर्नशिप योजना लांच की है। इसके तहत जो ट्रेनी मुलाजिम कंपनियों में जमा होंगे, उन्हें आधा पैसा सरकार देगी। इस दौरान डाॅ. अश्विनी कुमार गुप्ता ने कहा कि इस बजट में सरकार ने रोजगार, ग्रामीण विकास और खेती सेक्टर-कारपोरेट सेक्टर पर जोर किया है। इस सेशन में निरपेश गुप्ता, साहिल गुप्ता, सेहज, शुभम, अक्ष्य, राहुल, शुभम राजपूत, रितिका आनंद, विक्रम कुमार, मोहित आनंद, एचएस बहल, कनिका कुमारी, लवली, नवदीप कुमार, रिया कुमारी शामिल रहीं।

कारपोरेट कंपनियों को 25 % टैक्स, छोटी को 30

पंजाब की इंडस्ट्री फेसिलिटेशन कौंसिल के मैंबर राजन गुप्ता ने कहा कि छोटी इंडस्ट्री को सालाना 10 लाख की कमाई पर 30 परसेंट इनकम टैक्स लगेगा। जबकि जो कंपनी 250 करोड़ का कारोबार करती है, उसे 25 परसेंट टैक्स लगेगा। मैं सरकार के प्रावधान से हैरान हूं। आम आदमी महंगाई झेल रहा है। उसे टैक्स में कोई छूट नहीं दी है। ये पूरी तरह से गलत है। सरकार ने ग्रामीण व खेती सेक्टर पर ही जोर दिया। छोटी इंडस्ट्री को भूल गई है।

ट्रेनों में सीसीटीवी लगाने का फैसला सराहनीय

काम के सिलसिले में हर दूसरे-तीसरे दिन ट्रेन में सफर करना पड़ता है। ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए वाईफाई और सुरक्षा के मद्देनजर सभी ट्रेनों में सीसीटीवी लगाने का फैसला सराहनीय है। अभी तक 395 स्टेशन और महज 50 ट्रेनों में ही सीसीटीवी लगे हैं। देश में लगभग 2.3 करोड़ यात्री रोजाना सफर करते हैं। -जसप्रीत सिंह राणा यात्री

मध्यम व्यापारी वर्ग को किया अनदेखा

मध्यम वर्ग और व्यापारी वर्ग को इस बजट में अनदेखा कर दिया गया है। जबकि व्यापारी वर्ग द्वारा अदा किए गए टैक्स से ही सरकार चलती है। ये गलते है। इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। - महेश गुप्ता उद्योगपति

इंडस्ट्री और कारोबारियों में निराशा - बजट को रूटीन बताया

विशेषज्ञों ने बजट पर चर्चा की। -भास्कर

टैक्सेशन कंसलटेंट्स फोरम ने कहा-

करदाताओं के लिए लाभप्रद नहीं

बजट के दौरान सिटी की टेक्सेशन कंसलटेंट्स फोरम ने भी चर्चा की। इसमें टैक्सेशन माहिरों ने कहा कि ये बजट करदाताओं व एमएसएमई सेक्टर के लिए लाभप्रद नहीं है। अब ये नियम बना दिया है कि चाहे किसी कंपनी की आमदनी जीरो ही रहे, उसने आईटीआर नहीं भरी तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। कारपोरेट कंपनियों को अढ़ाई सौ करोड़ की टर्नओवर तक 25 परसेंट इनकम टैक्स लगेगा जबकि साधारण फैक्ट्री वाले 10 लाख पर 30 परसेंट टैक्स देंगे। फोरम की मीटिंग में प्रेसिडेंट प्रियंका वर्मा, जनरल सेक्रेटरी पुनीत ओबराय, दीपक कुमार, संदीप विज, अनिल मिगलानी, विवेक परती, साहिल गुप्ता, नरिंदर विज, अश्वनी गुप्ता, अनिल मिगलानी,बलविंदर टंडन, सुनील महाजन शामिल रहे।

