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BE स्टूडेंट गरीब बच्चों को पढ़ा रहे, स्कूल फीस भी भर रहे, दो JEE क्रैक कर चुके

डॉ. बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के 100 छात्र चला रहे 2 सेंटर, कंपीटिटिव एग्जाम्स की तैयारी भी करवा रहे।

bhaskar news | Last Modified - Nov 06, 2017, 04:46 AM IST

  • BE स्टूडेंट गरीब बच्चों को पढ़ा रहे, स्कूल फीस भी भर रहे, दो JEE क्रैक कर चुके
    जालंधर.डॉ. बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे करीब 100 स्टूडेंट्स की कोशिश दूसरों को भी कुछ करने की एनर्जी दे रही है। मजदूरों व झुग्गी में रहने वालों को पढ़ाने वाले सोशल एक्टीविस्ट तो बहुत हैं लेकिन यहां के स्टूडेंट्स की कहानी इनसे जुदा है।

    इस कैंपस में जब नए क्लास रूम्स और होस्टल बन रहे थे तो मजदूरों के बच्चे सारा दिन कैंपस में घूमते थे और बुरी आदत ये बन गई कि स्टूडेंट्स से खाने-पीने की चीजें व पैसे मांगने लगे। स्टूडेंट्स ने फैसला किया कि इन बच्चों की ऐसी ट्रेनिंग की जाए कि इनमें स्कूल जाने की ललक पैदा हो जाए। जो बच्चे स्कूल के लिए तैयार हुए, उनकी फीस स्टूडेंट्स ने भरी। जिसकी इंजीनियरिंग यहां पूरी हो गई है, उसने एक बच्चा गोद ले रखा है, फीस देने के लिए। डीन बीएस बैंस से लेकर तमाम फैकल्टी स्टूडेंट्स के प्रयास नामक प्रोजेक्ट में मदद कर रही है। यही नहीं दो बच्चे तो जेईई (मेन्स) परीक्षा क्रैक कर चुके हैं।

    इंजीनियरिंग के ये स्टूडेंट्स 2 सेंटर चला रहे हैं। पहला सेंटर मकसूदां में चल रहा है। इसमें उन बच्चों को पढ़ाया जाता है, जो स्कूल गोइंग हों। उन्हें कंपीटिटिव एग्जाम्स की तैयारी करवाते हैं। कोई ट्यूशन सेंटर के लिहाज से यहां पढ़ने आता है। दूसरा सेंटर छोटे बच्चों के लिए है, जो एनआईटी कैंपस के लॉन में चलाया जाता है।

    इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कर रहे सतीश चंद ने कहा, ‘पहले मेरे सीनियर्स बच्चों को पढ़ाते थे। वो चले गए तो मैं जुड़ गया। मेरे बाद नए स्टूडेंट्स आएंगे। इसी तरह सिलसिला चलता रहेगा।’ उनके साथी पवन कुमार कहते हैं, ‘मैं यहा कंप्यूटर इंजीनियरिंग कर रहा हूं। प्रोजेक्ट से करीब 100 युवा जुड़े हैं। रोजाना दोनों सेंटर में 30-30 लोग पढ़ाने जाते हैं। एनआईटी से ऑटो करके युवा मकसूदां सेंटर जाकर पढ़ाते हैं, सारा खर्च टीचर्स, एल्युमनाई व स्टूडेंट्स से ही आता है।’ तीसरे साथी मोती लाल कहते हैं, ‘हमारा मकसद बच्चों व पेरेंट्स में कॉन्फिडेंस जगाना है।’
    नतीजे रहे पॉजीटिव
    1. झुग्गियों में रहने वाले दर्जन-भर बच्चे रेगुलर स्कूल पहुंचे। स्कूली बच्चों के लिए चलाए जा रहे ट्यूशन सेंटर में बच्चों के नंबर 80 परसेंट से ऊपर। इनमें 2 ने जेईई (मेन्स) परीक्षा क्रैक की।
    2. झुग्गियों में जाकर बच्चों को मौरल एजूकेशन दी गई। पूरा हफ्ता पढ़ाते हैं। मंच पर आकर बच्चे टैलेंट दिखाते हैं। जिससे उनमें स्कूल जाने का कॉन्फिडेंस जागता है। पेरेंट्स को तैयार किया कि बच्चों को स्कूल भेजें।
    3. एक बच्चे अखिलेश को गंभीर बीमारी हो गई। पेट में पानी भर गया। नाड़ियां ब्लॉक हो रही थीं। स्टूडेंट्स ने उसका पीजीआई लेजाकर ऑपरेशन कराया। पैसे भी खुद दिए। स्टूडेंट्स से चीजें मांगने वाले बच्चों को निकिता और रोबिन ने गंभीरता से लिया और अन्य स्टूडेंट्स से बात की। टीचर्स का साथ मिला। रोजाना मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने लगे। इन दिनों कंस्ट्रक्शन कम है लेकिन आसपास के गांवों से बच्चे आने लगे हैं।
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