जनरल वार्डों के बाद निक्कू वार्ड भी फुल, एक फोटो थेरेपी यूनिट में दो-दो नवजात रखे, इन्फेक्शन का खतरा

Jalandhar News - सिविल अस्पताल के वार्डों के बाद अब जच्चा-बच्चा वार्ड की बिल्डिंग में बना निक्कू वार्ड भी फुल हो गया है। हालात यह...

Nov 10, 2019, 08:07 AM IST
सिविल अस्पताल के वार्डों के बाद अब जच्चा-बच्चा वार्ड की बिल्डिंग में बना निक्कू वार्ड भी फुल हो गया है। हालात यह हैं कि बच्चों के आईसीयू वार्ड में एक बेड पर दो-दो बच्चों को दाखिल कर इलाज किया जा रहा है। इस कारण बच्चों को इन्फेक्शन का डर बढ़ गया है। निक्कू आईसीयू में 7 बेड पर 15 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। एेसा नहीं है कि वार्ड में एक्सट्रा फोटोथेरेपी यूनिट (बेड) नहीं हैं। अस्पताल के पास 5 से 7 एक्सट्रा फोटोथेरेपी यूनिट हैं। वार्ड में 15 बच्चों का इलाज करने के लिए एक ही नर्स है। इस कारण बाकी यूनिट्स को नहीं चलाया जा रहा। स्टाफ का कहना है कि अगर बाकी यूनिट्स को चालू किया गया तो बच्चों की केयर कौन करेगा। मेटरनिटी वार्ड की स्टाफ का कहना है कि अस्पताल में नवंबर में ज्यादा डिलीवरियां होने के कारण निक्कू वार्ड में नवजन्मे बच्चों का लोड ज्यादा है। सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में रोजाना 30 से अधिक बच्चों की डिलीवरी हो रही है।

अनदेखी
सिविल अस्पताल में पिछले दो महीनों से स्टाफ नर्सों की कमी है। कुछ दिन पहले नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट की अगुआई में अस्पताल की सभी नर्सें मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पास अपनी समस्या लेकर गई थीं। वहीं, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मांगट इस बात को मानती हैं कि अस्पताल में नर्सों की कमी है। उन्होंने कहा कि इस बारे में विभाग को लिखित में दिया हुआ है। अस्पताल में जहां 4 नर्सों की जरूरत वहां एक नर्स से काम चलाया जा रहा है। जच्चा-बच्चा वार्ड के एचओडी डॉ. मुनीष कुमार का कहना है कि कई बार बच्चे को पैदा होते ही पीलिया हो जाता है। बच्चों को दो तरह का पीलिया होता है। फीजियोलॉजिकल अाैर पैथालॉजिकल। अधिकतर बच्चों को फीजियोलॉजिकल पीलिया होता है। जो तीन से चार दिन बाद ठीक हो जाता है। यह पीलिया 65 से 70 फीसदी बच्चों में हो जाता है।

स्टाफ की कमी

वार्ड में 15 नवजात की देखरेख के लिए एक ही नर्स तैनात

क्रॉस इन्फेक्शन का ज्यादा खतरा, कम हाेता है दवा का असर : डॉ. महाजन

चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. निखार महाजन का कहना है कि एक समय पर एक फोटोथेरेपी यूनिट पर दो बच्चों का इलाज किया जा रहा हो तो बच्चों को क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इन हालात में फोटोथेरेपी मशीन की किरणें जाे एक बच्चे को मिलनी चाहिए वे दूसरे को ठीक तरह नहीं मिल पातीं। इस कारण जो बच्चा दाे दिन में ठीक होना चाहिए वह देर से ठीक होता है। ऐसे में नवजात बच्चों को लेकर पैरेंट्स को ज्यादा दिन अस्पताल में रुकना पड़ता है।

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