कारपोरेट को फायदा

जालंधर इलेक्ट्रिकल मर्चेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान भरत काकडिय़ा ने कहा कि भाजपा कारपोरेट हाउसिग को फायदा दे रही है। इस बजट से हर व्यापारी को काफी उम्मीदें थी। जो अब खतम हो गई हैं।

आम रूटीन वाला बजट है

होलसेल शूगर डीलर एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह ने कहा कि आम रूटीन वाला बजट है। कोई खास तीर नहीं मारा है। जीएसटी और नोट बंदी के बाद उम्मीदें तो कुछ ओर ही थी। आम जरूरत वाले मोबाइल महंगे कर दिए हैं।

कपड़ा व्यापारी को नहीं राहत

होलसेल जर्नल मर्चेंट वेलफेयर एसो. के प्रधान सुखविंदर सिंह बग्गा ने कहा बीजेपी ने शहरी लोगो के लिए कुछ खास नहीं है। यां तो बड़े उद्योगपतियों के लिए यां फिर बहुत गरीब लोगो के लिए ये बजट अच्छा रहा। कपड़ा व्यापारियों को किसी भी तरह की राहत नहीं दी गई।

नाम का ही बजट था

सराफा बाजार के प्रधान हरजीत सिंह ने कहा कि नाम का ही बजट था। गोल्ड कारोबारियों को पहले भी यही कहा गया था कि सोना ले जाने के लिए कोई सरल पॉलिसी तैयार की जाएगी। आज भी यही कहा है। लेकिन ये पॉलिसी कब आएगी ये नहीं बताया।

बजट से पाइप फिटिंग इंडस्ट्री दम तोड़ेगी

सरकारी नीतियों से पाइप फिटिंग के 100 से भी कम यूनिट बचे हैं। 300 से ज्यादा यूनिट बंद हो चुके हैं। जीएसटी से इस साल कई और यूनिट बंद होंगे। इनकम टैक्स पर एक % सैस और बढ़ा दिया है। छोटी इंडस्ट्री बर्बादी के कगार पर है। -सतीश, पाइप फिटिंग मेन्यूफेक्चरर्स

इलेक्ट्राॅनिक प्रोडक्ट महंगे किए

आम बजट में इलेक्ट्राॅनिक प्रोडक्ट्स पर कस्टम डयूटी बढ़ा देने से सामान महंगा होगा। आम आदमी राहत की उम्मीद कर रहा था। भाजपा सरकार कारोबार को लेकर पहले ही उदासीन रही है। इनकम टैक्स स्लैब भी नहीं बढ़ाई गई। - बलजीत सिंह, प्रधान, इलेक्ट्राॅनिक वेलफेयर सो.

स्माल स्केल इंडस्ट्री को निराश किया

स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर की जरूरत थी। 1600 करोड़ से ज्यादा का कारोबार है। करीब एक लाख लोगों का रोजगार है। अभी भी सरकार को चिंता नहीं है। विदेशी माल मंगाने पर एंटी डंपिंग डयूटी लगाई जानी चाहिए थी। -रविंदर धीर, प्रधान व्यापार सेना

इंडस्ट्री को सीधी राहत नहीं मिली, जिससे ज्यादातर बड़े कारोबारियों ने कहा- ऐसे बजट का कोई फायदा नहीं

महंगे डीजल से सभी प्रोडक्ट महंगे

डीजल का रेट कम होना चाहिए था। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट महंगी है। इससे सभी प्रोडक्ट महंगे हो रहे हैं। पेट्रोल और डीजल को सरकार जीएसटी के दायरे में लाए। इनकम टैक्स पर भी छूट नहीं मिली। सभी वर्ग बजट से निराश हैं। - अमित, प्रधान, जालंधर इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन

बड़ी इंडस्ट्री को फायदा छोटी का नुकसान

स्माल स्केल इंडस्ट्री को कुछ नहीं मिला। बड़ी इंडस्ट्री को इनकम टैक्स में जो छूट 50 करोड़ तक की सेल पर थी वही अब 250 करोड़ कर दी है। इससे जो फायदा मिलेगा वह छोटी इंडस्ट्री को नुकसान पर ही खर्च करेंगे। -नरिंदर सिंह, प्रधान, फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन एसो.

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