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लंगाह गए जेल, खास सिपाहिया गुज्जर के खिलाफ री-ओपन हुआ 2008 का मुनीष हत्याकांड

माता-पिता ने ठान रखा है कि जब तक असली हत्यारे को उसके किए की सजा नहीं मिलती, वे चुप नहीं बैठेंगे।

Dainik Bhaskar

Nov 15, 2017, 06:03 AM IST
Munish murder case of 2008 re-opened against sepahiya gujjar
गुरदासपुर. अपने 7 वर्षीय बेटे के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए पीड़ित माता-पिता पिछले 9 सालों से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन उन्हें अभी तक इंसाफ नहीं मिला। बच्चे की हत्या के बाद पूरा शहर रोष में गया था जिसे दबाने के लिए अफरा-तफरी में पुलिस ने उस समय अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया था लेकिन पीड़ित माता-पिता ने ठान रखा है कि जब तक असली हत्यारे को उसके किए की सजा नहीं मिलती, वे चुप नहीं बैठेंगे। इसी कारण वह आज भी अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। 2008 में जब मासूम मुनीश की हत्या हुई थी, तब भी वहां के मुहम्मद रफी उर्फ सिपाहिया गुज्जर का नाम सामने आया था लेकिन पुलिस ने उससे कोई पूछताछ नहीं की। अब जब लंगाह को जेल भेज दिया गया है तो यह मामला फिर से रीओपन हो रहा है।
इससे धारीवाल शहर में नहर किनारे बसे सिपाहिया गुज्जर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। लंगाह की छत्रछाया में रहने के चलते अकाली सरकार के समय सिपाहिया का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका तथा ही थाना धारीवाल में उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज हुआ। लंगाह के जेल जाते ही सिपाहिया पर 2 मामले दर्ज हो चुके हैं तथा पुलिस छापामारी कर रही है।
माता-पिता की मांग पर कोर्ट ने किया केस रीओपन
पीड़ितमाता-पिता द्वारा उक्त मामले में सिपाहिया का नाम आने के कारण कुछ दिन पहले एसएसपी गुरदासपुर को मांग पत्र देकर मुनीष हत्याकांड केस रीओपन करने की मांग की थी। एसएसपी द्वारा उक्त मामले में कोर्ट से आदेश मांगे जिस पर कोर्ट ने मामला रीओपन करने का आदेश दे दिया। एसएसपी द्वारा इस मामले की जांच डीएसपी स्पेशल ब्रांच गुरबंस सिंह बैंस को सौंपी है। मुनीष के माता-पिता ने बताया कि थाना धारीवाल पुलिस ने 11-8-2008 को अज्ञात लोगों पर धारा 302 का मामला दर्ज किया था।
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Munish murder case of 2008 re-opened against sepahiya gujjar
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