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जल चुकी चीजों और मिट्टी में दबे चाकू से भी डेवलप किए जा सकते हैं फिंगर प्रिंट्स, जांच में इग्नोर न करे पुलिस: डॉ. सोढी

केएमवी दि हेरिटेज, ऑटोनोमस कॉलेज में मौका था 8वें साइंस इंस्पायर कैंप के तीसरे दिन का। तीसरे दिन डिटेक्टिंग फिंगर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:15 AM IST

केएमवी दि हेरिटेज, ऑटोनोमस कॉलेज में मौका था 8वें साइंस इंस्पायर कैंप के तीसरे दिन का। तीसरे दिन डिटेक्टिंग फिंगर प्रिंट्स ऑन क्राइम सीन एविडेंस विषय पर बात हुई।

दरअसल खालसा कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली से डॉ. जीएस सोढी केएमवी पहुंचे। वे फिंगर प्रिंटिंग एविडेंस के एक्सपर्ट हैं। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि किस तरह क्राइम सीन से फिंगर प्रिंट इक्ट्ठा किए जाते हैं। बकौल डॉ. सोढी पिछले सालों में बहुत सारे नए मैथड डेवलप किए गए हैं कि जो की पुलिस को पता नहीं है, यह कह सकते हैं कि बदकिस्मती है कि हमारे पास पुलिस में साइंस बैकग्राउंड वाले लोग बहुत कम है। जैसे कि पिछले सालों में फिंगर प्रिंटिंग के ऐसे मैथड डेवलप हुए, कि अगर कहीं आग लगाई गई है, बड़ी चीजें जली हैं उसपर अगर फायर ब्रिगेड वालों ने पानी डाला, तब भी संभावना है कि एक्सपर्ट वहां से फिंगर प्रिंट्स डेवलप कर सकते हैं।

साधारण दिखने वाली चीजें भी हो सकती हैं अहम

डॉ. सोढी ने बताया कि सबसे पहले पुलिस और क्राइम सीन के आसपास वाले लोग समझें कि क्राइम सीन में ज्यादा लोगों का न आने दें। जैसा कि आरुषि केस में हुआ। फिंगर प्रिंट्स मिले ही नहीं। दूसरा, एंट्री और एक्जिट पॉइंट्स पर फिंगर प्रिंट्स मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है, तो उसे इग्नोर न करें। दोनों पॉइंट की दीवारों पर फिंगर प्रिंट्स जरूर लें, तीसरे ज्यादातर केसों में दो या तीन जगह से फिंगर प्रिंट्स लेकर जिम्मेदारी खत्म कर दी जाती है। होना यह चाहिए क्राइम सीन पर ज्यादा से ज्यादा फिंगर प्रिंट्स ले लिए जाएं, क्योंकि यह समझना जरूरी है कि क्राइम सीन पर मिले सारे फिंगर प्रिंट्स डेवलप नहीं होते हैं। ऐसे में नंबर ऑफ फिंगर प्रिंट्स जरूर होने चाहिए। ऐसे ही अगर क्राइम सीन में अलमारी खोली गई है तो साथ वाली दीवारों को इग्नोर न करें, वहां से भी फिंगर प्रिंट्स लेने जरूर चाहिए।

स्टूडेंट्स ने जानकारों से सीखी केमिस्ट्री विद फन

दूसरे वक्ता डॉ. एनसी कोठियाल थे, जो कि डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री एनआईटी जालंधर से थे। उन्होंने स्टूडेंट्स लीथल कॉनडिमैंट्स के बारे में बताया। बताया कि कैसे मिलावटी खाद्य पदार्थ शरीर पर प्रभाव डालते हैं। आखिरी सेशन में डॉ. बीएस कैंथ जो कि एनआईटी जालंधर से थे। उन्होंने स्मार्ट मेटीरियल्स विद डिफेंस एप्लीकेशंस के बारे में बताया।

धोए हुए चाकू से भी मिल सकते हैं फिंगर प्रिंट

वहीं जैसे अगर किसी ने किसी को चाकू से मारा और चाकू को मिट्टी में दबा दिया तो इस चीज का ध्यान रखा जाना चाहिए कि अगर चाकू मिलता है तो उसे इग्नोर न करें, क्योंकि ऐसी भी तकनीक डेवलप हो गई है, जो मिट्टी से भरे चाकू के बाद उसे हल्के पानी से धोकर वहां भी फिंगर प्रिंट डेवलप कर सकती है। क्राइम सीन पर सबसे पहले पुलिस ही पहुंचती है तो फिंगर प्रिंट्स को बचाने का काम भी पुलिस का होता है। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी साधारण सी दिखने वाली जगहों पर फिंगर प्रिंट लेना न चूके। दूसरा हम खालसा कॉलेज में पुलिस वालों को ट्रेनिंग देते हैं, नेशनल और इंटरनेशनल दोनों स्तर पर। हाल ही में अफ्रीकन पुलिसवालों की भी ट्रेनिंग दी गई है। मुझे लगता है कि हमारे यहां पुलिस विभाग को भी ट्रेनिंग लेने के लिए आगे आना चाहिए क्योंकि देखिए, कागज, ग्लास, लोहे, दीवारें हर जगह पर फिंगर प्रिंट्स लेने के अलग तरीके हैं तो केसिस में बहुत मदद पुलिसवालों की मिल सकती है।

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