पंजाब / खुले बोरवेल के पास ही बच्चों का प्ले ग्राउंड, भगवानपुरा जैसे हादसे का खतरा



a Borewell open near the Play Ground at Balachaur of Nawanshahar District
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a Borewell open near the Play Ground at Balachaur of Nawanshahar District

  • नवांशहर प्रशासन का दावा-जिले में कहीं खुला नहीं है बोरवेल
  • दैनिक भास्कर ने मनोहर एन्क्लेव कॉलोनी में ढूंढा खुला बोर 
  • एसडीएम बोले-ईओ से कहूंगा बंद करवाएं

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 03:12 PM IST

नवांशहर/बलाचौर (तेज प्रकाश). बलाचौर-गढ़शंकर रोड पर मनोहर एन्क्लेव कालोनी में खुले बोरवेल से जिला संगरूर के गांव भगवानपुरा जैसा हादसा हो सकता है। काॅलोनी के बीचोंबीच खाली प्लाट में किया लगभग 12 इंच चौड़ा यह बोरवेल बिल्कुल जमीन के लेवल पर है। छोटी उम्र का बच्चा ठीक वैसे ही इस बोरवेल में गिरकर हादसे का शिकार हो सकता है, जैसे बीते दिन सुनाम में फतेहवीर सिंह की जान चली गई।

 

सुनाम में 2 साल के बच्चे फतेहवीर की बोरवेल में फंसे रहने से मौत के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेश में सभी जगह बोरवेल बंद करवाने संबंधी निर्देश जारी किए थे। इसके बाद नवांशहर जिला प्रशासन का दावा था कि जिले में कहीं भी खुला बोरवेल सामने नहीं आया है, मगर दैनिक भास्कर ने बलाचौर की मनोहर एनक्लेव काॅलोनी में ऐसा बोरवेल खोज निकाला है, जो काफी समय से खुला हुआ है।

 

मनोहर एन्क्लेव में खुले बोरवेल के बारे में 24 घंटे पहले पत्रकार ने पंजाब सरकार के टोल फ्री नंबर 0172-2740397 पर सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पत्रकार ने बलाचौर के एसडीएम जसबीर सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि नगर कौंसिल के कार्यकारी अधिकारी को मैं कहता हूं। वह मौके का जायजा लेकर बोरवेल बंद करवाएंगे लेकिन देर शाम तक बोरवेल को बंद करवाने के लिए नगर कौंसिल द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। इससे लगता है कि नगर कौंसिल और प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।


बता दें कि डीसी ने जिले में बोरवेल खोदने पर पाबंदी लगाई हुई है मगर जो बोरवेल पहले ही खुदे हुए हैं, उनको ढका नहीं गया है। मनोहर एन्क्लेव कालोनी में खुले बोरवेल से पानी की आवाज आ रही है। यह भी पता चला है कि यह बोरवेल काफी समय पहले खोदा गया था। इसके आसपास एक हौदी भी बनाई गई है, जो टूटी हुई है। इस बोरवेल में से मशीनरी निकाल ली गई है। जिसने बोरवेल में से सामान निकाला है, वह उसे ढकना भूल गया। इस बोरवेल के पास बच्चों के खेलने का ग्राउंड भी है और आसपास के घरों में 1-2 साल के बच्चे हैं, जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक कॉलोनी काटने से पहले यहां पर खेत थे और उसके लिए ट्यूबवैल लगाया गया था। कालोनी काटने के बाद यहां से ट्यूबवैल का सारा सामान तो निकाल लिया गया मगर बोरवेल को ढकना भूल गए। बोरवेल के आसपास ज्यादा झाड़ियां होने के कारण पहले तो इसका पता नहीं लगा। अब जब उन झाड़ियों को आग लगाई गई तो उसमें से खुला बोरवेल मिला। यह बोरवेल कितना पुराना है और कब से ऐसे ही खुला पड़ा है, इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि कुछ लोगों ने इस बोरवेल के आसपास अब ईंटें लगा दी हैं, ताकि कोई सीधा ही इसमें न गिर जाए। इस बारे में बलाचौर निवासी शिवराम पाली, प्रवेश खोसला और अन्य लोगों का कहना है कि फतेहवीर की मौत से पूरे देश का नुकसान हुआ है, क्योंकि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। प्रशासन को चाहिए कि जहां कही भी कोई बोरवेल खुला है, उसे बिना किसी तरह की देरी के बंद करवाए, ताकि फिर कभी किसी का बच्चा ऐसी मौत न मरे।

 

जरूरी गाइडलाइन

  • बोरवेल की खुदाई के 15 दिन पहले जानकारी डीसी या सरपंच को दें।
  • बोरवेल करने वाली कंपनी का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
  • बोरवेल खोदते समय आसपास कंपनी के पता वाला बोर्ड लगाना जरूरी है।
  • बोरवेल के चारों ओर कंटीली तार लगानी होगी।
  • बोरवेल को स्टील के मजबूत ढक्कन से ढकना होगा।
  • बोरवेल की खुदाई के बाद आसपास के गड्ढों को पूरी तरह से भरना होगा।
  • शहरी इलाकों में इन गाइड लाइंस का पालन ईओ की जिम्मेदारी होगी, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसका पालन बीडीपीओ करवाएंगे।
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