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हादसे में SI के बेटे और भतीजे की मौत, भाई की मंगनी पर न्यूजीलैंड से आई थी बहन

गाय टकराने से पीएपी के इंस्पेक्टर तेजिंदर सिंह के 24 साल के इकलौते बेटे हरसिमरन सिंह और भतीजे 17 साल के साहिल की मौत हो

bhaskar news | Last Modified - Nov 14, 2017, 06:10 AM IST

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    जालंधर.नेशनल हाईवे पर वेरका मिल्क प्लांट के पास सोमवार रात आठ बजे बाइक से लावारिस गाय टकराने से पीएपी के इंस्पेक्टर तेजिंदर सिंह के 24 साल के इकलौते बेटे हरसिमरन सिंह और भतीजे 17 साल के साहिल की मौत हो गई। एक्सीडेंट के बाद दोनों को सिविल अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत लाया घोषित कर दिया। साहिल के पिता रुपिंदर सिंह भी एएसआई हैं इस वक्त थाना डिवीजन नंबर-6 के मुंशी हैं। हरसिमरन की इतवार को सगाई हुई थी। दोनों की मौत से गांव विधिपुर में शोक व्याप्त की लहर दौड़ गई।

    विधिपुर के रहने वाले हरसिमरन सिंह अपने चचेरे भाई साहिल के साथ सिटी से गांव विधिपुर लौट रहे थे। चश्मदीदों ने बताया कि वेरका मिल्क प्लांट के पास फ्लाईओवर पर से बाइक उतर रही थी। इसीबीच एक गाय बाइक के आगे आ गई। गाय पहले अमृतसर से जालंधर आ रही कार से टकराने लगी जिसके बाद बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार दोनों युवक हवा में उछलते हुए सिर के बल जमीन पर गिरे। दोनों ने हेलमेट नहीं पहना था।
    हरसिमरन की इतवार को हुई थी मंगनी
    मॉर्चरी के पास हरसिमरन और साहिल की लाशें स्ट्रेचर पर पड़ी थीं। कार से उतरी युवती सिमरण की लाश से लिपटकर बोली, कल तक तां केहंदा सी उम्रभर निभावांगा, आज्ज ही मैनूं छड्ड गया। डैडी देखो मंगनी विच भंगड़ा पाउन वाला आज्ज चुपचाप लेटया होया। युवती फूट-फूटकर बिलखने लगी।
    भाई की मंगनी पर न्यूजीलैंड से आई थी बहन
    थाना 6 के मुंशी रुपिंदर सिंह के दो बेटे हैं हैप्पी और साहिल। हैप्पी एक महीने पहले ही कैनेडा गया था। बेटी भाई की मंगनी पर न्यूजीलैंड से आई थी। बेटे की लाश को सबसे पहले देखने वाले रुपिंदर ने कहा, मैनूं साहिल दे फोन तों कॉल आई। फोन करन वाले ने केहा, तुसीं साहिल दे पापा बोल रहे हो? मैं केहा, हांजी। ओहना केहा, तुसीं हुणे हॉस्पिटल आ जाओ। रुपिंदर ने कहा मैं तेनूं कदे वी पढ़ाई तो नईं रोकया। तेरी हर रीझ पुगाई। इसी बीच रुपिंदर को उनके बेटे हैप्पी का फोन आया। रुपिंदर हैप्पी को सिर्फ इतना कहा, तेरे वीर नूं सट्टां लगियां। तू आ जा। हैप्पी ने जवाब दिया, पापा तुसी ओहदी हर गल मनो, मैं आ रेहां।
    हेलमेट पहना होता तो बच सकती थी जान
    इमरजेंसी के डॉक्टर सुरिंदर पाल सिंह ने कहा कि सिर पर गहरी चोट के कारण इमरजेंसी वार्ड लाए जाने से पहले ही दोनों दम तोड़ चुके थे। काश युवाओं ने हेलमेट पहना होता। सिर पर गंभीर चोट न लगती तो दोनों की जान बच सकती थी। हादसे के वक्त दोनों की सांसें चल चल रही थीं। लोगों ने 108 नंबर पर कॉल कर एबुलेंस बुलाई। एबुलेंस के ड्राइवर रुपिंदर सिंह ने बताया कि अस्पताल लाते वक्त दोनों युवाओं ने दम तोड़ दिया था।
    डेढ़ करोड रुपये काऊ सैस लेकर भी लावारिस पशु नहीं संभालता नगर निगम
    शहर के बीच और हाइवे पर कभी गाड़ी के सामने कोई मवेशी आ जाए पता नहीं चलता। काऊ सैस के करीब दो करोड़ रुपये नगर निगम ले तो रहा है मगर गायों के लिए कुछ कर नहीं रहे। अगर नगर निगम ने कुछ किया होता तो आज शायद ये हादसा न होता।
    आईपीसी के सेक्शन 268, 269, 270 का उल्लंघन
    इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 268, 269, 270 के अनुसार निगम लापरवाही से नागरिकों की जान जोखिम में डालने पर सजा का हकदार है। संबंधित अफसरों पर केस दर्ज हो सकता है। निगम की ड्यूटी है कि वो आवारा जानवरों का खतरा सड़कों पर खत्म करे। आवारा कुत्ते और जानवर सड़कों पर घूम रहे हैं। डीसी धारा 144 के तहत आवारा जानवरों को शहरों में छोड़ने वालों पर कार्रवाई के नोटिस जारी करते हैं लेकिन कभी एक्शन नहीं लेते।
    -मनिंदर सिंह सचदेवा, एडवोकेट
    हाईकोर्ट में एफिडेविट
    सूबा सरकार ने हाईकोर्ट में नया ड्रॉफ्ट पेश किया था। सड़कों पर पशु के हमले पर पीड़ित मुआवजे का हकदार है। डॉग, सांड, भैंस, गाय का बच्चा और घोड़ा इस कैटेगरी में है। पशु के हमले में मौत पर 1 लाख रुपये मुआवजे का प्रस्ताव है। डिसएबल हाेने पर कंडिशन मुताबिक मुआवजा तय किया जाएगा।
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