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रिसेप्शनिस्ट ने फोन पर नहीं करवाई कैबिनेट मंत्री राणा की डॉक्टर से बात, हुआ ये

अस्पताल प्रबंधन द्वारा माफी मांगने पर दोनों ही मामलों में क्लीनचिट भी मिल गई।

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2017, 06:02 AM IST
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जालंधर. कैबिनेट मंत्री के साथ फोन पर बात नहीं करना एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर को महंगा पड़ गया। अस्पताल पर दो-दो इनक्वॉयरियां बैठा दी गईं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा माफी मांगने पर दोनों ही मामलों में क्लीनचिट भी मिल गई।

मामला 24 नवंबर को महावीर मार्ग स्थित केयर मैक्स अस्पताल से कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह को गई एक काल से जुड़ा है। अस्पताल में दाखिल 75 वर्षीय बिक्कर सिंह के रिश्तेदारों ने राणा गुरजीत को कॉल कर कहा कि हमारा मरीज जिंदा नहीं है। अस्पताल वालों ने मरीज को बेवजह वेंटिलेटर पर रखा है। गुरजीत राणा ने कहा कि मेरी बात डॉक्टर से करवाओ। रिश्तेदारों ने रिसेप्शनिस्ट से कहा कि फोन लाइन पर कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह हैं। आप डॉक्टर साहब से बात करवा दो। इस पर रिसेप्शनिस्ट ने जवाब दिया कि डॉक्टर साहब बिजी हैं। इसके बाद अस्पताल के खिलाफ जांच हुई।

जांच टीम ने रिश्तेदारों को बताया, मरीज जिंदा
मरीज की 24 नवंबर देर रात मौत हो गई। 25 नवंबर को प्रिंसिपल हेल्थ सेक्रेटरी ने फिर से जांच के आदेश दिए। नए मेडिकल बोर्ड में पांच सदस्य थे। चेयरमैन सिविल सर्जन डॉ. आरएस रंधावा, सेक्रेटरी डॉ. एसएस रंधावा, सदस्य अमृतसर मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव अरोड़ा, मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. कश्मीरी लाल और फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राकेश कुमार चोपड़ा। मेडिकल बोर्ड सोमवार को बैठा और उसी दिन रिपोर्ट डीसी को सौंप दी गई।

मल्टी ऑर्गन फेल्योर और सेप्टीसीमिया से हुई मौत | बोर्डने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीनचिट देते हुए किसी भी तरह की लापरवाही से इंकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक मरीज को जब दाखिल कराया गया तो हालत बेहद खराब थी। मरीज को शूगर थी, किडनी फेल्योर, धड़कन 100 से ज्यादा रहती थी, सांस लेने में दिक्कत थी और शरीर में इंफेक्शन फैल चुका था। मरीज को सुपर स्पेशलिस्ट की देखरेख में रखा गया था और इलाज को कोई कोताही नहीं बरती गई।

अस्पताल ने भी बिना किसी शर्त माफी मांगी
अस्पताल के मालिक डॉ. रमन चावला ने अपने माफीनामे में लिखा है कि हमारी रिसेप्शनिस्ट ने गलती की और पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री की कॉल डॉक्टर से कनेक्ट नहीं करवाई। इस मामले में मंत्री को फोन पर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। अस्पताल बिना शर्त एक बार फिर माफी मांगता है।

शुक्रवार रात मौत के बाद फिर बोर्ड बैठाया
मंत्री की कॉल के बाद प्रिंसिपल हेल्थ सेक्रेटरी के कहने पर डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिस ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर भेजी। टीम में सिविल के मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. कश्मीरी लाल, जिला मेडिकल कमिश्नर डॉ. हरप्रीत कौर मान और डॉ. टीपी सिंह शामिल थे। टीम ने अस्पताल का दौरा कर रिपोर्ट में लिखा कि मरीज जिंदा था और बेहद सीरियस था। उसका दिल धड़क रहा था। ईसीजी के साथ परिवार को बताया गया कि किसी मृत व्यक्ति के दिल को वेंटिलेटर से नहीं चलाया जा सकता। वेंटिलेटर सिर्फ मरीज को सांस देता है। परिवार के आरोप सही साबित नहीं हुए।

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