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जेल में बंद गैंगस्टर ने ली थी कांग्रेसी नेता के कत्ल की 50 लाख में सुपारी, 4 अरेस्ट

गैंगस्टर सुक्खा काहलवां के मर्डर के मुख्यारोपी सोनू बाबा के सुपारी किलिंग गैंग को पुलिस ने ब्रेक कर 4 आरोपी पकड़े है।

bhaskar news | Last Modified - Nov 07, 2017, 04:19 AM IST

जेल में बंद गैंगस्टर ने ली थी कांग्रेसी नेता के कत्ल की 50 लाख में सुपारी, 4 अरेस्ट
जालंधर.मॉडर्न जेल में बंद गैंगस्टर सुक्खा काहलवां के मर्डर के मुख्यारोपी सोनू बाबा के सुपारी किलिंग गैंग को पुलिस ने ब्रेक कर 4 आरोपी पकड़े है। गैंग ने मोगा के गांव सोसन के 60 साल के ब्लाक कांग्रेस कमेटी प्रधान व पूर्व सरपंच हरभजन सिंह के मर्डर की 50 लाख में सुपारी ली थी। सुपारी हॉलैंड में बैठे हरभजन सिंह के दुश्मन बलजिंदर सिंह बंटी ने दी थी। गैंग तीन बार रैकी कर चुका था। वारदात करने से पहले पकड़े गए।

पुलिस नंगल सलेमपुर के रंजीत सिंह उर्फ राणा, सोनू बाबा के मझले भाई गांव लिदड़ा के नरिंदरजीत काली, तरनतारन के गांव रायके के सुखविंदर सिंह सुक्खा (वर्तमान नंगल सलेमपुर) और बटाला के गांव मसाईयां के अवतार सिंह से पूछताछ कर रही है। इनसे रिवाल्वर, एयर पिस्टल और गन बरामद की है। पुलिस जेल में बंद सोनू बाबा और कृष्णा को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ करेगी। केस में पुलिस अमृतसर के शेरा और कबूलपुर के लाडा की तलाश में रेड कर रही है। अवतार और रंजीत को देख कर हरभजन बोले यह लोग तो उनके घर आए थे। किसी संस्था के कार्यकर्ता बनकर आए थे।
फर्जी नंबर की कार में घूम रहे थे, असलहा भी बरामद
डीसीपी (इन्वेस्टिगेशन) गुरमीत सिंह ने बताया, सूचना मिली थी कि गैंग ने मोगा के सरपंच हरभजन सिंह व ऋषिकेश के गगनदीप सिंह का मर्डर करना है। गैंग ने दोनों सुपारी 50-50 लाख में ली थी। डीसीपी ने कहा-एसीपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों, एसीपी सतिंदर चड्डा, स्पेशल ऑपरेशन यूनिट के इंचार्ज बिमल कांत की टीम ने चार आरोपी पकड़े हंै। इन लोगों ने आल्टो कार पर फर्जी नंबर लगा रखा था। डीसीपी ने कहा, पुलिस जांच के लिए गगनदीप के घर गई, मगर उनकी फैमिली ने कहा कि पहले गगन हॉलैंड में था और अब आॅस्ट्रिया में है। कुछ महीने पहले कुछ लोग आए थे, मगर बेटा जा चुका था। डीसीपी ने कहा, गगन के घर शेरा, लाडी, सुक्खा और रंजीत रेकी करने गए थे। पुलिस गगन से बात करने की कोशिश कर रही है।
‘चाचा की टांग तोड़ने पर दादा ने दी थी गवाही, 35 साल से चल रही है रंजिश’
हरभजन सिंह ने फोन पर कहा, ये दुश्मनी 35 साल पुरानी है। 1982 में पिता स्वर्ण सिंह गांव के सरपंच थे। गांव के ही नछत्तर सिंह और विक्कर सिंह ने साथियों संग मिल चाचा धर्मा सिंह की टांग तोड़ दी थी। दादा ने चाचा को बचाया था। केस दर्ज हुआ। दादा पर दबाव बनाया गया कि वह राजीनामा करवा दे। दादा नहीं माने और कोर्ट में गवाही दी तो दूसरे पक्ष को तीन साल कैद हो गई। हरभजन ने कहा, 1992 में वह सरपंच बना था। 24 अगस्त 2001 को नछत्तर, उसके बेटे बंटी ने साथियों के साथ हमला कर दिया। बंटी तब 19 साल का था। केस दर्ज हो गया। बंटी हॉलैंड चला गया और उसके पिता नछत्तर और चाचा पकड़े गए। केस चल रहा था कि 2003 में नछत्तर का मर्डर हो गया। हरभजन कहते हैं, मर्डर में कोई हाथ नहीं होने पर भी करीब तीन साल जेल में रहा। कोर्ट ने बरी कर दिया। जेल से आने के बाद उसने लोगों से सुना था कि उनकी सुपारी दी गई है। डीएसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों उनसे आकर मिले, तब पता चला कि भाड़े के हत्यारे उसके कत्ल की सुपारी ले चुके हंै
बाबा के भाई टीटू ने कराई डील, अवतार बोला- लालच में गैंग में शामिल हुआ
डीसीपी ने कहा, रंजीत सास के खून में सात साल जेल में रहा। यहां उसकी दोस्ती सोनू बाबा से हो गई थी। रंजीत बेल पर आया हुआ है। बाबा का बड़ा भाई गुरविंदर सिंह टीटू हॉलैंड में है। यहां पर बलजिंदर बंटी ने हरभजन की सुपारी दी थी। सोनू से टीटू ने बात की तो उसने गैंग बना लिया। सोनू ने मझले भाई नरिंदरजीत काली से बात की। इसलिए हॉलैंड से टीटू काली के पास पैसे भेजते था और वह गैंग को फंडिंग करता था। अब तक पांच लाख आने की बात सामने आ रही है। हरभजन और गगन के खून के बाद पैसा काली के पास आना था और उसने ही गैंग को उनका हिस्सा देना था। हॉलैंड में बैठा टीटू सुपारी के पैसे ले चुका है। अवतार ने माना है कि रंजीत उसका परिचित है। वह उनकी गैंग में इस लिए शामिल हो गया कि उसे 10 लाख देने की बात कहीं थी। लाइसेंसी हथियार आसानी से लेकर जा सकते हैं और भजन के खून में इस्तेमाल करना था।
8 अगस्त को साथी कृष्णा न पकड़ा जाता तो वारदात कर देनी थी गैंग ने
आरोपी मानते हैं, 8 अगस्त को तीसरी बार वह हरभजन के घर गए थे, तब भी मौका नहीं मिला कि हरभजन को गोली मार सके। इस दौरान उनका साथी कृष्णा ट्रांसपोर्ट नगर में ठेके लूटने के केस में पकड़ा गया। गैंग डर गई थी कि कृष्णा राज न खोल दे। इसलिए गैंग शांत बैठ गई थी। अब नए सिरे से हरभजन के खून की साजिश को अंजाम देना था।
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