इलेक्श्न खास / अमृतसर में भाटिया, गुरदासपुर में भिंडर के नाम पड़ती थी वाेट

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 08:11 AM IST



Bhatia, Gurdaspur, Amritsar, the name of Bhinder used to be
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Bhatia, Gurdaspur, Amritsar, the name of Bhinder used to be
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  • भाटिया काे लगातार 4 बार और सुखबंस भिंडर काे 5 बार मिली कामयाबी
  • 1952 से 1962 तक सांसद रहे मुसाफिर, 1966 में बने सीएम

हरपाल रंधावा/एचएस चाैधरी | अमृतसर/दीनानगर . अाज के दाैर में लाेकसभा चुनाव जीतना अासान नहीं। जीत भी जाएं ताे दाेबारा वापसी करना मुश्किल हाेता है पर कई सियासतदान एेसे हैं जाे एक-दाे बार नहीं, 5-6 बार लाेकसभा चुनाव जीते। एक बार भराेसा करने पर पब्लिक बार-बार माैका देती थी। इस मामले में अमृतसर से छह बार सांसद बने कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया अाैर गुरदासपुर से पांच बार सांसद बनीं सुखबंस काैर भिंडर का नाम सबसे अागे है। भाटिया जहां चार बार लगातार सांसद बने वहीं सुखबंस काैर काे लगातार पांच बार सांसद बनने का माैका मिला। अारएल भाटिया ने पहली बार 1972, फिर 1980, 1985, 1992, 1996 अाैर फिर 1999 में जीत हासिल कर रिकाॅर्ड बनाया था। भाटिया के लगातार चार बार जीत के रिकाॅर्ड पर 1998 में भाजपा कैंडिडेट दया सिंह साेढी ने 1998 में ब्रेक लगाई थी। गुरमुख सिंह कांग्रेस अाैर दया सिंह साेढी बीजेपी के पहले सिख चेहरे बने थे। बाद में दूसरा सिख चेहरा अमृतसर से नवजोत सिंह सिद्धू बने। सिद्धू तीन बार सांसद बने अाैर अब कैप्टन सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

 

लाेकसभा प्रत्याशी के रूप में भाटिया ने कुल 6 बार किया अमृतसर का प्रतिनिधित्व

 

गुरुनगरी से गुरमुख के बाद कैप्टन बने मुख्यमंत्री : अमृतसर से सांसद बनने के बाद सीएम बनने वाले गुरमुख सिंह पहले पाॅलिटिशियन थे। 1 नवंबर 1966 से 8 मार्च 1967 तक सीएम रहे। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा के अरुण जेटली को शिकस्त दी। दूसरी बार सीएम बनने पर कैप्टन ने सांसद पद छोड़ दिया। उपचुनाव में कांग्रेस के ही गुरजीत सिंह औजला सांसद बने।

 

गुरदासपुर में विनाेद खन्ना ने राेका था भिंडर का विजयी रथ : कांग्रेस की पांच बार की सांसद सुखबंस कौर भिंडर काे हराने के लिए भाजपा ने सिने स्टार विनोद खन्ना को 1998 में चुनाव में उतारा था। भिंडर ने 1980, 1985, 1989, 1992 और 1996 में पांच बार जीत हासिल की। 1998 में विनोद खन्ना 106833 वाेटाें के बड़े अंतर से भिंडर काे हराने में कामयाब रहे। 2004 तक तीन चुनाव में हार के बाद भिंडर को कांग्रेस ने राज्यसभा मेंबर बना दिया।

 

चुनावी राजनीति के बाद केरल, बिहार के बने गवर्नर : अमृतसर से कांग्रेस के सीनियर नेता आरएल भाटिया काे 2004 में केरल का गवर्नर नियुक्त किया गया। वह जुलाई 2008 तक इस पद पर रहे। फिर साल 2008 में भाटिया को बिहार का गवर्नर नियुक्त किया गया। जहां पर वह जून 2009 तक गवर्नर रहे। भाटिया इन दिनों अस्वस्थ हैं। इस कारण भाटिया पाॅलिटिक्स से पीछे हट गए हैं।

 

लगातार जीतने वाले भाटिया 77 में रिकाॅर्ड अंतर से हारे : अमृतसर के चुनावी नतीजे कई बार उलटफेर करने वाले रहे हैं। लगातार चार बार सांसद बन रिकॉर्ड बनाने वाले रघुनंदन लाल भाटिया ने 1977 में सबसे बड़ी हार का रिकॉर्ड भी बनाया था। भाटिया को बीएलडी के बलदेव प्रकाश ने 25041 वोटों के अंतर से हराया था। 1977 में हार के बाद भाटिया 1980 में जीतने में सफल हुए थे। गुरु नगरी से भाटिया को 6 बार, गुरमुख सिंह मुसाफिर को 3 बार और नवजोत सिंह सिद्धू को 3 बार सांसद बनने का मौका मिला। बाकी सांसद एक-एक बार ही जीतने में सफल हुए हैं। अब कांग्रेस के सिटिंग सांसद गुरजीत सिंह औजला दूसरी बार चुनाव मैदान में है। औजला अगर जीतते हैं तो अमृतसर से लगातार कामयाबी हासिल करने वाले नेताओं में इनका नाम भी शामिल हो जाएगा।

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