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स्पाइनल काॅर्ड इंजरी से प्रभावित लोगों ने की एक साथ कसरत, डांस किया, गाए जोशीले गीत

कई एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट कर दूसरों को भी किया मोटिवेट।

bhaskar news | Last Modified - Nov 06, 2017, 04:56 AM IST

  • स्पाइनल काॅर्ड इंजरी से प्रभावित लोगों ने की एक साथ कसरत, डांस किया, गाए जोशीले गीत
    जालंधर.कहावत है उड़ान पंख से नहीं, हौसलों से होती है और मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। कुछ ऐसा ही नजारा दिखा इतवार सुबह मॉडल टाउन मार्केट में। स्पाइनल काॅर्ड इंजरी के कारण जहां कुछ लोग दूसरों पर निर्भर होकर घर की चारदीवारी में ही पूरी जिंदगी गुजार देते हैं वहीं कई ऐसे लोग भी हैं जो अपने सपनों को जिंदा रखकर नए मुकाम हासिल करते हैं।

    मौका था सीटी ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशन द्वारा करवाए गए वीकेंड आॅफ वेलनेस कार्यक्रम का। जालंधर कमिश्नरेट आॅफ पुलिस और माॅडल टाउन शाॅपकीपर्ज एसोसिएशन के सहयोग से करवाए गए कार्यक्रम में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी एसोसिएशन के सदस्य खास तौर पर पहुंचे। इस दौरान इन्होंने एक साथ किया डांस, जोशीले गीत गाए और कई अन्य एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट कर दूसरों को प्रेरित किया।
    हालात बिगड़ने के बावजूद नहीं छोड़ा पढ़ाई का साथ
    प्रतिभा - एलपीयू में जर्नलिज्म और माॅस कम्यूनिकेशन के फर्स्ट इयर की छात्रा प्रतिभा वर्ष 2007 में छत से गिर गई थी। आर्थिक तंगी के कारण लोकल डाॅक्टर से इलाज करवाया। समस्या बढ़ने पर मन में निराशा तो हुई लेकिन जीवन में कुछ करने की तमन्ना से दोबारा पढ़ाई की और अब कॅरियर के प्रति पूरी सजग है। बिहार से यहां पढ़ने के लिए आई हैं।
    पहले खुद उभरे, अब दूसरों को भी कर रहे हैं प्रेरित
    गुरविंदर - लुधियाना के गुरविंदर साल 2012 में सीढ़ियों से गिरने के कारण स्पाइनल इंजरी के शिकार हो गए। घर पर लंबा समय व्यतीत करने के बाद सुनियारे का काम करने वाले गुरविंदर को पहले अपने काम में समस्या आई क्योंकि दुकान पहली मंजिल पर थी। बाद में जीवन में एक नया मोड़ आने से कांउसलिंग का कोर्स किया और आज दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हंै।
    हायर स्टडी कर कुछ कर गुजरने की फिर जगी तमन्ना
    रमन - एमएससी एनिमेशन के पहले इयर के छात्र फिरोजपुर के रमनदीप सिंह 2008 में ट्रक दुर्घटना के कारण इंजरी के शिकार हुए। घर वालों ने लोकल डाॅक्टर व अमृतसर से इलाज करवाया। एलपीयू में हायर स्टडी करना चाहते हैं। रमनदीप का कहना है कि चोटिल होने पर लगा कि दुनिया ही खत्म हो गई। अब मन में नए विचारों के जन्म से कुछ करने की तमन्ना दोबारा जाग उठी है।
    पहले लगा सब खत्म, अब कॅरियर को लेकर सजग
    सुमित - एलपीयू में परफॉर्मिंग आर्ट्स के संगीत वोकल के दूसरे साल के छात्र सुमित 2010 में कार दुर्घटना के बाद से चल-फिर नहीं सकते। मनाली और पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज हुआ। समस्या बढ़ने पर निराश हुए। पढ़ाई दोबारा शुरू की और अब मन में रोशनी की एक नई किरण लेकर अपने कॅरियर के प्रति सजग हंै।
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