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बहबलकलां गोलीकांड: एसपी पन्नू और डीएसपी गिल को रिपोर्ट में ऐसी जगह तैनात दिखाया जहां हिंसा हुई ही नहीं थी

जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट में दो अफसरों को क्लीनचिट पर सवाल

परमिंदर बरियाणापरमिंदर बरियाणा | होशियारपुर बहबलकलां गोलीकांड की जांच कर रहे जस्टिस रणजीत सिंह | Last Modified - Aug 13, 2018, 06:08 AM IST

बहबलकलां गोलीकांड: एसपी पन्नू और डीएसपी गिल को रिपोर्ट में ऐसी जगह तैनात दिखाया जहां हिंसा हुई ही नहीं थी

होशियारपुर.बहबलकलां गोलीकांड की जांच कर रहे जस्टिस रणजीत सिंह की ओर से दो पुलिस अधिकारियों एसपी परमजीत सिंह पन्नू और डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल को क्लीन चिट देने और चार अधिकारियों पर केस दर्ज करवाने पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट के अनुसार दोनों अधिकारी उस दिन घटना स्थल पर न होकर दूसरी जगह पर मौजूद थे। हालांकि इससे पहले इस मामले की जांच कर रहे जस्टिट जोरा सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक उक्त दोनों अधिकारियों की मोबाइल लोकेशन बहबलकलां की ही थी। यही नहीं जिन अधिकारियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है उनका भी यही कहना है कि दोनों अधिकारी उनके साथ घटना स्थल पर मौजूद थे।

कैबिनेट मंत्री तृप्त रजिंदर सिंह बाजवा पर लग रहे आरोप:सूत्रों का कहना है कि दोनों अधिकारियों को क्लीन चिट दिलाने में कैबिनेट मंत्री तृप्त रजिंदर बाजवा ने अहम भूमिका निभाई है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बाजवा के खासमखास बलविंदर सिंह पन्नू का भाई अवतार सिंह पन्नू जोकि सिख फॉर जस्टिस मुहिम चला रहा है, के दबाव में ही यह कदम उठाया गया है और इसमें बाजवा ने अहम भूमिका निभाई है। एसपी परमजीत सिंह पन्नू और डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल सिख फॉर जस्टिस के मुखी अवतार सिंह पन्नू और बलविंदर सिंह पंनू के साडू हैं। सूत्रों का कहना है कि इससे पहले डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने यह स्पष्ट स्टैंड ले लिया था कि किसी भी पुलिस वाले को इस मामले में नामजद नहीं किया जाएगा। इसी बीच 5 अगस्त को बाजवा के दो दिवसीय लंदन दौरे के तुरंत बाद बाजवा के दबाब के चलते ही पहले मोगा के पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह और एसपी बिर्कम सिंह के समेत चार पुलिस अधिकारियों को बहबल कलां गोलीकांड में ही नामजद किया गया है।

ऐसे बचाया गया एसपी पन्नू और डीएसपी गिल को:जस्टिस रणजीत सिंह की जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें इन दोनों अधिकारियों को ऐसी जगह ड्यूटी पर दिखाया गया जहां पर कोई हिंसा हुई ही नहीं। रिपोर्ट में इन दोनों का खासतौर पर जिर्क किया गया है। हालांकि इससे पहले जस्टिस जोरा सिंह और रणजीत सिंह कमिशन की जांच दौरान इन दोनों अधिकारियों की टेलीफोन लोकेशन बहबलकलां में आने और उनकी आईजी उमरानंगल के साथ हुई बातचीत का ब्योरा प्राप्त होने की बात कही जा रही थी। वहीं जांच के दौरान इन दोनों अधिकारियों के वहां होने के बयान साथी अधिकारियों ने दिए थे। इसके बावजूद जस्टिस रणजीत सिंह ने इन दोनों अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी है।

बाजवा की इंग्लैंड फेरी एजेंसियों के स्कैनर पर:रविवार को लंदन में सिख फॉर जस्टिस की ओर से रेफरेंडम 2020 के पक्ष में रैली निकाली गई। इसको लेकर यूके और भारत के रिश्ते में तनाव बढ़ गया है। वहीं 5 अगस्त को तृप्त रजिंदर सिंह बाजवा का वहां का दौरा खुफिया एजेंसियों के स्कैनर पर है। हालांकि बाजवा दो दिन बाद ही लौट आए थे लेकिन एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुट गई हैं कि वे इस दौरान वहां किस-किस से मिले।

दो भाइयों की सोच अलग-अलग हो सकती है : बाजवा
मंत्री तृप्त रजिंदर बाजवा ने माना कि अवतार सिंह पन्नू के सगे भाई बलविंदर सिंह पन्नू उनके खास हैं और वह कांग्रेस के बड़े वर्कर हैं। उन्होंने कहा कि दो भाइयों की अलग-अलग सोच हो सकती है। इंग्लैंड दौरे के मामले में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी रिश्तेदार के भोग पर गए थे और मेरा 2020 से कोई लेना-देना नहीं है।

जो है रिपोर्ट में :जस्टिस गोलीकांड की जांच करने वाले जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा, जांच में यह बात सामने नहीं आई कि कोई दो पुलिस वाले सिख फाॅर जस्टिस के मुखी अवतार सिंह पन्नू के रिश्तेदार हंै और उनकी भूमिका के बारे में जो होगा वो जांच रिपोर्ट में ही होगा।

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