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दिल्ली / भ्रष्टाचार के आरोप में डीएसजीएमसी के प्रधान जीके समेत सभी मेंबर्स के इस्तीफे



मीटिंग के दौरान बाहर निकले मेंबर को समझाते सिरसा। मीटिंग के दौरान बाहर निकले मेंबर को समझाते सिरसा।
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मीटिंग के दौरान बाहर निकले मेंबर को समझाते सिरसा।मीटिंग के दौरान बाहर निकले मेंबर को समझाते सिरसा।

  • जीके के डीएसजीएमसी चुनाव का एलान करने पर हंगामा
  • सुखबीर का फाेन आने के बाद दिया इस्तीफा

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 07:29 AM IST

शेखर घोष, नई दिल्ली. दिल्ली सिख गुुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (डीएसजीएमसी) की मीटिंग में वीरवार को इस्तीफे की बात पर जमकर हंगामा हुआ। हालांकि, हाईकमान के फोन के बाद सभी ने इस्तीफे दे दिए। हुआ यूं कि कमेटी प्रधान मनजीत सिंह जीके पर एक के बाद एक लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद शिअद  प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने मौजूदा कमेटी के 5 पदाधिकारियों समेत सभी 10 मेंबर्स से इस्तीफा मांगा था।

 

इसी को लेकर वीरवार को दिल्ली कमेटी के एग्जीक्यूटिव बॉडी की बुलाई गई मीटिंग में प्रधान जीके ने हाईकमान के आदेश को दरकिनार कर 3 महीने पहले ही डीएसजीएमसी चुनाव करवाने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए डायरेक्टोरेट गुरुद्वारा सर्विसेस दिल्ली सरकार को भी लिख दिया है। इससे हड़कंप मच गया। कई मेंबर चाहते थे कि सभी इस्तीफा दें। हंगामे की खबर जैसे ही हाईकमान को मिली उन्होंने जीके को फोन कर उनके समेत सभी 14 मेंबर्स के इस्तीफे मंगवा लिए। 

 

जीके बोले- जब चुनाव करा रहें तो इस्तीफे का क्या मतलब :

बैठक में दिल्ली कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाईकमान के आदेश को पढ़कर सुनाया। इसमें कहा गया था कि सभी एग्जीक्यूटिव तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दें। इस पर जीके ने कहा, हम अभी चुनाव की घोषणा कर रहे हैं, ऐसे में इस्तीफा का कोई महत्व ही नहीं रह जाता।

 

इस पर मेंबर अवतार सिंह हित ने जीके के बातों का विरोध करते हुए कहा कि जब हाईकमान ने इस्तीफा देने को कहा है तो सभी इस्तीफा दें। इसके बाद मेंबर हरेन्द्रपाल ने जीके से मुखातिब होकर कहा कि हाईकमान ने पद से इस्तीफा देने का आदेश दिया है। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा जीके को सौंपा और काॅन्फ्रेंस हॉल से बाहर निकल गए। इसके बाद जीके ने कहा कि जब चुनाव का एलान हो गया तो इस्तीफे की कोई बात नहीं रह जाती।

 

दिल्ली कमेटी के प्रधान पर भ्रष्टाचार के लगे थे कई संगीन आरोप :
जीके पर शंटी और सरना ने स्कूलों में धार्मिक किताब छपवाने का फर्जी बिल बनाकर 38 लाख रुपए, गुरुद्वारा बंगला साहिब में कर्मचारियों की वर्दी के लिए दान में दिए 51 लाख रुपए, एसी लगाने के लिए दान में मिली रकम, टेंट लगाने के फर्जी बिल बनवाने, अपनी बेटी को बंद हो चुकी कंपनी में गर्म कपड़ों के लिए भुगतान करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में थाना राउज एवेन्यू में लिखित शिकायत भी की थी।

 

सुखबीर का इस्तीफा मांगना गलत, फैसला जनरल हाउस करता है :

एक्जीक्यूटीव मेंबर्स से इस्तीफा लेकर सुखबीर बादल वाह-वाही लूट रहे हैं। बादल गुरुद्वारा कमेटी में किसी पद पर नहीं हैं। गुरुद्वारा कमेटी का सर्वोच्च जनरल हाउस है। 15 मेंबर 55 मेंबरों की कमेटी को भंग नहीं कर सकते। नियमों के अनुसार इस्तीफा लेना है तो जनरल हाउस की मीटिंग बुलाना जरूरी। -सरदार इंदरमोहन सिंह, विशेषज्ञ गुरुद्वारा मामले

 

सुखबीर ने सभी से इस्तीफा ले लिया, इससे साफ है कि मेरे सभी आरोप सही थे। बादल को पता है कि कोर्ट में जीके को सजा होनी है। -गुरमीत सिंह शंटी, पूर्व महासचिव दिल्ली कमेटी

बादल ने भले ही मेंबर्स से इस्तीफा लेकर संगतों के सामने से इन्हें हटा लिया हो पर मैं गुरु के गोलक से मौज उड़ाने वालों को जेल पहुंचाकर दम लूंगा। -परमजीत सिंह सरना, पूर्व प्रधान दिल्ली कमेटी

 

 

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